कविता: दीपों का उत्सव – दीपावली 

दीपों की रौशनी से जगमगाता है घर, हर कोना महके जैसे फूलों का नगर। प्रकाश की किरणें लाती हैं नई उमंग, मन में जगाती हैं आशा के रंग। 🌠 अंधकार को दूर भगाती है दीपावली, हर हृदय में जगाती नई रोशनी। दुखों के साए को करती है पल में गायब, हर चेहरे पर मुस्कान का … Read more

आज ऐसे क्रान्तिकारी चाहिए 

जो स्वयं कर्तव्य पथ की, साधना को साध लें। आपदा की आँधियों को, मुट्ठियों में बाँध लें। थरथरा उट्ठें कलेजे, नाम सुनकर पाप के। शब्द अपने आप उल्टे, लौट जाएँ शाप के।। क्रूर होकर जो अहं को, खूँटियों पर टाँग दें। हर प्रहर मुर्गे सरीखी, जागने की बाँग दें। जो हृदय इंसानियत के, राग के … Read more

” तुम महामूर्ख हो “

किसी ने दरवाजा खटखटाया मै दरवाजा खोला सम्मुख सखा को पाया उसने मुस्कुराया अभिवादन स्वरूप मै भी मुस्कुराया उसने कहा- युद्धस्तर पर जा रहा था गरमी काफी लगी लिहाजा थोड़ा सुसताने आया हूँ मैंने कहा- आओ सुसताव यह मेरा शौभाग्य होगा उसने पीठ पीछे से खंजर निकाल चारपाई पर लेटा पीठ पीछे खंजर देख मै … Read more

माँ की टीस

एक टीस नहीं, एक कसक है जो कलेजे में चुभती है, जब कोई बेख़बर आकर कहता है: “एक और कर लो, घर पूरा हो जाएगा!” समाज का गणित है— स्त्री का जीवन सफल हो जाता है, जब उसके आँचल में दो या दो से अधिक फूल खिलते हैं। पर कोई नहीं देखता कि उस स्त्री … Read more

पुलिस रस्सी को कैसे सांप बनाती है?

एक बार एक दरोगा जी का मुंह लगा नाई उनसे पूछ बैठा …..”हुजूर मैंने सुना है कि कुछ पुलिस वाले रस्सी का साँप बना देते हैं…. आख़िर कैसे ?” दरोगा जी बात को टाल गए। लेकिन नाई ने जब दो-तीन बार यही सवाल पूछा, तो दरोगा जी ने मन ही मन तय किया कि इस … Read more

कहानी नालायक बेटा

नालायक… “बेटा, हमारा एक्सीडेंट हो गया है। मुझे ज्यादा चोट नहीं आई पर तेरी माँ की हालत गंभीर है। कुछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खून चढ़ाना है।” बासठ साल के माधव जी ने अपने बड़े बेटे से फोन पर कहा। “पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल… । मेरा आना नहीं हो … Read more

महात्मा गांधी

सादा जीवन, ऊँचे विचार, सत्य-अहिंसा उनके हथियार। न्याय की राह पे चलते रहे, सत्य के दीपक जलते रहे। चरखा बन गया पहचान नई, आवाज़ बनी हर हिन्दुस्तानी। न नफ़रत, न कोई युद्ध पुकार, बस प्रेम, शांति और सत्य का संसार। छोटी काया, पर मन था विशाल, देशभक्ति में उनका नहीं कोई मिसाल। कदम-कदम पर सिखाया … Read more

क्या करना चाहिए?

अचानक रास्ते में एक बिजली के खंभे पर समीर की दृष्टि पड़ी तो उसने उसपर कुछ कलम से लिखा हुआ पन्ना चिपका हुआ देखा। पास जाकर पढ़ा तो उसपर लिखा था – “कृपया ध्यान दीजिए…… इस रास्ते पर कल मेरा एक सौ रुपए का एक नोट गिर गया था । मुझे ठीक से दिखाई नहीं … Read more

-पुस्तक समीक्षा- ‎बराक घाटी की बांग्ला कविताएँ (हिन्दी में अनुदित) द्वारा अशोक वर्मा समीक्षक- डा. ‎रीता सिंह ‎आज मैं बालार्क प्रकाशन के कर्णधार अशोक वर्मा जी की हिन्दी में अनुदित पुस्तक बरांक घाटी की बांग्ला कविताएं के बारे में अपनी अति सीमित बुद्धि-अनुभव और क्षमता के आधार पर कुछ लिखने की कोशिश कर रही हूं। … Read more

गीतः प्रीत की बारिश

गीतः प्रीत की बारिश प्रीत की बारिश जब भी बरसे, मन की बगिया हँसने लग जाए सुगंधित हो जाए हर कोना, खुशियों की गूंज हवाओं में आए हर पत्ता झूमे रुनझुन रुनझुन, बूँदै गाएँ प्रेम का गीत मोर नाचे रे सावन में, भीग जाए मन, हो जाए प्रीत चूमें चंदन सी ठंडी बयार, छू जाए … Read more