युग के युवा मत देख दाएँ और बाएं – हरिवंश राय बच्चन 

युग के युवा, मत देख दाएँ, और बाएँ, और पीछे, झाँक मत बगलें, न अपनी आँख कर नीचे; अगर कुछ देखना है, देख अपने वे वृषभ कंधे जिन्हें देता निमंत्रण सामने तेरे पड़ा युग का जुआ, युग के युवा! तुझको अगर कुछ देखना है, देख दुर्गम और गहरी घाटियाँ जिनमें करोड़ों संकटों के बीच में … Read more

तकनीक से खुल रहे हैं हिन्दी के लिये नये द्वार –डॉ.राजीव कुमार रावत

हिंदी भारत की सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जिसकी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत है। यह एक ऐसी भाषा है जो सदियों से विकसित होती रही है, अपने में विभिन्न प्रभावों को समाहित करते हुए, और आज भी यह अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। हिंदी भाषा, जो … Read more

5 सितम्बर/जन्म-दिवस आदर्श शिक्षक डा. राधाकृष्णन

प्रख्यात दर्शनशास्त्री, अध्यापक एवं राजनेता डा. राधाकृष्णन का जन्म पाँच सितम्बर 1888 को ग्राम प्रागानाडु (जिला चित्तूर, तमिलनाडु) में हुआ था। इनके पिता वीरस्वामी एक आदर्श शिक्षक तथा पुरोहित थे। अतः इनके मन में बचपन से ही हिन्दू धर्म एवं दर्शन के प्रति भारी रुचि जाग्रत हो गयी। उनकी सारी शिक्षा तिरुपति, बंगलौर और चेन्नई … Read more

भारतीय भाषाओं के उन्नयन और समन्वय के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित भारतीय भाषा समिति द्वारा किए जा रहे सार्थक प्रयास

हमारे विशेष प्रतिनिधि दिलीप कुमार जी ने पिछले दिनों दिल्ली प्रवास के दौरान भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की, उनसे बातचीत के आधार पर जो जानकारी प्राप्त हुई, उसका सारांश प्रस्तुत है: कौन है आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री: आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष हैं। आप एक … Read more

हमारे दरमियां क्या था?

आग थी, बिजली थी, बारिश थी, तूफां था हमारे दरमियां क्या था? तुम्हारे होंठ हिलते थे तितलियां हर सूं उड़ती थीं हमारी उंगलियां जब भी कभी आपस में मिलती थीं  ओस थी, पानी था, आंसू थे, पसीना था हमारे दरमियां क्या था? आग थी, बिजली थी, बारिश थी, तूफां था हमारे दरमियां क्या था? बदन … Read more

विश्वगुरु के पद से विभूषित-दिवस का स्मरण — डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’

  हमारी मातृ-भूमि पर ऐसे अनेक व्यक्तियों का जन्म हुआ है, जिन्हें ईश्वर का अवतार माना गया। ऐसे महान पुरुषों में विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न स्वामी विवेकानन्द है। ये हमारी भारतीय संस्कृति के उन्नायक हैं। आज से सपाद-शताब्दी वर्ष पूर्व 11 सितम्वर, 1893 ई. को विश्वधर्म परिषद्- शिकागो में आंग्लों से गुलाम होते हुए भी उन्होंने … Read more

कहता तुमको युग मानव – सुमित्रानंदन पंत

दर्प दीप्त मनु पुत्र, देव, कहता तुमको युग मानव, नहीं जानता वह, यह मानव मन का आत्म पराभव! नहीं जानता, मन का युग मानव आत्मा का शैशव, नहीं जानता मनु का सुत निज अंतर्नभ का वैभव! जिन स्वर्गिक शिखरों पर करते रहे देव नित विचरण, जिस शाश्वत मुख के प्रकाश से भरते रहे दिशा क्षण, … Read more

4 सितम्बर/जन्मदिवस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी, लेखक तथा समाजशास्त्री भूपेंद्रनाथ दत्त

भूपेंद्रनाथ दत्त का जन्म 4 सितंबर, 1880 ई. को कोलकाता में हुआ था। इनके परिवार का बंगाल के प्रबुद्ध व्यक्तियों से निकट का संबंध था। भूपेंद्रनाथ की आरंभिक शिक्षा ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा स्थापित विद्यालय में हुई थी। उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों के साथ अपना अध्ययन भी जारी रखा और अमेरिका से एम.ए. और जर्मनी से … Read more

3 सितम्बर/बलिदान-दिवस बाल बलिदानी कुमारी मैना

1857 के स्वाधीनता संग्राम में प्रारम्भ में तो भारतीय पक्ष की जीत हुई; पर फिर अंग्रेजों का पलड़ा भारी होने लगा। भारतीय सेनानियों का नेतृत्व नाना साहब पेशवा कर रहे थे। उन्होंने अपने सहयोगियों के आग्रह पर बिठूर का महल छोड़ने का निर्णय कर लिया। उनकी योजना थी कि किसी सुरक्षित स्थान पर जाकर फिर … Read more

“राजभाषा हिन्दी के 75 वर्ष… मंज़िलें अभी बाकी हैं…”–डॉ इन्दु गुप्ता

सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य को स्वयं को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता रही है; निश्चित ही भाषा की उसमें महत्वपूर्ण भूमिका भी रही होगी। दुनिया-भर में हमारी संस्कृति हमारी समृद्ध परम्परा और हमारे गुरूत्व का प्रचार प्रसार करने का श्रेय जिसे जाता है वह है हमारी भाषा हिन्दी। संस्कृत की ज्येष्ठा-आत्मजा है हिन्दी। जैसे … Read more