हिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ में जनजातीय भूमि संबंधी मुद्दों की समीक्षा की, समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश

डिब्रूगढ़: असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को डिब्रूगढ़ स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में लखीमपुर, धेमाजी, माजुली और आसपास के क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के समक्ष आने वाली भूमि संबंधी समस्याओं की समीक्षा की गई। इस दौरान मूलनिवासी परिवारों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में मिसिंग, सोनवाल कछारी, बोड़ो कछारी और देउरी स्वायत्त परिषदों के मुख्य कार्यकारी सदस्य, विभिन्न जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधि, संबंधित जिलों के जिला आयुक्त तथा वन एवं राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में मिशन बसुंधरा के क्रियान्वयन, जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में भूमि बंदोबस्ती, जनजातीय परिवारों को अधिकतम ५० बीघा तक भूमि आवंटित करने तथा मिशन बसुंधरा २.० और ३.० के तहत लंबित मामलों के निपटारे पर चर्चा की गई। इसके अलावा, मिशन बसुंधरा ४.० के तहत अनसुलझे मामलों की समीक्षा की संभावना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने मिशन बसुंधरा, जलटिक्ता श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत भूमि, व्यावसायिक चराई आरक्षित भूमि (पीजीआर), ग्राम चराई आरक्षित भूमि (वीजीआर) तथा वन क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए।

बैठक का उद्देश्य जनजातीय परिवारों को भूमि अधिकार प्राप्त करने में लंबे समय से आ रही कठिनाइयों को दूर करना तथा संबंधित जिलों में भूमि बंदोबस्ती की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाना था।

डॉ. सरमा दो दिवसीय दौरे पर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया में हैं। यह बैठक जनजातीय समुदायों से जुड़ी भूमि संबंधी शिकायतों के समाधान और भूमि बंदोबस्ती नीतियों के क्रियान्वयन में अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के राज्य सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।

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