रवींद्र-नजरुल संगीत एवं नृत्य के साथ लोकनृत्य में करीब 70 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, अपसंस्कृति के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए स्वस्थ सांस्कृतिक गतिविधियों पर दिया गया जोर
प्रेरणा भारती, निहार कांति राय, उधारबंद : बराक घाटी की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने तथा नई पीढ़ी में साहित्य एवं संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से बराक घाटी बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की उधारबंद आंचलिक समिति की ओर से भव्य सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सम्मेलन के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को उधारबंद ब्लॉक ऑडिटोरियम में रवींद्र संगीत, नजरुल संगीत, रवींद्र नृत्य, नजरुल नृत्य एवं लोकनृत्य की आंचलिक स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
सुबह 10 बजे उधारबंद के विधायक राजदीप गोवाला के प्रतिनिधि असीम देव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष भास्कर दास, डाइट के प्राचार्य जीवेंदु दत्त, जिला समिति के उपाध्यक्ष ब्रजेश्वर सिंह, जिला सांस्कृतिक सचिव अभिजीत धर, केंद्रीय समिति के पूर्व सदस्य अकमल अली बरभुइयां तथा निक्कन सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के प्राचार्य शुभ्रांशु नाथ जुमदार सहित सम्मेलन के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
प्रारंभ में अध्यक्ष भास्कर दास ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद जीवेंदु दत्त, शुभ्रांशु नाथ जुमदार एवं अभिजीत धर ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने उधारबंद आंचलिक समिति की सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि समिति केवल बंगाली भाषा एवं संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि बराक घाटी के विभिन्न भाषाई समुदायों की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। बहुभाषी एवं बहुसांस्कृतिक समाज में आपसी सम्मान और सद्भाव का यह प्रयास सराहनीय है।
उद्घाटनकर्ता असीम देव ने उधारबंद के साथ अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी शिक्षा की शुरुआत यहीं के डीएनएचएस स्कूल से हुई थी। उन्होंने कहा कि बराक घाटी विभिन्न भाषाओं, जातीय समुदायों और संस्कृतियों का संगम स्थल है। यहां की सभी भाषाओं एवं संस्कृतियों का सम्मान करते हुए बराक बंग पिछले पांच दशकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने उधारबंद में एक पूर्ण विकसित ऑडिटोरियम के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया और इस दिशा में समिति के पदाधिकारियों से पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि विधायक राजदीप गोवाला के प्रयासों से इष्टमपुर में गुरुचरण विश्वविद्यालय के परिसर निर्माण के लिए कुल 210 बीघा जमीन आवंटित की गई है।
उद्घाटन समारोह के बाद सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। रवींद्र एवं नजरुल संगीत तथा नृत्य के साथ विभिन्न श्रेणियों के लोकनृत्य में करीब 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रख्यात कलाकार शर्मिष्ठा दास चाकी और सीमा पुरकायस्थ ने निर्णायक की भूमिका निभाई। संगीत में हारमोनियम पर अर्पिता राय तथा तबले पर विश्वजीत पाल ने संगत की।
प्रतियोगिताओं के समापन के बाद पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित हुआ। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल के दयापुर ग्रुप सेंटर के डीआईजी उदय प्रताप सिंह उपस्थित थे। सम्मानित अतिथि के रूप में डोलू चाय बागान के प्रबंधक बिप्लब चक्रवर्ती शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों में समाजसेवी नबारुण चक्रवर्ती, बराक घाटी के साहित्यकार काजल देमता, जीपी सभानेत्री काकली कर, गुरुकुल इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्राचार्य गोलक गोवाला तथा नजरुल संगीत अकादमी के प्राचार्य पंकज चक्रवर्ती शामिल थे। पंकज चक्रवर्ती ने उद्घाटन संगीत प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि डीआईजी उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में वर्तमान समाज में अपसंस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब अपसंस्कृति हमारी पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है, ऐसे समय में बराक बंग द्वारा विभिन्न भाषाई समुदायों की संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय हैं। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ समाज में स्वस्थ सांस्कृतिक चेतना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अन्य वक्ताओं बिप्लब चक्रवर्ती, नबारुण चक्रवर्ती, गोलक गोवाला, साहित्यकार काजल देमता तथा पंकज चक्रवर्ती ने भी सांस्कृतिक अवक्षय को रोकने के लिए स्वस्थ सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने बराक बंग के 50 वर्षों के साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को निखारने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।
अंत में विभिन्न प्रतियोगिता श्रेणियों के विजेताओं को अतिथियों ने प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न एवं पदक प्रदान किए। कार्यक्रम में बराक बंग की उधारबंद आंचलिक समिति के पदाधिकारियों के अलावा प्रतिभागी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में दर्शक-श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन निहार कांति राय एवं मृण्मयी पुरकायस्थ ने किया।
संगीत, नृत्य और लोकसंस्कृति के सुंदर संगम के रूप में आयोजित यह कार्यक्रम केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बराक घाटी की बहुभाषी सांस्कृतिक एकता, आपसी सद्भाव और समृद्ध परंपरा का भी सशक्त संदेश दिया।