भारत बनने वाला है “बुजुर्गो का देश ” नई समस्या -विशाल झा 

हिंदी मे एक भजन है ‘चली जा रही है उम्र धीरे- धीरे ‘. जिसका मतलब है की जीवन के विभिन्न पड़ाव है बाल अवस्था, किशोर अवस्था, जवानी और बुजुर्ग अवस्था. लेकिन भारत के लिए जीवन की अंतिम अवस्था यानि बुजुर्ग अवस्था एक नई समस्या बनने वाली है. क्योंकि वर्ष 2050 तक देश मे बुजुर्गो की … Read more

हाइलाकांदी में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: गौ तस्करी में इस्तेमाल ट्रक और इलेक्ट्रिक कार जब्त, चार बर्मी गाय बरामद

प्रीतम दास, हाइलाकांदी | 17 जून: हाइलाकांदी जिले में एक बार फिर गौ तस्करी गिरोह के सक्रिय होने की सूचना के बाद सोमवार रात पुलिस ने बड़ा अभियान चलाकर तस्करी की कोशिश नाकाम कर दी। कालाछोरा पुलिस चौकी क्षेत्र के गगालाछोरा तिनाली इलाके में नाका चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ट्रक (नंबर: AS 11 … Read more

अंबुबासी महायोग 22 जून से कामाख्या धाम में होगा आरंभ, प्रशासन ने की विशेष तैयारियां

गुवाहाटी, 16 जून (हि.स.)। नीलाचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या धाम में आगामी 22 जून से अंबुबासी महायोग का शुभारंभ होने जा रहा है। 22 जून की दोपहर 2.56 बजे से प्रवृत्ति आरंभ होते ही मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मंदिर के द्वार 23, 24 और 25 जून को पूरी … Read more

असम: आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में चार मैचों की मेजबानी करेगा गुवाहाटी

गुवाहाटी, 16 जून (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप-2025 के लिए ड्राफ्ट शेड्यूल का अनावरण किया, जिसमें गुवाहाटी की एक प्रमुख मेजबान शहर के रूप में भूमिका की पुष्टि की गई। गुवाहाटी के बरसापारा के असम क्रिकेट एसोसिशन (एसीए) स्टेडियम में चार लीग मैच आयोजित किए जाएंगे, जिसकी … Read more

संस्कृति साधक विष्णु-ज्योति: आधुनिक असमिया संस्कृति

       20 जुन का दिन अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कारणों से महत्वपूर्ण होता है । हमारे लिए भी है। समस्त असम वासियों एवं 20 जुन में काफी नजदीकी रिश्ता है। यह दिन कला-गुरु विष्णु राभा का स्मृति दिवस है। समस्त असमवासी अपने-अपने स्तर से अपनी-अपनी तरह से इन्हें याद करते हैं। विप्लवी, … Read more

