“हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषयक अंतरराष्ट्रीय संवाद सफलतापूर्वक सम्पन्न

17 जून 2025 को भारत की ऐतिहासिक सांस्कृतिक चेतना की प्रेरणास्त्रोत, मराठा स्वराज्य की संस्थापिका और छत्रपति शिवाजी महाराज की मातृशक्ति राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर “हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता : विविध आयाम” विषय पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन’ एवं ‘अदम्य ग्लोबल फाउंडेशन’ … Read more

संस्कृति साधक विष्णु-ज्योति: आधुनिक असमिया संस्कृति

       20 जुन का दिन अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कारणों से महत्वपूर्ण होता है । हमारे लिए भी है। समस्त असम वासियों एवं 20 जुन में काफी नजदीकी रिश्ता है। यह दिन कला-गुरु विष्णु राभा का स्मृति दिवस है। समस्त असमवासी अपने-अपने स्तर से अपनी-अपनी तरह से इन्हें याद करते हैं। विप्लवी, … Read more

छत्रपति शिवाजी महाराज की माता राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि

“राजमाता जीजाबाई : मातृत्व, साहस और नेतृत्व की अद्वितीय गाथा” डॉ. शैलेश शुक्ला वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार एवं वैश्विक समूह संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह भारतीय इतिहास की महान विभूतियों में राजमाता जीजाबाई का नाम आदर और श्रद्धा से लिया जाता है। वे केवल छत्रपति शिवाजी महाराज की जननी ही नहीं थीं, अपितु वे एक विचार, एक दृष्टिकोण और एक प्रेरणा की मूर्तिमान अभिव्यक्ति थीं। उनका जीवन मातृत्व, नेतृत्व, राजनीतिक समझ, धार्मिकता और सामाजिक चेतना का संगम था। ‘शिवाजी अंधश्रद्धा से परे’ (लेखक : जेम्स डब्ल्यू लेन) में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिवाजी का व्यक्तित्व मुख्यतः जीजाबाई की शिक्षा, दृष्टिकोण और अनुशासन का ही प्रतिफल था। राजमाता जीजाबाई का जन्म 12 जनवरी 1598 को लखुजी जाधवराव और महालसा बाई के यहां देवगिरी (वर्तमान महाराष्ट्र) में हुआ था। लखुजी जाधव अहमदनगर के निज़ामशाही दरबार में एक उच्चस्तरीय मराठा सरदार थे। जाधव वंश की यह कन्या अपनी बाल्यावस्था से ही राजनीतिक घटनाओं, सैन्य चर्चा और धार्मिक वातावरण से घिरी हुई थी। डॉ. जयसिंह राव पवार अपनी पुस्तक ‘मराठों का इतिहास’ में उल्लेख करते हैं कि जीजाबाई की प्रारंभिक शिक्षा में शास्त्र, नीति, धर्म और प्रशासनिक मूल्यों का समावेश था। वे रामायण और महाभारत की गूढ़ शिक्षाओं में रुचि रखती थीं, जिससे उनके भीतर नीति और धर्म की समृद्ध समझ विकसित हुई। जीजाबाई का विवाह शाहजी भोंसले से हुआ, जो बीजापुर दरबार में एक शक्तिशाली सैन्य प्रमुख थे। विवाह के उपरांत जीजाबाई को राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, दमन और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ा। शाहजी के बीजापुर दरबार में रहते हुए वे प्रायः राज्य से दूर रहते थे। इस स्थिति में जीजाबाई ने पुणे में रहकर बालक शिवाजी का लालन-पालन किया। ‘शिवचरित्र’ (लेखक : बाबासाहेब पुरंदरे) के अनुसार पुणे की वीरान भूमि को उन्होंने न केवल बसाया, बल्कि उसे शिवाजी की कर्मभूमि भी बनाया। वे स्वयं प्रशासनिक कार्यों में भाग लेती थीं और बालक शिवाजी को शासन कौशल की शिक्षा देती थीं। राजमाता जीजाबाई ने मातृत्व को केवल संतान-पालन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने इसे राष्ट्र-निर्माण का माध्यम बनाया। ‘शिवभारत’ (कवि पंडित परमानंद द्वारा रचित) में वर्णन मिलता है कि जीजाबाई प्रतिदिन शिवाजी को रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाया करती थीं और उन्हें रघुकुल और पांडवों के आदर्शों से जोड़ती थीं। जीजाबाई ने बालक शिवाजी को यह सिखाया कि एक राजा का धर्म केवल शासन करना नहीं है, बल्कि प्रजा की सेवा और रक्षण करना भी है। उन्होंने बालक शिवाजी को महत्त्वपूर्ण सूत्र सिखाया : “राजा वह नहीं जो राजमहलों में रहे, बल्कि वह है जो रणभूमि में प्रजाजनों के लिए लड़े।” “सत्ता सेवा का माध्यम है, अधिकार का नहीं।” ‘भारतीय नारियां’ (लेखिका : रमा झा) के अनुसार, जीजाबाई का मातृत्व एक ऐसा स्तंभ था जिस पर सम्पूर्ण मराठा साम्राज्य का निर्माण खड़ा हुआ। जीजाबाई कट्टर धार्मिक थीं, परंतु वह कट्टरता अंधविश्वास नहीं, बल्कि समावेशी और सहिष्णु विचारधारा पर आधारित थी। उन्होंने शिवाजी को हिन्दू धर्म की गहराई, उसकी नैतिकता और सार्वभौमिक दृष्टिकोण से परिचित कराया। ‘शिवाजी अंधश्रद्धा से परे’ में यह भी वर्णित है कि जीजाबाई के धार्मिक दृष्टिकोण ने शिवाजी को अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से शिवाजी ने मंदिरों के संरक्षण के साथ-साथ मस्जिदों और सूफी दरगाहों का भी सम्मान किया, जैसा कि 1674 में उनके राज्याभिषेक के समय धर्मगुरुओं की बहुलता से सिद्ध होता है जीजाबाई ने शिवाजी को न केवल धार्मिक और नैतिक मूल्य सिखाए, बल्कि उन्होंने सैन्य कौशल और राजनीतिक चातुर्य भी सिखाया। बालक शिवाजी को उन्होंने यह सिखाया कि “दुश्मन को हराना तलवार से नहीं, पहले बुद्धि से करना चाहिए।” ‘राजमाता जीजाऊ’ (लेखक : दत्तोपंत आपटे) के अनुसार, वे शिवाजी के सभी रणनीतिक योजनाओं में मानसिक सहारा बनी रहीं। जब शिवाजी ने 1645 में बीजापुर के विरोध में स्वराज्य की घोषणा की, तो जीजाबाई ने न केवल आशीर्वाद दिया बल्कि उनकी योजना को विस्तार भी दिया। राजमाता जीजाबाई उस कालखंड की महिला थीं, जब समाज में महिलाओं की स्थिति अत्यंत सीमित थी, परंतु उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध किया कि महिलाएं केवल घर की शोभा नहीं, बल्कि समाज का नेतृत्व भी कर सकती हैं। ‘Women in Indian History’ (लेखिका : किरण पवार) में उल्लिखित है कि जीजाबाई ने पुणे में बालिकाओं की शिक्षा के लिए पाठशालाएं खुलवाईं और विधवाओं के लिए संरक्षण गृह की स्थापना करवाई। वे इस बात की पक्षधर थीं कि स्त्रियों को भी राष्ट्र के निर्माण में समान भागीदारी दी जानी चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण मराठा समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और जागरूकता लाने में क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। शाहजी की अनुपस्थिति, शिवाजी के संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता — इन सब के बीच जीजाबाई एक दृढ़ स्तंभ बनकर खड़ी रहीं। जब शिवाजी अग्निपरीक्षा से गुजर रहे थे, तब जीजाबाई ने उन्हें साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित किया। जब अफजल खान के साथ युद्ध की योजना बनी, तब जीजाबाई ने अपने पुत्र को सजीव उदाहरणों के माध्यम से बताया कि “धर्म और स्वराज्य की रक्षा के लिए छल का उपयोग यदि शत्रु कर रहा है, तो न्यायसंगत उत्तर देना आवश्यक है।” राजमाता जीजाबाई का जीवन केवल मराठा इतिहास तक सीमित नहीं है। वह भारतवर्ष की समूची मातृशक्ति की प्रतीक बन गईं। उनके विचार, शिक्षाएं और दृष्टिकोण आज भी प्रेरणास्रोत हैं। डॉ. सदाशिव कान्हेरे अपनी पुस्तक ‘भारतीय इतिहास की महामाताएं’ में लिखते हैं कि यदि जीजाबाई जैसी माताएं न होतीं, तो

सूचना का अधिकार: लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण उपकरण !

