पाषाण युग की धमकी और आधुनिक दुनिया का डर: मध्य-पूर्व की जंग।

पाषाण युग की धमकी और आधुनिक दुनिया का डर: मध्य-पूर्व की जंग।   -सुनील कुमार महला   मध्य-पूर्व में जंग को चलते हुए एक महीने से भी ज्यादा का समय(34-35 दिन)हो गया है और इस युद्ध के और अधिक लंबा खिंचने से पूरी दुनिया सकते में है।इधर, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने … Read more

एनआईआईएमएच में सजी भारत की चिकित्सा सभ्यता की कहानी

एनआईआईएमएच में सजी भारत की चिकित्सा सभ्यता की कहानी दिल्ली ब्यूरो / विशेष संवाददाता   हैदराबाद : औपनिवेशिक भारत के अंतिम वर्षों में जन्मी एक दूरदर्शी सोच आज देश के सबसे विशिष्ट शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों में विकसित हो चुकी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज (NIIMH) आज भारत की समृद्ध चिकित्सा परंपरा का जीवंत दस्तावेज है—जो प्राचीन उपचार पद्धतियों को आधुनिक शोध से जोड़ता है। इस संस्थान की शुरुआत उस ऐतिहासिक भोर समिति (Bhore Committee) से जुड़ी है, जिसने स्वतंत्रता के बाद भारत की स्वास्थ्य योजना की नींव रखी। इस समिति में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में प्रसिद्ध चिकित्सा इतिहासकार हेनरी ई. सिगेरिस्ट भी शामिल थे, जिन्होंने भारत में चिकित्सा इतिहास के एक संस्थान की स्थापना का जोरदार समर्थन किया। उनकी सिफारिश को 1946 में सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने भी स्वीकार किया, जिससे इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह विचार 1956 में वास्तविक रूप ले सका, जब आंध्र मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा इतिहास विभाग की स्थापना की गई। उसी वर्ष इसे हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया गया। दूरदर्शी विद्वान डी. वी. सुब्बा रेड्डी के नेतृत्व में यह विभाग धीरे-धीरे एक राष्ट्रीय स्तर के शोध, दस्तावेज़ीकरण और शिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हुआ। समय के साथ यह संस्थान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और बाद में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संगठनों से जुड़ा, जिससे इसकी भूमिका और व्यापक होती गई। वर्ष 2009 में भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से वर्तमान स्वरूप में उन्नत किया। इस तरह के संस्थानों के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “भारत की चिकित्सा विरासत केवल गर्व का विषय नहीं है, बल्कि यह ज्ञान की एक जीवित परंपरा है जिसने सदियों से स्वास्थ्य सेवाओं को दिशा दी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज में 1,000 वर्षों से अधिक पुराने चिकित्सा इतिहास से जुड़े पांडुलिपियों का संरक्षण हमारी पारंपरिक प्रणालियों की गहराई और वैज्ञानिकता को दर्शाता है। SAHI 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से हम इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ इसे शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और वैश्विक समुदाय के लिए सुलभ भी बना रहे हैं। यह प्रयास पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़कर एक स्वस्थ भविष्य की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।” संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, इसकी यात्रा स्वयं भारत में चिकित्सा ज्ञान के विकास की कहानी को दर्शाती है—वैदिक उपचार पद्धतियों और शास्त्रीय आयुर्वेद से लेकर औपनिवेशिक काल की आधुनिक चिकित्सा और आज के समन्वित (इंटीग्रेटिव) दृष्टिकोण तक। आज NIIMH एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य कर रहा है, जहाँ विद्वान, इतिहासकार और चिकित्सा विशेषज्ञ मिलकर स्वास्थ्य प्रणालियों की उत्पत्ति और विकास पर बहुआयामी शोध कर रहे हैं। जब भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, तब NIIMH न केवल अतीत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि भविष्य के स्वास्थ्य शोध की दिशा भी तय कर रहा है।  

डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र ने किया ‘शब्दाक्षर पत्रिका’ का लोकार्पण

डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र ने किया ‘शब्दाक्षर पत्रिका’ का लोकार्पण कोलकाता:अंतराष्ट्रीय साहित्यकार गीतऋषि डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र ने विगत दिवस शब्दाक्षर संस्था मुख्यालय कोलकाता से प्रकाशित होने वाली ‘शब्दाक्षर पत्रिका’ के जनवरी-मार्च 2026 त्रैमासिक अंक का लोकार्पण किया। लोकार्पण वक्तव्य में डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि ‘शब्दाक्षर पत्रिका’ का यह लगातार 21वां अंक है,जो अपने … Read more

शब्दवीणा के तीसरे स्थापना दिवस पर हुआ “कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन।

शब्दवीणा के तीसरे स्थापना दिवस पर हुआ “कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन। शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता एवं समाज सेवा के क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाले विभूतियों को अंगवस्त्र एवं शब्दवीणा स्मृति चिह्न प्रदान करके किया गया सम्मानित। गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ के तीसरे स्थापना दिवस पर 30 मार्च … Read more

हैदराबाद में संरक्षित भारत की हजारों वर्षों पुरानी चिकित्सा धरोहर

हैदराबाद में संरक्षित भारत की हजारों वर्षों पुरानी चिकित्सा धरोहर – रत्नज्योति दत्ता –    नई दिल्ली, 30 मार्च: भारत की समृद्ध चिकित्सीय परंपरा की हजारों वर्षों पुरानी धरोहर—जो दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों और प्राचीन अवशेषों में सुरक्षित है—राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा संपदा संस्थान (National Institute of Indian Medical Heritage) में संरक्षित की जा रही है। यह संस्थान देश में स्वास्थ्य परंपराओं के विकास की एक अनूठी और व्यापक झलक प्रस्तुत करता है। हैदराबाद स्थित इस संस्थान में 900 से अधिक चिकित्सीय-ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित हैं, जिनमें से कई लगभग एक हजार वर्ष पुराने हैं। इनमें ताड़पत्र, कागज, वृक्ष की छाल, वस्त्र तथा धातु की पट्टिकाओं पर लिखे हस्तलिखित ग्रंथ शामिल हैं। ये विभिन्न कालखंडों में चिकित्सा ज्ञान के संकलन और प्रसार के विविध माध्यमों को दर्शाते हैं। आयुर्वेदिक ऐतिहासिक छापों का प्रदर्शन (SAHI) 2.0 पहल के अंतर्गत संस्थान अपने संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्य का विस्तार कर रहा है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित साही पोर्टल आयुर्वेद की प्राचीनतम अवस्था से लेकर वर्तमान तक की विस्तृत यात्रा को प्रस्तुत करता है। साथ ही, यह अन्य सभ्यताओं के साथ भारत के चिकित्सीय संपर्क और आदान-प्रदान को भी रेखांकित करता है। आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत की चिकित्सीय विरासत केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि ज्ञान की एक सतत प्रवाहमान धारा है।” साही परियोजना के सहायक निदेशक एवं प्रमुख अन्वेषक डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने बताया, “हस्तलिखित ग्रंथ वे रचनाएं हैं जो कागज, छाल, वस्त्र, धातु या ताड़पत्र जैसे माध्यमों पर लिखी जाती हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे ग्रंथ प्रायः मंदिरों, मठों तथा पारंपरिक वैद्यों के पारिवारिक संग्रहों में प्राप्त होते हैं। “इतिहास के दृष्टिकोण से साही का उद्देश्य भारत के चिकित्सीय अतीत का सम्यक् पुनर्निर्माण करना और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अभिलेखों में उल्लिखित शिलालेखों का पता लगाकर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है, ताकि उन्हें शोधार्थियों और आम जन के लिए सुलभ बनाया जा सके,” उन्होंने कहा। डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने 23 मार्च को संस्थान के दौरे पर आए दिल्ली के मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत की। उल्लेखनीय खोजों में चालुक्य वंश के राजा विक्रमादित्य प्रथम के काल का 1,660 वर्ष पुराना ताम्रपत्र अभिलेख शामिल है, जो वर्तमान आंध्र प्रदेश में प्राप्त हुआ था। यह दर्शाता है कि उस समय वैद्यों को विशेष प्रशासनिक अधिकार प्राप्त थे। ऐतिहासिक स्रोत प्रसिद्ध वैद्य जीवक का भी उल्लेख करते हैं, जो भगवान बुद्ध और राजा बिंबिसार के चिकित्सक थे, जिससे भारत में संगठित चिकित्सा परंपरा की प्राचीनता स्पष्ट होती है। “साही 2.0 जैसी पहलें इस धरोहर को वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाएंगी और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने में सहायक होंगी,” मंत्री ने कहा। पृष्ठभूमि: इस संस्थान की स्थापना की परिकल्पना वर्ष 1944 की भोर समिति की सिफारिशों से हुई थी, जिसने चिकित्सा इतिहास के लिए एक समर्पित संस्थान की आवश्यकता बताई थी। वर्ष 1956 में इसे आंध्र मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम में स्थापित किया गया और बाद में हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया गया। समय के साथ यह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद सहित विभिन्न संस्थाओं के अधीन रहा और वर्ष 2009 में इसे वर्तमान स्वरूप प्रदान किया गया। आज एनआईआईएमएच में 10,000 से अधिक पुस्तकें, 285 हस्तलिखित ग्रंथ तथा एक विशेष चिकित्सीय-ऐतिहासिक संग्रहालय उपलब्ध है, जो इसे भारत की चिकित्सा धरोहर के प्रमुख केंद्रों में स्थान दिलाता है।

