भारत-दक्षिण कोरिया समुद्री साझेदारी के विस्तार पर जोर, जहाज निर्माण और हरित नौवहन में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशेंगे सर्बानंद सोनोवाल

बुसान (दक्षिण कोरिया): केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों का उद्देश्य जहाज निर्माण, समुद्री प्रौद्योगिकी, हरित नौवहन, बंदरगाह विकास और जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग को मजबूत करना था।

दक्षिण कोरिया की जहाज निर्माण कंपनियों, समुद्री संस्थानों और शिपिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ साइप्रस की जहाजरानी उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ हुई चर्चाओं में निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी, समुद्री वित्तपोषण, बंदरगाह विकास और टिकाऊ समुद्री परिवहन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इससे भारत और दक्षिण कोरिया के बीच निवेश, नवाचार तथा दीर्घकालिक साझेदारी के लिए व्यापक अवसर पैदा हो रहे हैं।

साइप्रस की उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ बैठक के दौरान साइप्रस ने यूरोपीय संघ (ईयू) की स्वीकृत सूची में भारत के पात्र जहाज पुनर्चक्रण केंद्रों को शामिल कराने के प्रयासों में समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस मान्यता से भारतीय जहाज पुनर्चक्रण कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में नए व्यावसायिक अवसर खुल सकते हैं। भारत ने ईयू की स्वीकृत सूची में अपने ३५ जहाज पुनर्चक्रण केंद्रों को शामिल करने के लिए आवेदन किया है।

सोनोवाल ने वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण उद्योग में भारत की अग्रणी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष २०२५ में इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी ३५ प्रतिशत थी। गुजरात का अलंग-सोसिया दुनिया के सबसे बड़े जहाज पुनर्चक्रण केंद्रों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के अंतर्गत हांगकांग कन्वेंशन के मानकों का अनुपालन करने वाली यहां की ११५ इकाइयां भारत की क्षमता और टिकाऊ जहाज पुनर्चक्रण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

वर्तमान में इस उद्योग की वार्षिक क्षमता ४५ लाख लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (एलडीटी) है, जिसे बढ़ाकर ९० लाख टन करने की योजना है। इस क्षेत्र में लगभग १५,००० लोगों को प्रत्यक्ष और करीब १.५ लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।

जहाज पुनर्चक्रण और नए जहाजों के निर्माण के बीच संबंध मजबूत करने के लिए सरकार ने क्रेडिट नोट व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले केंद्रों में जहाजों का पुनर्चक्रण कराने वाले जहाज मालिकों को स्क्रैप मूल्य के ४० प्रतिशत के बराबर क्रेडिट मिल सकता है। इस क्रेडिट का उपयोग भारतीय जहाज निर्माण कंपनियों में नए जहाजों के निर्माण के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह सहायता जहाज निर्माण की कुल लागत के अधिकतम ५ प्रतिशत तक सीमित होगी।

दक्षिण कोरिया की जहाज निर्माण कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं में भारत में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) वाहक जहाजों के लिए विशेष कार्गो टैंक, क्रायोजेनिक संरचनाएं, बड़े जहाजी ब्लॉक और अन्य उन्नत समुद्री उपकरणों के निर्माण की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया।

सोनोवाल ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विनिर्माण क्षमता का समन्वय देश के जहाज निर्माण उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ हरित नौवहन प्रौद्योगिकी के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने बताया कि भारत में एक मिलियन ग्रॉस टन से अधिक क्षमता वाले पांच हरित जहाज निर्माण क्लस्टर स्थापित करने के लिए नीतिगत मंजूरी दी गई है। मौजूदा जहाज निर्माण इकाइयों में लगभग २.५ अरब अमेरिकी डॉलर की परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जबकि ७० करोड़ अमेरिकी डॉलर के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

पिछले वर्ष भारत के जहाज निर्माण उत्पादन में ४० प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जहाज निर्माण अनुबंधों के मूल्य के १५ से २५ प्रतिशत तक वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था ने १०० से अधिक जहाजों के निर्माण के ऑर्डर को आगे बढ़ाने में मदद की है। इन जहाजों का कुल मूल्य १.२७ अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें ८० प्रतिशत से अधिक हिस्सा निर्यात ऑर्डरों से संबंधित है।

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख कंपनी के साथ जहाजी ब्लॉक निर्माण में सहयोग और भारत में संभावित संयुक्त उद्यम स्थापित करने के विषय पर भी चर्चा की। दक्षिण कोरियाई कंपनी ने भारत में विनिर्माण के अवसरों का मूल्यांकन करने में रुचि दिखाई।

कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (केएमईआरआई) के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में हरित प्रणोदन तकनीक, स्मार्ट समुद्री प्रौद्योगिकी, समुद्री उपकरणों के परीक्षण एवं प्रमाणन और प्रस्तावित इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

सोनोवाल ने दक्षिण कोरियाई संस्थानों और समुद्री उपकरण निर्माताओं को भारत में साझेदारी के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर को जहाजों के डिजाइन, अनुसंधान, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। भारत में परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं विकसित होने से देश में निर्मित समुद्री उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में सहायता मिलेगी।

दक्षिण कोरिया की समुद्री वित्तीय संस्थाओं के साथ हुई चर्चाओं में भारत के मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से निवेश तथा जहाजों के वित्तपोषण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख शिपिंग कंपनी ने भारत में अपने परिचालन का विस्तार करने, भारतीय ध्वज के तहत जहाजों का संचालन करने, भारत में निर्मित कंटेनरों का उपयोग करने तथा आगामी वधावन बंदरगाह के रणनीतिक महत्व से जुड़े अवसरों में रुचि व्यक्त की।

सोनोवाल ने बताया कि भारत के जहाज निर्माण उद्योग के लिए लगभग ७.८ अरब अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज की मंजूरी, बड़े जहाज निर्माण क्लस्टर स्थापित करने की योजनाएं और लगभग २३ अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के ४०० से अधिक जहाजों के संभावित निर्माण की योजना अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक प्रौद्योगिकी और निरंतर निवेश के माध्यम से भारत को वर्ष २०४७ तक जहाज निर्माण, जहाजरानी और समुद्री सेवाओं के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी केंद्रों में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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