हिन्दी, हिन्दु और हिन्दुस्थान आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! अपनी बाल्यावस्था में पढी कविता के ये अंश मुझे बार-बार सचेत करते रहते हैं कि- “जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” मैं हमेशा ये सोचता आया हूँ कि-“भाव और भावना” में अंतर होता है ? और क्यों … Read more