*शब्दवीणा के तृतीय स्थापना दिवस पर ‘राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं पुस्तक लोकार्पण’ समारोह का हुआ आयोजन*

*शब्दवीणा के तृतीय स्थापना दिवस पर ‘राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं पुस्तक लोकार्पण’ समारोह का हुआ आयोजन* *- कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित की गीत नाटिका ‘बुंदेला हरदौल’ का हुआ अविस्मरणीय लोकार्पण* गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा 30 मार्च को मनाए जा रहे तृतीय स्थापना दिवस समारोह के तहत शब्दवीणा … Read more

जनसम्मान यात्रा की हुई शुरुआत, एकत्रित हुई भारी जनसमूह

जनसम्मान यात्रा की हुई शुरुआत, एकत्रित हुई भारी जनसमूह गड़वार(बलिया): फेफना विधानसभा क्षेत्र के गड़वार ब्लॉक परिसर से रविवार को ‘जन सम्मान यात्रा’ की शुरुआत हुई। इस यात्रा का नेतृत्व राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर ने किया। यात्रा सुबह करीब 11 बजे प्रारंभ हुई।यह … Read more

डॉ.बिनोद शर्मा पुनः ईआरएमसी के अध्यक्ष निर्वाचित

*डॉ.बिनोद शर्मा पुनः ईआरएमसी के अध्यक्ष निर्वाचित* कोलकाता: ई.आर.एम.सी. की 29वीं चतुर्थवर्षीय कार्यकारिणी साधारण सभा 27 से 29 मार्च-2026 तक आचार्य नरेन्द्र देव भवन, जसीडीह, देवघर, झारखंड मे आयोजित हुई। तीसरे दिन 29 मार्च को अंतिम सत्र में पूर्व रेलवे स्तरीय केन्द्रीय संगठन पदाधिकारियों का चुनाव, एन.एफ.आई.आर. के कार्यकारी अध्यक्ष व मनोनीत चुनाव पर्यवेक्षक बी.सी. … Read more

दुमदुमा में श्री श्री हनुमान जन्मोत्सव का पालन आगामी 2 अप्रैल को । समिति व्यापक तैयारियों में जुटी।

दुमदुमा में श्री श्री हनुमान जन्मोत्सव का पालन आगामी 2 अप्रैल को । समिति व्यापक तैयारियों में जुटी। दुमदुमा प्रेरणा भारती 29 मार्च :– विगत 25 वर्षों की तरह इस वर्ष भी श्री श्री हनुमान जन्मोत्सव दुमदुमा में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ आगामी 2 अप्रैल को नगर के कोलियापानी हनुमान मंदिर प्रांगण … Read more

शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने सुरेश विद्यार्थी

*शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने सुरेश विद्यार्थी* *-30 मार्च को शब्दवीणा के तीसरे स्थापना दिवस पर कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का होगा आयोजन* गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा की औरंगाबाद जिला इकाई के अध्यक्ष, पत्रकार एवं साहित्यसेवी सुरेश विद्यार्थी को शब्दवीणा का राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोनीत किया गया है। शब्दवीणा की संस्थापिका … Read more