आपणों मारवाड़ी समाज कठे जा रियो है. (लीक लखोटिया नं.6.)

‘मारवाड़ी समाज पुराणतो अर आजको”. पुराणतो अर आजका मारवाड़ी समाज का लोंगां मं भोत फर्क है.आज है शक्ति सूं उपर दिखाओ अर कर्म की अपेक्षा जर, जोरु ,जमीं मं विशेष रुचि.पहली थी साधारण आवश्यकता की पूर्ती अर सुविधा.आज जो साधारणता है ,बा पूरी बदलगी. समयानुसार कोनी बदली, पर बदलगी आवश्यकता  आपणां संस्कारां न किनारे फेंक … Read more

राजस्थानी( मारवाड़ी ) मूल के  विशिष्ट असमिया व्यक्तियों के खण्ड चित्रण  लेखक – घनश्याम लडिया

 मेरा जन्म बौद्धिक परिवेशवाले स्व.भगवती प्रसाद लडिया के कुल में भगवती देवी के कोख से असम प्रान्त के गोलाघाट शहर में हुआ | मेरा लालन पालन बौद्धिक व सामाजिक समरसता के परिवेश मे हुआ, जिसमे मैं  उस समय की आबहवा के प्रभाव के चलते कभी कभी लिखने का प्रयास ( प्रयत्न  ) करता हूँ  | … Read more

सत्कर्म और सहयोग

हमें नि:स्वार्थ भाव से सत्कर्म करना चाहिए। सत्कर्म करने के बावजूद यदि जीवन में किसी प्रकार का अनिष्ट होता है तो हमें विचलित नहीं होना चाहिए इसे प्रारब्ध मानकर ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखते हुए अपना परिश्रम व प्रयास निरंतर जारी रखना चाहिए क्योंकि विद्वानों ने कहा है कि परिश्रम से भाग्य बदल सकता … Read more

औरत

आख़िर में, हर औरत ऐसे पुरुष की चाहत रखती है, जिसके कंधे पर सिर रखकर वह कुछ पल रो सके, जिसके साथ निश्चिंत होकर दिल खोलकर हंस सके। या फिर ऐसे पुरुष के साथ रह सके, जिसकी मौजूदगी में उसे कभी अकेले चाँदनी की ठंडक में डूबने का पछतावा न हो। रिश्ते कभी शारीरिक होते … Read more

सत्कर्म और सहयोग

किसी ने ठीक ही लिखा है सरकारी कर्मचारी, नौकरशाह काम नहीं करने का वेतन लेते हैं और काम करने का उत्कोच लेते हैं। चाटुकार सत्य नहीं बताने के कारण उपहार पाता है। नेता, अपने कथनी और करनी में फर्क रखने के कारण चुनाव का टिकट पाता है। हालांकि ये दिन अब पलट रही है।हमें  नि:स्वार्थ … Read more

ऐसी मुस्लिम भीड़ हिन्दुओं को डराती है —      आचार्य श्रीहरि

भारत आजादी के पूर्व की मुस्लिम हिंसक राजनीति की पुनरावृति फिर से होने लगी है। इसकी एक झांकी दिल्ली के जंतर-मंतर पर देखने को मिल रही है जहां पर मजहबी मुस्लिम भीड अपना संहारक रूप दिखा रही है। ऐसी भीड़ और भाषा आजादी के पूर्व विखंडन का डर दिखाती थी। ऐसी भीड और भाषा इसके … Read more

भारतीय मुद्राएँ

  प्रस्तावना प्रस्तुत लेख “भारतीय मुद्रा” विषय पर केंद्रित है, जो सिक्कों के निर्माण और उनके ऐतिहासिक उपयोग को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि धातुओं के प्रयोग के कारण उनका मूल्य बढ़ा और धीरे-धीरे वे मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होने लगीं। पहले तांबा, फिर चांदी और सोना प्रमुख सिक्कों के रूप में … Read more

अब वृद्धाश्रम नहीं।

यह कैसी विडंबना है कि एक माता-पिता अपने तीन -चार संतान को एक समान, लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा देकर एक सफल व्यक्ति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है, वहीं संतानें मिलकर भी अपने वृद्ध माता-पिता को देख- भाल, सेवा- सत्कार नहीं कर पाती है।उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ आती है। आखिरकार ऐसी मानसिकता क्यों पनपती जा रही … Read more

श्री चैतन्य महाप्रभु: भक्ति आन्दोलन के अग्रदूत — डा. रणजीत कुमार तिवारी

श्री चैतन्य महाप्रभु भारतीय भक्ति आंदोलन के महान प्रवर्तकों में से एक थे। उनके द्वारा प्रवाहित भक्ति-रसधारा ने संपूर्ण समाज को आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित किया। वे न केवल एक महान संत थे, बल्कि ईश्वरीय प्रेम की प्रत्यक्ष मूर्ति भी माने जाते हैं। उनके जीवन और कार्यों ने वैश्विक स्तर पर भक्तिभावना को प्रोत्साहित किया। … Read more

लीकलकोटीयो कोनी जावे. ( होली पर मस्ती)

अभी कल ही हमारे समाज के खुद मियां मिट्ठू,समझ गये होंगें, नहीं समझे तो मैं क्या करुं ?आप यूं करो हमारे नगर श्री हां अभी तक तो श्री ही लिखूंगा उनके जाने के बाद अर्थात् शिलचर जाने के बाद भी तो श्री ही लिखूंगा,नगर श्री अपनी मोटी बुद्धि के अनुसार अमर होते है। अभी तक … Read more