त्रिपुरा में BSF जवानों पर जानलेवा हमला, हथियार छीनने की कोशिश; आठ गिरफ्तार

अगरतला, 3 नवंबर। त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के बॉक्सानगर क्षेत्र के आशाबाड़ी में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट तस्करी रोकने पहुंचे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर स्थानीय लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। सोमवार, 2 नवंबर को हुई इस हिंसक घटना में तीन BSF जवान घायल हुए। हमलावरों ने जवानों पर लाठी, बांस और लोहे की छड़ों से हमला किया तथा उनके हथियार छीनने का प्रयास किया। BSF के वाहन में भी तोड़फोड़ की गई।

### तस्करी रोकने पर भड़की हिंसा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, BSF की 49वीं बटालियन के जवानों को आशाबाड़ी बॉर्डर आउटपोस्ट के निकट संदिग्ध तस्करी गतिविधियों की सूचना मिली थी। जवानों ने कार्रवाई करते हुए कुछ संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान विवाद शुरू हुआ और बाद में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए।

BSF की शिकायत के अनुसार, बाद में कंपनी कमांडर और उनके साथ पहुंचे जवानों पर भीड़ ने अचानक हमला कर दिया। एक जवान की सर्विस राइफल छीनने का भी आरोप है। हालांकि, हथियार बाद में बरामद कर लिया गया। 

### आठ आरोपी गिरफ्तार, 18-19 लोगों के खिलाफ मामला

त्रिपुरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कलामचौड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में FIR में नामजद आरोपियों की संख्या 18 और 19 बताई गई है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी है। 

### मुख्यमंत्री माणिक साहा ने जताई कड़ी नाराजगी

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने BSF जवानों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के खिलाफ हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 

### घटना को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल

इस घटना ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी नेटवर्क और सीमा सुरक्षा बल के जवानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर दोषियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई और मुठभेड़ जैसी कठोर कार्रवाई की मांग उठने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऐसी किसी कार्रवाई का कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।

महत्वपूर्ण तथ्य: कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि विवाद की शुरुआत एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने और उसके साथ कथित मारपीट के आरोप से हुई थी। इस पहलू की भी जांच जारी है। 

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