15 जून का दिन हमारे देश के लोकतंत्र के इतिहास में अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्यों कि 15 जून के दिन ही वर्ष 2005 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम(आरटीआई) को मंजूरी प्रदान की गई थी। वास्तव में इस अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण के कार्यकरण में पारदर्शिता और … Read more

पाकिस्तान : ‘टू नेशन थ्योरी’ का बिखरता सच

पाकिस्तान मोहम्मद अली जिन्ना की ‘टू नेशन थ्योरी’ के आधार पर बना। जिन्ना का यह मानना था कि हिंदू और मुस्लिम एक साथ नहीं रह सकते। दोनों आवश्यक रूप से दो अलग राष्ट्र हैं। इसलिए इन्हें दो देश के तौर पर अलग होना चाहिए, लेकिन उनकी यह मानवता विरोधी थ्योरी 1971 में ही खंड-खंड हो … Read more

आखिर क्यों हो रही हैं विवाहिताओं द्वारा युवकों की हत्याएं?

आजकल नवविवाहिताओं और विवाहिताओं द्वारा पति की हत्या करने/कराने के ट्रेंड चल पड़ा है।हिंदू परिवारों में सामान्यतया दो ही बच्चे हैं।एक बेटा और एक बेटी।अपवाद हैं,लेकिन अधिक नहीं हैं।सोचिए कि किसी का इकलौता बेटा किसी हत्यारी पत्नी के चंगुल में फंस जाए और उसकी हत्या हो जाए तो उस माता पिता की स्थिति क्या होगी,जिनका … Read more

हिंदी भाषा और मोबाइल तकनीक : गाँव से वैश्विक मंच तक — डॉ. शैलेश शुक्ला

भारत में मोबाइल तकनीक के विस्तार ने हिंदी भाषा को एक नया संचार माध्यम प्रदान किया है। वर्ष 2023 तक भारत में 114.4 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं, जिनमें से 83 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि मोबाइल फोन भारत के हर गाँव और कस्बे तक पहुँच चुका है। हिंदी, जो भारत की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है (Census 2011 के अनुसार लगभग 44% भारतीयों की मातृभाषा हिंदी है), मोबाइल तकनीक के माध्यम से अब केवल बोलचाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और व्यापार की भाषा भी बन गई है। गूगल और KPMG की 2017 की एक संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या हिंदी भाषियों में अंग्रेजी उपयोगकर्ताओं की तुलना में चार गुना तेजी से बढ़ रही है। यह तकनीकी पहुँच अब केवल उच्च शिक्षित या शहरी वर्ग तक सीमित नहीं रही। हिंदी में मोबाइल सामग्री की उपलब्धता ने डिजिटल भारत में ग्रामीण जनसंख्या को मुख्यधारा से जोड़ा है, जिससे वे सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, रोजगार, कृषि तकनीक और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी सीधे हिंदी में प्राप्त कर पा रहे हैं। मोबाइल ऐप्स की लोकप्रियता ने हिंदी भाषा को गाँवों में भी डिजिटल आत्मनिर्भरता का उपकरण बना दिया है। ShareChat, Josh, Moj, Dailyhunt जैसे ऐप्स विशेष रूप से हिंदी भाषी उपयोगकर्ताओं के लिए विकसित किए गए हैं। ShareChat की 2022 की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, इसके 180 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं में 70% से अधिक हिंदी भाषी हैं। इन ऐप्स के माध्यम से किसान, कारीगर, छोटे व्यापारी और ग्रामीण महिलाएं हिंदी में सूचनाएं साझा करते हैं, वीडियो बनाते हैं और स्थानीय उत्पादों का प्रचार भी करते हैं। उदाहरण के लिए, Josh ऐप पर उपलब्ध कुल वीडियो कंटेंट का 65% से अधिक भाग हिंदी में है। यह बदलाव न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाता है, बल्कि हिंदी को वैश्विक डिजिटल भाषाओं की कतार में भी खड़ा करता है। साथ ही YouTube जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म पर भी हिंदी कंटेंट की खपत अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। Statista की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 65% से अधिक उपयोगकर्ता YouTube पर हिंदी में वीडियो देखते हैं। मोबाइल तकनीक और हिंदी भाषा ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। DIKSHA, e-Pathshala, Byju’s और Vedantu जैसे ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स अब हिंदी में भी उच्च गुणवत्ता की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। भारत सरकार के DIKSHA प्लेटफॉर्म पर हिंदी माध्यम में 250,000 से अधिक ई-कंटेंट उपलब्ध हैं और अब तक इसे 3 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया गया है। इसका सबसे अधिक लाभ उन ग्रामीण विद्यार्थियों को मिल रहा है, जिनके लिए पारंपरिक शिक्षा साधनों तक पहुँच कठिन थी। मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन शिक्षण ने हिंदी को सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि सीखने का माध्यम बना दिया है। ‘Byju’s’ जैसे प्राइवेट ऐप्स ने भी अब ग्रामीण बच्चों के लिए हिंदी वीडियो कंटेंट, क्विज़ और मॉक टेस्ट उपलब्ध कराने शुरू किए हैं। वर्ष 2022 में Byju’s ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से 60% से अधिक उपयोगकर्ता हिंदी माध्यम का चयन कर रहे हैं। यह बदलती स्थिति हिंदी के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ वह केवल साहित्य की नहीं, तकनीकी और शैक्षणिक नवाचार की भी भाषा बन चुकी है। मोबाइल तकनीक और हिंदी भाषा का मेल विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी साधन बनकर उभरा है। 2024 में Times of India की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत की 80% महिला उद्यमियों ने डिजिटल साक्षरता की कमी के बावजूद सोशल कॉमर्स प्लेटफार्मों का सफलतापूर्वक उपयोग किया है और इसमें मुख्य भूमिका हिंदी भाषा ने निभाई है। उदाहरण के लिए, Rajasthan के बाड़मेर ज़िले की कमला देवी, जो केवल कक्षा 8 तक पढ़ी हैं, आज मोबाइल ऐप्स के माध्यम से अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को ShareChat और WhatsApp के माध्यम से हिंदी में प्रचारित कर रही हैं और हर महीने ₹10,000 से अधिक की आय कर रही हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि जब मोबाइल तकनीक स्थानीय भाषा में होती है, तो वह न केवल सुलभ होती है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का माध्यम भी बन जाती है। “मोबाइल पत्रकारिता” या “मोबाइल जर्नलिज़्म (MOJO)” ने हिंदी पत्रकारिता को नए आयाम दिए हैं। अब ग्रामीण क्षेत्र के आम लोग भी मोबाइल के माध्यम से वीडियो रिपोर्टिंग कर सकते हैं और स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना सकते हैं। ‘ख़बर लहरिया’ इसका जीवंत उदाहरण है। यह मीडिया संस्था उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित है और मोबाइल तकनीक के माध्यम से स्थानीय घटनाओं को हिंदी में प्रस्तुत करती है। इस संस्था के YouTube चैनल पर 25 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं और इसके वीडियो राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ‘गाँव कनेक्शन’ जैसे मीडिया प्लेटफार्म भी मोबाइल रिपोर्टिंग और हिंदी कंटेंट के माध्यम से गाँव की आवाज़ को शहर और संसद तक पहुँचा रहे हैं। यह पत्रकारिता का लोकतंत्रीकरण है, जिसमें मोबाइल तकनीक और हिंदी भाषा की संयुक्त शक्ति दिखाई देती है। आज हिंदी न केवल भारत की, बल्कि विश्व की एक प्रमुख डिजिटल भाषा बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूके, मॉरीशस, फिजी और खाड़ी देशों में बसे प्रवासी भारतीयों के कारण हिंदी का डिजिटल प्रसार तीव्र गति से हो रहा है। Duolingo ऐप की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, 6.5 मिलियन अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ता हिंदी सीख रहे हैं, जिनमें अमेरिका, रूस और ब्राज़ील प्रमुख हैं। ‘Hindi News Live’, ‘Hindi Shayari’, ‘Learn Hindi’, ‘Hindi Radio’ जैसे हजारों ऐप्स Google Play Store और Apple Store पर उपलब्ध

