शीर्षक -: समझदार प्रधान से संघ ,संगठन ,संस्था स्थापित करते कीर्तिमान–सुषमा पारख

मुखिया !मुखिया शब्द मुख्यतः प्रभुख व्यक्ति के लिये प्रयोग में लिया जाता हैं ,वो व्यक्ति जिसके हाथ में परिवार ,संघ,संगठन या संस्था की बागडोर रहती हैं वहाँ मुखिया को अधिकार होता हैं की वो अपने विवेक से नीति नियम और कर्तव्य अधिकार का निर्धारण करे जो सबके हित में हो ,अब इस अधिकार का ईमानदारी … Read more

पहले रूस नहीं , मणिपुर जाना चाहिए प्रधानमंत्री को ! — अशोक भाटिया

हाल ही में अख़बारों में छपे समाचारों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने रूस का दौरा कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक उनकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक होनी है। रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद ऐसा पहली बार होगा कि प्रधानमंत्री  मोदी रूस जाएंगे। लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल करने के बाद … Read more

जामुन की लकड़ी के कितने उपयोग?

?अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं। ?जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है। ?पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके … Read more

भ्रष्टाचार के जाल में आंधियां पिस रही हैं !– सुनील कुमार महला

तापमान गज़ब ढा रहा है। चर्चा ‘फ्रीज’ की होनी चाहिए लेकिन फ्रीज नहीं आजकल ‘ब्रिज’ काफी चर्चा में हैं। अजी ! ‘ब्रिज’  मतलब ‘पुल’। अंग्रेजी में डिटेल से समझाएं तो ‘ब्रिज’ का मतलब होता है -‘एक नदी, खड्ड, सड़क, रेलमार्ग या अन्य बाधा के पार सड़क, पथ, रेलमार्ग या नहर ले जाने वाली संरचना।’ खैर, … Read more

ओम बिरला होने का मतलब सोने जैसे दिल वाला सामाजिक कार्यकर्ता कैसे बना राष्ट्रीय राजनीति का सितारा -प्रो.संजय द्विवेदी

  ओम बिरला में ऐसा क्या है जो उन्हें लगातार दूसरी बार लोकसभा के अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी पर पहुंचाता है। अपने कोटा शहर में जरूरतमंद लोगों को कपड़े, दवाएं, भोजन पहुंचाते-पहुंचाते बिरला कब राष्ट्रीय राजनीति के सितारे बन गए, यह एक अद्भुत कहानी है। प्रधानमंत्री ने सदन में उनके द्वारा चलाए जा रहे अनेक … Read more

फटाफट का जमाना – सुनील महला

आज का जमाना फटाफट का जमाना है। या यूं भी कह सकते हैं कि अब ठकाठक,गटागट का जमाना है। यहां देरी करने वालों को कोई स्थान नहीं है। बेरोजगारी दूर करनी है तो फटाफट कीजिए। महंगाई दूर करनी है तो फटाफट कीजिए। काम कोई भी हो, ठकाठक ,फटाफट होना ही चाहिए। राजनीति भी इस फटाफट, … Read more

प्राकृतिक प्रदूषण, बढ़ता तापमान – सुनील महला

प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर ह्वास, बढ़ती आबादी, बढ़ते पर्यावरणीय प्रदूषण, औधौगिक विकास, बढ़ते कंक्रीट के जंगलों, वनों के लगातार ह्वास और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता की कमी के कारण धरती पर गर्मी लगातार बढ़ रही है। जानकारी देना चाहूंगा कि राजस्थान के फलौदी का तापमान हाल ही में पचास डिग्री सेल्सियस हो गया। नौतपा के … Read more

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: एक अद्वितीय विचारक और राजनेता–डॉ प्रग्नेश परमार