छत्रपति शिवाजी महाराज की माता राजमाता जीजाबाई की 352वीं पुण्यतिथि

“राजमाता जीजाबाई : मातृत्व, साहस और नेतृत्व की अद्वितीय गाथा” डॉ. शैलेश शुक्ला वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार एवं वैश्विक समूह संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह भारतीय इतिहास की महान विभूतियों में राजमाता जीजाबाई का नाम आदर और श्रद्धा से लिया जाता है। वे केवल छत्रपति शिवाजी महाराज की जननी ही नहीं थीं, अपितु वे एक विचार, एक दृष्टिकोण और एक प्रेरणा की मूर्तिमान अभिव्यक्ति थीं। उनका जीवन मातृत्व, नेतृत्व, राजनीतिक समझ, धार्मिकता और सामाजिक चेतना का संगम था। ‘शिवाजी अंधश्रद्धा से परे’ (लेखक : जेम्स डब्ल्यू लेन) में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिवाजी का व्यक्तित्व मुख्यतः जीजाबाई की शिक्षा, दृष्टिकोण और अनुशासन का ही प्रतिफल था। राजमाता जीजाबाई का जन्म 12 जनवरी 1598 को लखुजी जाधवराव और महालसा बाई के यहां देवगिरी (वर्तमान महाराष्ट्र) में हुआ था। लखुजी जाधव अहमदनगर के निज़ामशाही दरबार में एक उच्चस्तरीय मराठा सरदार थे। जाधव वंश की यह कन्या अपनी बाल्यावस्था से ही राजनीतिक घटनाओं, सैन्य चर्चा और धार्मिक वातावरण से घिरी हुई थी। डॉ. जयसिंह राव पवार अपनी पुस्तक ‘मराठों का इतिहास’ में उल्लेख करते हैं कि जीजाबाई की प्रारंभिक शिक्षा में शास्त्र, नीति, धर्म और प्रशासनिक मूल्यों का समावेश था। वे रामायण और महाभारत की गूढ़ शिक्षाओं में रुचि रखती थीं, जिससे उनके भीतर नीति और धर्म की समृद्ध समझ विकसित हुई। जीजाबाई का विवाह शाहजी भोंसले से हुआ, जो बीजापुर दरबार में एक शक्तिशाली सैन्य प्रमुख थे। विवाह के उपरांत जीजाबाई को राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, दमन और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ा। शाहजी के बीजापुर दरबार में रहते हुए वे प्रायः राज्य से दूर रहते थे। इस स्थिति में जीजाबाई ने पुणे में रहकर बालक शिवाजी का लालन-पालन किया। ‘शिवचरित्र’ (लेखक : बाबासाहेब पुरंदरे) के अनुसार पुणे की वीरान भूमि को उन्होंने न केवल बसाया, बल्कि उसे शिवाजी की कर्मभूमि भी बनाया। वे स्वयं प्रशासनिक कार्यों में भाग लेती थीं और बालक शिवाजी को शासन कौशल की शिक्षा देती थीं। राजमाता जीजाबाई ने मातृत्व को केवल संतान-पालन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने इसे राष्ट्र-निर्माण का माध्यम बनाया। ‘शिवभारत’ (कवि पंडित परमानंद द्वारा रचित) में वर्णन मिलता है कि जीजाबाई प्रतिदिन शिवाजी को रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाया करती थीं और उन्हें रघुकुल और पांडवों के आदर्शों से जोड़ती थीं। जीजाबाई ने बालक शिवाजी को यह सिखाया कि एक राजा का धर्म केवल शासन करना नहीं है, बल्कि प्रजा की सेवा और रक्षण करना भी है। उन्होंने बालक शिवाजी को महत्त्वपूर्ण सूत्र सिखाया : “राजा वह नहीं जो राजमहलों में रहे, बल्कि वह है जो रणभूमि में प्रजाजनों के लिए लड़े।” “सत्ता सेवा का माध्यम है, अधिकार का नहीं।” ‘भारतीय नारियां’ (लेखिका : रमा झा) के अनुसार, जीजाबाई का मातृत्व एक ऐसा स्तंभ था जिस पर सम्पूर्ण मराठा साम्राज्य का निर्माण खड़ा हुआ। जीजाबाई कट्टर धार्मिक थीं, परंतु वह कट्टरता अंधविश्वास नहीं, बल्कि समावेशी और सहिष्णु विचारधारा पर आधारित थी। उन्होंने शिवाजी को हिन्दू धर्म की गहराई, उसकी नैतिकता और सार्वभौमिक दृष्टिकोण से परिचित कराया। ‘शिवाजी अंधश्रद्धा से परे’ में यह भी वर्णित है कि जीजाबाई के धार्मिक दृष्टिकोण ने शिवाजी को अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से शिवाजी ने मंदिरों के संरक्षण के साथ-साथ मस्जिदों और सूफी दरगाहों का भी सम्मान किया, जैसा कि 1674 में उनके राज्याभिषेक के समय धर्मगुरुओं की बहुलता से सिद्ध होता है जीजाबाई ने शिवाजी को न केवल धार्मिक और नैतिक मूल्य सिखाए, बल्कि उन्होंने सैन्य कौशल और राजनीतिक चातुर्य भी सिखाया। बालक शिवाजी को उन्होंने यह सिखाया कि “दुश्मन को हराना तलवार से नहीं, पहले बुद्धि से करना चाहिए।” ‘राजमाता जीजाऊ’ (लेखक : दत्तोपंत आपटे) के अनुसार, वे शिवाजी के सभी रणनीतिक योजनाओं में मानसिक सहारा बनी रहीं। जब शिवाजी ने 1645 में बीजापुर के विरोध में स्वराज्य की घोषणा की, तो जीजाबाई ने न केवल आशीर्वाद दिया बल्कि उनकी योजना को विस्तार भी दिया। राजमाता जीजाबाई उस कालखंड की महिला थीं, जब समाज में महिलाओं की स्थिति अत्यंत सीमित थी, परंतु उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध किया कि महिलाएं केवल घर की शोभा नहीं, बल्कि समाज का नेतृत्व भी कर सकती हैं। ‘Women in Indian History’ (लेखिका : किरण पवार) में उल्लिखित है कि जीजाबाई ने पुणे में बालिकाओं की शिक्षा के लिए पाठशालाएं खुलवाईं और विधवाओं के लिए संरक्षण गृह की स्थापना करवाई। वे इस बात की पक्षधर थीं कि स्त्रियों को भी राष्ट्र के निर्माण में समान भागीदारी दी जानी चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण मराठा समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और जागरूकता लाने में क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। शाहजी की अनुपस्थिति, शिवाजी के संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता — इन सब के बीच जीजाबाई एक दृढ़ स्तंभ बनकर खड़ी रहीं। जब शिवाजी अग्निपरीक्षा से गुजर रहे थे, तब जीजाबाई ने उन्हें साहस, धैर्य और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित किया। जब अफजल खान के साथ युद्ध की योजना बनी, तब जीजाबाई ने अपने पुत्र को सजीव उदाहरणों के माध्यम से बताया कि “धर्म और स्वराज्य की रक्षा के लिए छल का उपयोग यदि शत्रु कर रहा है, तो न्यायसंगत उत्तर देना आवश्यक है।” राजमाता जीजाबाई का जीवन केवल मराठा इतिहास तक सीमित नहीं है। वह भारतवर्ष की समूची मातृशक्ति की प्रतीक बन गईं। उनके विचार, शिक्षाएं और दृष्टिकोण आज भी प्रेरणास्रोत हैं। डॉ. सदाशिव कान्हेरे अपनी पुस्तक ‘भारतीय इतिहास की महामाताएं’ में लिखते हैं कि यदि जीजाबाई जैसी माताएं न होतीं, तो

