शमा के पास परवान आया है उसे बाती ने बुलाया है — आनंद शास्त्री
प्यारे मित्रो ! विगत जन्मों से आने वाले जन्मों तक एक सच्चे साधक की यही अंतर्कथा होती है कि- “यूँ ही नहीं होती अंधेरों में रौशनी। खुद को जला जलाकर सितारे हुवे हैं हम॥” यह शरीर भी एक दीपक की बाती है जो निरन्तर जलते जलते धीरे-धीरे भष्म हो जाती है ! आज तुम सबसे-“अनहद … Read more