रास पूर्णिमा पर चौकीडिंगी खेल मैदान बनेगा ‘दूसरा वृंदावन’: एटीडीसी अध्यक्ष ऋतुपर्ण बरुआ

[डिब्रूगढ़ में २३ और २४ नवंबर को दो दिवसीय रासलीला महोत्सव का आयोजन; तैयारियां जोरों पर]

डिब्रूगढ़: आगामी रास पूर्णिमा के अवसर पर डिब्रूगढ़ का ऐतिहासिक चौकीडिंगी खेल मैदान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के केंद्र में तब्दील होने जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य रासलीला के आयोजन के माध्यम से यहां वृंदावन जैसा आध्यात्मिक वातावरण सृजित करने की तैयारी की जा रही है।

डिब्रूगढ़ सत्रीय कलाकृष्टि केंद्र के तत्वावधान में आगामी २३ और २४ नवंबर को श्रीश्रीकृष्ण की चौथी वार्षिक संपूर्ण रासलीला महोत्सव का आयोजन दो दिवसीय रंगारंग कार्यक्रम के साथ किया जाएगा। इस भव्य आयोजन को आध्यात्मिक भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रमुख मंच बनाने के उद्देश्य से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

इस सिलसिले में डीएचएसके कॉलेज के शंकरदेव प्रेक्षागृह में आयोजन समिति के अध्यक्ष निर्मल कांति शील की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक के उद्देश्य की व्याख्या करते हुए समिति के सचिव नीलोत्पल कोंवर ने महोत्सव को सफल बनाने के लिए आर्थिक सहयोग, स्मारिका के प्रकाशन तथा समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित असम पर्यटन विकास निगम (एटीडीसी) के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ऋतुपर्ण बरुआ ने कहा कि शरद ऋतु के आगमन के साथ ही पूरे असम में रास महोत्सव का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के मन और हृदय को आनंद एवं भक्ति से सराबोर कर देता है।

भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला को केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन की एक गहन आध्यात्मिक अभिव्यक्ति बताते हुए बरुआ ने आशा व्यक्त की कि आगामी महोत्सव ऐतिहासिक चौकीडिंगी खेल मैदान को ‘दूसरे वृंदावन’ के रूप में परिवर्तित कर देगा। उन्होंने इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की सफलता के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

समाजसेवी ज्योतिप्रसाद कनै ने रास को गहरी श्रद्धा और भक्ति का उत्सव बताते हुए कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा और भक्ति के महान आदर्श समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचते हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को असम की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने तथा महोत्सव में सभी की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

डीएचएसके कॉलेज के प्राचार्य एवं प्रख्यात लेखक डॉ. शशिकांत सैकिया ने कहा कि रास लोगों के बीच मौजूद भेदभाव को मिटाकर सभी को भक्ति, प्रेम और सद्भाव के सूत्र में बांधता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की रासलीला में निहित आध्यात्मिक दर्शन मानवता और एकता का संदेश देता है तथा समाज की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रख्यात चिकित्सक डॉ. जयंतमाधव चलिहा ने पिछले रास महोत्सवों के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पूर्व के अनुभव इस वर्ष के आयोजन को अधिक सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने में सहायक होंगे। आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से महोत्सव को सफल बनाने का आह्वान किया।

डिब्रूगढ़ कॉलेज के प्राध्यापक एवं लेखक प्रशांत बोरा ने जानकारी दी कि इस अवसर पर ‘रसामृत’ नामक एक विशेष स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के भक्तिमय एवं आध्यात्मिक पक्षों के साथ असम की सत्रीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा। उन्होंने लेखकों एवं साहित्यकारों से अपने लेख आगामी ७ नवंबर तक जमा करने का आग्रह किया।

आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं लेखक-निबंधकार चंदन फुकन ने रास को जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का पवित्र आध्यात्मिक उत्सव बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की रासलीला भक्ति, प्रेम, त्याग और आत्मसमर्पण के शाश्वत दर्शन की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि असम की सत्रीय संस्कृति को समृद्ध करने वाला रास महोत्सव जाति, धर्म और वर्ण से ऊपर उठकर सभी लोगों को एकता के सूत्र में बांधने में सक्षम है।

फुकन ने आगे बताया कि इस वर्ष के रासलीला महोत्सव का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालु और रासप्रेमी अपने घरों में बैठकर इस आयोजन का आनंद ले सकेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पहल से डिब्रूगढ़ के रास महोत्सव की आध्यात्मिक महिमा विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार समय, श्रम और आर्थिक सहयोग प्रदान करने की अपील की।

बैठक में सीए एवं समाजसेवी महावीर बगरिया, प्राध्यापक सोहनलाल यादव, सांस्कृतिक सहायक सचिव दीपक बरुआ, रंजीत हजारिका, शिक्षाविद् रीता चुटिया नाजिर, ममी गोगोई तथा व्यवसायी एवं समाजसेवी जगदीश और भास्कर गोगोई सहित कई विशिष्ट व्यक्तियों ने हिस्सा लिया और महोत्सव की सफलता के लिए विभिन्न सुझाव दिए।

आयोजन समिति तथा विभिन्न उपसमितियों के सदस्य भी बैठक में उपस्थित थे। संयुक्त सचिव मोहन तमुली ने आगामी रास महोत्सव को सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की। उन्होंने विशिष्ट व्यक्तियों एवं रासप्रेमियों से आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान करने का आग्रह करते हुए बताया कि आगामी ११ नवंबर को चौकीडिंगी खेल मैदान में रास के लिए लाई गोता (पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान) संपन्न किया जाएगा। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक के बाद आगामी महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित होने वाली स्मारिका ‘रसामृत’ के लिए उपस्थित विशिष्ट व्यक्तियों की तस्वीरें एकत्र की गईं। अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष निर्मल कांति शील ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक के समापन की घोषणा की।

आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिवसीय यह महोत्सव डिब्रूगढ़ में भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक सद्भाव का वातावरण निर्मित करेगा। प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक एकता के दिव्य संदेश को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाला यह महोत्सव क्षेत्र के लोगों को एकजुट करेगा। रास पूर्णिमा के पावन अवसर पर चौकीडिंगी खेल मैदान भक्ति रस से सराबोर होकर एक नए वृंदावन का रूप धारण करे, यही डिब्रूगढ़वासियों की हार्दिक कामना है।

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