तुम देखोगे, हम देख चुके हैं।
हम देख चुके हैं बर्बादी, हम देख चुके हैं बगदादी। हम देख चुके शाहीन बाग़, और टुकड़े वाली आज़ादी।। हम देख चुके हैं बामियान, हम देख चुके मज़हब गंदा। देखा है जौहर पद्मा का, देखा है जलता नालंदा।। हम देख चुके हैं खिलजी को, हम देख चुके हैं अब्दाली। हम देख चुके तैमूर लंग, हम … Read more