“रणनीतिक, तकनीकी, वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मिशन: एक्सियम-4 “

यह हमारे देश के लिए बहुत ही गौरव की बात है कि हमारा देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में विश्व में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और अब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सियम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी आईएसएस जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे 14 दिनों … Read more

कितना डरावना है मुस्लिम आबादी का विस्फोट ? — आचार्य श्रीहरि

दस सालों में मुस्लिम आबादी 34.7 करोड़ बढी/दो खरब मुस्लिम आबादी हुई/ यूरोप, अमेरिका, भारत आबादी जिहाद के आसान शिकार हैं।         आचार्य श्रीहरि मुस्लिम आबादी का जनसंख्या विस्फोट कितना डरावना है, कितना हिंेसक है, कितना आतंकी है, कितना घृणित है, कितना अभिशाप है, कितनी समस्या खडी करने वाला है? सभ्यताओं के संघर्ष … Read more

जीवन में संतुष्टि प्राप्त करने की तरीके

1. आत्म-मूल्यांकन और आत्म-निरीक्षणः अपने जीवन का गहरे से मूल्यांकन करें। अपने दृष्टिकोण, भावनाओं और व्यवहार को समझें। अपने उद्देश्य, प्राथमिकताओं और लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। यह जानने का प्रयास करें कि आप कहां हैं और कहां जाना चाहते हैं। अपने मजबूत पक्षों पर काम करें और अपनी कमजोरियों को सुधारने के … Read more