मायके की दिवाली 

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाली से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार । बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी … Read more

गीत : ज्ञान प्रकाश जला दो मन में

(धुन – “तू प्यार का सागर है”) ज्ञान प्रकाश जला दो मन में, हर तम दूर भगा दो, भयभीत न हों जीवन में हम, वो आग हृदय में जगा दो ॥ “असतो माँ सद्गमय” असत् के पथ से निकालो हमको, सत्य दिशा दिखा दो, भटके मन के अंधेरों में, दीप विवेक जला दो ॥ सच्चे … Read more

गरीब माँ और बेटी की दिवाली

एक छोटे से गाँव में एक माँ और उसकी नन्ही सी बेटी, गुड़िया, रहती थीं। उनका घर मिट्टी का था, छप्पर से ढका हुआ। माँ दिन भर दूसरों के घरों में काम करती थी — झाड़ू-पोछा, बर्तन-माँजना — ताकि शाम को चूल्हा जल सके। दिवाली नज़दीक आ रही थी। गाँव के हर घर में रोशनी … Read more

मायके की दिवाली

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाले से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार। बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी और … Read more

काली

बदरपुर श्रीगौरी गाँव अपने प्राकृतिक सौंदर्य का भंडार था, जहाँ छोटे-बड़े कच्चे-पक्के मकान और नन्हे-नन्हे पोखरों का घेरा था। गाँव के पास से गुज़रती रेल लाइन के किनारे चावल के खेतों की हरियाली मन मोह लेती थी। सुनहरी मिट्टी की पगडंडियों के किनारे खिले जंगली फूलों की रंगत आँखों को तरो-ताज़ा कर देती थी। उसी … Read more

काली – डॉ मधुछन्दा चक्रवर्ती 

बदरपुर श्रीगौरी गाँव अपने प्राकृतिक सौंदर्य का भंडार था, जहाँ छोटे-बड़े कच्चे-पक्के मकान और नन्हे-नन्हे पोखरों का घेरा था। गाँव के पास से गुज़रती रेल लाइन के किनारे चावल के खेतों की हरियाली मन मोह लेती थी। सुनहरी मिट्टी की पगडंडियों के किनारे खिले जंगली फूलों की रंगत आँखों को तरो-ताज़ा कर देती थी। उसी … Read more

मायके की दिवाली

दिवाली तो हर साल मनाते हैं, पर जो बात मायके की दिवाली में थी, वह बात और कहाँ। दिवाले से पहले स्कूल के, बंद होने का इंतज़ार। बाज़ार से जाकर, पटाखे लाने का इंतज़ार । इनमें छुपा होता था, कितना सुखद संसार । सजना- संवरना, सुंदर दिखना और इंतज़ार होता था माँ की दालपुरी और … Read more

बरम बाबा  परिसर में अयोध्या

असम में जीने के आधार कह सकते  हैं बरम बाबा  को। घर से आठ किलोमीटर दूर पहाड़ियों  के बीच सरोज-सरोवर के  समीप पंच मंदिरों  का समूह। अद्भुत आकर्षण का केन्द्र दूर से  सुगंधित हवाएं आच्छादित हो जातीं मन के समस्त  वलयों पर। भोर से सजा- संवरा संयुक्त और  पृथक मंदिरों का समूह बरम बाबा भोजपुरी … Read more

सूर्य सी चमक और उजाला मुट्ठी में…!!

हौंसलें  है संग  तो,पर्वत को  भी हम हिलाते हैं, लक्ष्य को  पल में अपनी, बांहों में भर  लाते हैं |   एकअसफलता ने हमको,सच में जीना सिखाया, राह  की  ठोकरें खा,फिर उत्साह से जुट जाते हैं |   निरंतर प्रयास की गंगा को, देकर ताज़गी यूँ ही, ऊँचे आसमान को अपने, कदमों  में झुकाते  हैं … Read more

वसियत देखकर हैरान हुए परिवार के लोग ( लघुकथा)

जुम्मन खान अटपटे काम करता ना काम ना पढाई। जगह जगह बदनाम होने के साथ साथ घर खेत बेचकर माँ बाप बचाते रहे। माँ बाप ने अनपढ़ लङकी के साथ काफी छोटी उम्र की लङकी की शादी इसलिए कर दी क्योंकि ऐसे अधिक उम्र के लङके के साथ कौन शादी करता। जुम्मन की पत्नी साजिदा … Read more