संवाद ही नक्सलवाद का स्थाई समाधान है ! — सुनील कुमार महला

देश से माओवाद(नक्सलवाद) लगातार समाप्ति की ओर है, यह काबिले-तारीफ है। मीडिया रिपोर्ट्स बतातीं हैं कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों ने बुधवार 21 मई को 27 माओवादियों को मार गिराया है। दरअसल, बस्तर संभाग के नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा ज़िलों की सीमा पर मुठभेड़(एनकाउंटर) में ये माओवादी मारे गए हैं। इस संदर्भ में हमारे … Read more

किस करवट बैठेगी बिहार की सियासत – राधा रमण

आर्थिक तौर पर पिछड़ा माना जानेवाला बिहार राजनीतिक रूप से काफी जागरूक प्रदेश रहा है। 90 के दशक तक बिहार की सियासत कांग्रेस समर्थन और कांग्रेस विरोध पर टिकी थी। लेकिन 1990  की 10 मार्च को लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब तक बिहार की राजनीति लालू समर्थन … Read more

पाक-ड्रैगन की एक चाल: भारत का सतर्कता बरतना आवश्यक ! — सुनील कुमार महला

हाल ही में भारत के थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज’ ने एक खुलासा किया है कि चीन की सैटेलाइट मदद से पाकिस्तान को अपना एयर डिफेंस सिस्टम और रडार फिर से व्यवस्थित करने में मदद मिली। साथ ही चीन ने पाकिस्तान को एयर डिफेंस सिस्टम भी दिया था। वास्तव में, यह वाकई बहुत … Read more

आखिर क्यों घट रही है गंगा डॉल्फिन की आबादी ? — सुनील कुमार महला

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या आज भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व की एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। मनुष्य तो मनुष्य पशु-पक्षियों और जलीय जीवों को पर्यावरण प्रदूषण से बहुत नुक्सान पहुंच रहा है, लेकिन इनका कोई धणी-धोरी नजर नहीं आता। यह बहुत ही दुखद है कि आज हमारे देश में पर्यावरण प्रदूषण से जीव-जंतुओं … Read more

नीम की छांव

पहाड़ों की गोद में बसा एक छोटा-सा गाँव था, शांति से भरा, लेकिन अभावों से जूझता। वहीं रहता था एक साधारण किंतु असाधारण इंसान धीरज। नाम जैसा स्वभाव। वह लकड़हारा था, लेकिन उसकी आत्मा सेवा की लकड़ियाँ नहीं, करुणा के फूल काटती थी। हर सुबह वह अपनी कुल्हाड़ी उठाकर जंगल की ओर निकल जाता, सूखी … Read more

बराक के लोगों के आंदोलन और बलिदान को छोटा करने की कोशिश?बराक के लोग इतिहास बनाना भूले नहीं हैं, इसलिए सावधान।

19 मई, भाषा शहीद दिवस पर शिलचर में आयोजित एक चर्चा सभा में एक विवादित टिप्पणी सामने आई, जिसने बराक घाटी के इतिहास और भावनाओं को झकझोर कर रख दिया है। इस कार्यक्रम में एक बंगाली संगठन के शीर्ष नेता और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को आमंत्रित किया गया था। भाषा शहीदों की स्मृति … Read more

तुर्की समर्थक कीड़े मौकोडे का संहार जरूरी        —  आचार्य श्रीहरि

तुर्की विरोध पर हमारी हैरानी और परेशानी का दूसरा पहलू है। हमारा पहलू यह है जो आपको भी हैरानी-परेशानी मे डाल देगा। मैं इस बात से प्रसन्न तो हूं कि तुर्की के खिलाफ स्पष्ट राष्ट्रवाद की ध्वनि सुनी जा सकती है। पर राष्ट्रवाद में विश्वास करने लोग, संस्थान, सरकार तुर्की से मित्रता और सहयोग की … Read more

‘मां’ मुझे चट्टान सा मजबूत करतीं है। –सुनील कुमार महला

11 मई 2025 को हम सभी अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस मनाने जा रहें है। सर्वप्रथम सभी माताओं को इस लेखक का कोटिशः नमन। ‘मां’ एक शब्द मात्र नहीं है, अपितु यह इससे भी कहीं अधिक बढ़कर है। ‘मां’ विधाता की इस धरती पर बहुत बड़ी देन है। ईश्वर के बाद यदि कोई सबसे बड़ी पालनहार है … Read more

सज्जनता का अनुशीलन हो, मानव को पथ का पता रहे !!’ — सुनील कुमार महला

भारतीय सेना ने भारत के 15 शहरों पर, पाकिस्तान के हमलों को नाकाम करते हुए, पाकिस्तान को करारा जबाब दे दिया है और पाकिस्तान ने भारतीय सेना के पहले ही प्रहार में भारत से मुंह की खाई है। भारतीय सेना ने जहां एक ओर पाक एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया, वहीं दूसरी ओर … Read more

कविगुरु रवीन्द्रनाथ: आत्मानुभूति से वैश्विक मानवता तक — डा. रणजीत कुमार तिवारी

भूमिका भारतीय संस्कृति और साहित्य की विराट परंपरा में कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर का स्थान सर्वोच्च है। वे केवल एक कवि या गीतकार नहीं, बल्कि एक ऐसे युगद्रष्टा, चिंतक और आध्यात्मिक सर्जक थे, जिन्होंने भारतीय चेतना को आत्मानुभूति की गहराइयों से उठाकर वैश्विक मानवता के शिखर तक पहुँचाया। उनका रचना-संसार केवल सौंदर्यबोध या काव्यकल्पना तक सीमित … Read more