कछार पुलिस की चौंकाने वाली कार्रवाई: बाउरिकांदी-2 से हेरोइन और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद, महिला के घर छापा

शिलचर, 16 जून 2025 — गुप्त और विश्वसनीय सूचना के आधार पर कछार जिला पुलिस की एक विशेष टीम ने आज बाउरिकांदी-2 क्षेत्र में एक चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया। यह अभियान कछार जिले के कचुदाराम थाना पुलिस की अगुवाई में किया गया, जिसमें नाजमा बेगम लस्कर (आयु 50 वर्ष), जो कि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट अब्दुल … Read more

शिलचर-हाफलांग सौराष्ट्र सड़क पर फिर भूस्खलन, यातायात बाधित; NHAI ने तत्परता से बहाल किया आवागमन

शिलचर, 16 जून: शिलचर-हाफलांग सौराष्ट्र सड़क (NH-6) पर एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई है, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात ठप रहा। यह हादसा रविवार को माड़ूआछड़ा और टिबोंग के बीच तीन अलग-अलग स्थानों पर हुआ, जहां भारी बारिश के चलते पहाड़ियों से माटी और पत्थर खिसककर सड़क पर आ गिरे। इस दौरान … Read more

काटलीछोड़ा में चार बकरी चोर रंगेहाथ पकड़े गए, भीड़ ने की जमकर पिटाई, फिर सौंपा पुलिस को!

काटलीछोड़ा, 16 जून — असम के काटलीछोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत आमतल्ला इलाके में रविवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया जब चार युवकों को एक पेट्रोल ऑटो (नंबर AS24A C5273) में बकरी चुराते हुए स्थानीय युवकों ने रंगेहाथ पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजे कुछ स्थानीय युवक देखे कि चार युवक एक ऑटो … Read more

देशबंधु चित्तरंजन दास की 100वीं पुण्यतिथि पर शिलचर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

शिलचर, 16 जून — स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, क्रांतिकारी, कवि, अधिवक्ता और जननेता देशबंधु चित्तरंजन दास की 100वीं पुण्यतिथि के अवसर पर देशबंधु चित्तरंजन दास स्मृति रক্ষা समिति, शिलचर द्वारा एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार सुबह 9 बजे न्यू शिलचर क्षेत्र के नेशनल हाईवे पॉइंट पर स्थित देशबंधु की प्रतिमा पर माल्यार्पण और … Read more