भक्तिसूत्र प्रेम-दर्शन देवर्षि नारद विरचित सूत्र-१७–आनंद शास्त्री
प्रिय मित्रों ! मैं पुनःआप सबकी सेवामें देवर्षि नारद कृत भक्ति-सूत्र का सत्रहवां सूत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ-आप सबके ह्यदय में स्थित मेरे प्रिय श्री कृष्ण जी के चरणों में इसके इस सूत्र-पुष्प को चढा रहा हूँ,यहाँ कहते हैं कि- “कथादिष्विति गर्गः।।१७।।” श्रीगर्गाचार्यजीके मतानुसार भगवद् कथा-मृत्-स्वादन में अनुराग का होना ही भक्ति है। आदरणिय सखा वृँद ! वस्तुतः कथाऽमृत् का रसास्वादन अर्थात्- “मुदमंगलमय संत-समाजू’जिमि … Read more