भारतीय इतिहास में, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसा नाम है जिसने अपनी जीवनी और कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था और उनका निधन 23 जून 1953 को हुआ था, लेकिन उनकी विचारधारा और कार्यक्षमता आज भी हमारे देश के इतिहास में अमर हैं। डॉ. मुखर्जी का जीवन एक उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति अपने विचारों और संकल्प से समाज को प्रेरित कर सकता है और राष्ट्र के लिए समर्पित कार्य कर सकता है। जीवनी श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कलकत्ता में हुआ था, जो वर्तमान में कोलकाता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने शिक्षा उच्च स्तर पर प्राप्त की और ब्रिटिश इंडिया के बाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गहरी रुचि ली। उन्होंने अपनी विशेष अध्ययन और विद्वता के साथ राजनीति में भी कदम रखा और 1940 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो बाद में भाजपा के नींव का रूप ले ली। शिक्षा और योगदान डॉ. मुखर्जी ने अपनी शिक्षा विशेषांक में विशेष रूप से भौतिकी में की थी और उन्होंने विशेष रूप से अंग्रेजी में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की थी। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रोफेशनल क्षमताओं को उपयोग किया, जैसे राजनीति, विचारशीलता, और सामाजिक कार्य। उन्होंने अपने दृढ़ और स्पष्ट विचारों के माध्यम से राष्ट्र को एक दिशा में प्रेरित किया और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजनीतिक करियर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की राजनीतिक करियर उनके विचारशीलता, साहस, और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने अपनी जिन्दगी में विभिन्न महत्वपूर्ण पद धारित किए, जैसे कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष, जिसे बाद में भारतीय जनता पार्टी के नींव का रूप दिया गया। उनका सियासी सफर उन्होंने अपनी अद्वितीय दृष्टिकोण और संघर्षशीलता से भरा था, जिसने उन्हें एक प्रमुख विचारक और नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करवाया। विचारधारा और विचारशीलता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा और विचारशीलता उन्हें अन्य प्रमुख नेताओं से अलग बनाती है। उनका विचार बड़े ही साहसिक और राष्ट्रभक्ति पूर्ण था, और उन्होंने हमेशा अपने देश के हित में काम किया। उनकी राष्ट्रीय धारा के प्रति विशेष समर्पण और संघर्ष की उनकी विशेषता थी, जिसने उन्हें लोकप्रिय बनाया और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई। समाजसेवी श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन विविधता से भरा था। उनका समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष रुचि थी और वे अपने जीवन में विभिन्न सामाजिक प्रोजेक्ट्स का समर्थन करते रहे। उनकी अपनी प्रेरणा के आधार पर, वे विभिन्न स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय रहे और जनता की सेवा में अपना समय और ऊर्जा लगाते रहे। विचारों का प्रभाव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार और उनकी विचारधारा ने भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। उनका समर्थन और नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाया और उनके विचार ने एक नई राजनीतिक दृष्टिकोण को उजागर किया। उनके उत्कृष्ट स्वभाव, विचारशीलता और समर्पण की वजह से, वे आज भी याद किए जाते हैं और उनके विचार एवं सिद्धांत नई पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं। निष्कर्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसे नेता थे जो अपने विचारों, समर्पण और साहस के कारण अद्वितीय हैं। उनकी जीवनी और कार्यकाल ने दिखाया कि एक व्यक्ति कैसे राष्ट्र के लिए समर्पित होकर उसके विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। उनके विचार, सिद्धांत और समर्थन ने भारतीय राजनीति और समाज को सुदृढ़ बनाया और उनकी यादें हमें आज भी प्रेरित करती हैं। इस प्रकार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की महानता को समझना और उनके योगदान को सम्मानित करना, हमारे राष्ट्रीय इतिहास में उनकी अद्वितीय स्थिति को स्पष्ट करता है। उनके विचार और संघर्ष ने हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया है और उनके योगदान को हमेशा याद रखना चाहिए। — Dr. Pragnesh B. Parmar MBBS, MD (Forensic Medicine), GSMC-FAIMER, PGDHL, AMAHA, ACME Additional Professor & HOD Department of Forensic Medicine and Toxicology All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Bibinagar Hyderabad Metropolitan Region (HMR) – 508126, Telangana, India … Read more

भारत और कनाडा के बीच संबंधों में आई है उल्लेखनीय खटास-अतनु दास

अतनु दास , वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व पीटीआई  नई दिल्ली २५ जून : वर्तमान समय में भारत और कनाडा के रिश्तों में बेहद खटास आई है।नौबत यह आ गई है कि दोनों देश, एक दूसरे के अधिकारियों को अपने देश से निकाल रहे हैं।ज्ञातव्य है कि पहले कनाडा ने भारतीय दूतावास से एक अधिकारी को निष्कासित … Read more

आपातकाल  में लोकतंत्र की हत्या– तनसुख राय राठी

25 जून 1975 के मध्य रात्रि हिंदुस्तान के इतिहास की वह घड़ी थी जब स्वतंत्रता के बाद भी लोकतंत्र की हत्या की गई ।    अपनी कुर्सी बचाने के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार ने 1975  में देश पर आपातकाल थोप कर लोकतंत्र के साथ जिस तरह से क्रूर मजाक किया वह स्वतंत्र भारत … Read more