सर्बानंद सोनावाल ने कोरियाई कंपनियों को भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में निवेश का दिया न्योता, २०४७ तक दुनिया के शीर्ष पाँच देशों में शामिल होने का लक्ष्य

बुसान, दक्षिण कोरिया: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारत के बढ़ते जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में दक्षिण कोरियाई कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने जहाज निर्माण, पोत परिवहन, बंदरगाह विकास, समुद्री लॉजिस्टिक्स और समुद्री उपकरणों के विनिर्माण में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

२५ अक्टूबर से शुरू हुई अपनी चार दिवसीय दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान सोनोवाल ने कोरियाई जहाज निर्माण उद्योग में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के साथ संवाद किया, विश्व समुद्री दिवस के अवसर पर आयोजित उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लिया और कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (कोमिया) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समुद्री संबंधों को मजबूत करना तथा वर्ष २०४७ तक भारत को दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के लक्ष्य को गति देना है।

कोरिया के प्रमुख समुद्री उद्योग केंद्र बुसान में भारतीय पेशेवरों को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने उनसे अपने अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग भारत की जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करने में करने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज, हानव्हा ओशन, एचडी हुंडई, डीएनवी और इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग से जुड़े पेशेवर शामिल हुए। दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत गौरंगलाल दास ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत किया।

सोनोवाल ने वॉयेजेस (वीओवाईएजीईएस) रूपरेखा का उल्लेख किया, जिसे अप्रैल २०२६ में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान अपनाया गया था। यह रूपरेखा जहाज निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार की गई है।

सोनोवाल ने कहा, “दुनिया के सबसे उन्नत जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक के केंद्र कोरिया में आपकी उपस्थिति भारत के लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने भारतीय पेशेवरों से दोनों देशों के समुद्री उद्योगों के बीच सेतु की भूमिका निभाने और भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास में योगदान देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “आप दोनों देशों में अपने-अपने संपर्कों के बीच जीवंत सेतु की भूमिका निभा सकते हैं।”

सोनोवाल ने भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन देने, उनके कौशल विकास में सहयोग करने और भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कोरिया में अर्जित अनुभव का उपयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समुद्री भारत दृष्टि २०३० और समुद्री अमृत काल दृष्टि २०४७ के तहत देश को जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, समुद्री विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स का वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने जहाज निर्माण केंद्रों की उत्पादकता बढ़ाने, कुशल कार्यबल तैयार करने तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने के संबंध में भारतीय पेशेवरों से सुझाव भी मांगे।

सोनोवाल ने कहा, “हम जहाज निर्माण, पोत परिवहन, बंदरगाहों और समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कोरिया के साथ साझेदारी चाहते हैं।”

२६ अक्टूबर को बुसान में विश्व समुद्री दिवस के अवसर पर आयोजित मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में सोनोवाल ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मानक महत्वाकांक्षी और सभी देशों के लिए समान होने चाहिए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में विभिन्न देशों की परिस्थितियों, विकास के स्तर, तकनीकी क्षमताओं और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच में मौजूद अंतर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोनोवाल ने कहा, “उद्देश्य समान मानक और परिणाम सुनिश्चित करना होना चाहिए, जिसके साथ ऐसा सहयोग भी हो, जो प्रत्येक सदस्य देश को उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाए।”

इस गोलमेज बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज, दक्षिण कोरिया के महासागर एवं मत्स्य मंत्रालय के उपमंत्री नाम जे-हॉन, नॉर्वे की मत्स्य एवं महासागर नीति मंत्री मारियाने सिवर्टसेन नेस और साइप्रस की नौवहन उपमंत्री मरीना हाजीमैनोलिस शामिल हुईं। दक्षिण कोरिया के पूर्व महासागर एवं मत्स्य मंत्री मून सोंग-ह्योक ने बैठक की अध्यक्षता की।

सोनोवाल ने भू-राजनीतिक अस्थिरता, समुद्री डकैती और लाल सागर में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के सम्मेलनों को वैश्विक पोत परिवहन क्षेत्र के लिए एक “मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ” बताया।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संयुक्त कार्यसमूहों के गठन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, समुद्री कानूनों के प्रारूपण में सहायता और समयबद्ध क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों का उद्देश्य देशों को स्थायी राष्ट्रीय क्षमता विकसित करने में मदद करना होना चाहिए, न कि उन्हें लगातार बाहरी सहायता पर निर्भर बनाना।

भारत के समुद्री क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने कहा कि वर्ष २०२५ में अधिनियमित पाँच समुद्री कानून मार्च २०२६ में प्रभावी हुए। भारत की समुद्री सिंगल विंडो प्रणाली अब ६९ बंदरगाहों और टर्मिनलों को कवर करती है। वहीं, अलंग-सोसिया जहाज पुनर्चक्रण केंद्र में हांगकांग कन्वेंशन के अनुरूप ११५ सुविधाएं मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन की रूपरेखा के अंतर्गत संचालित होती हैं।

सोनोवाल ने कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (कोमिया) के प्रतिनिधियों के साथ अलग से बैठक की। वर्ष १९८० में स्थापित यह संगठन समुद्री उपकरण निर्माताओं, डिजाइन कंपनियों, जहाज निर्माताओं और मरम्मत कंपनियों सहित ३०४ कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

कोमिया ३० अक्टूबर को मुंबई में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलने जा रहा है। दोनों देशों ने अप्रैल में वॉयेजेस रूपरेखा के तहत इस पहल का स्वागत किया था।

इस संगठन ने फरवरी २०२५ में भारतीय जहाज निर्माण केंद्रों के साथ डिजाइन, आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा समुद्री उपकरणों और कलपुर्जों के स्थानीय विनिर्माण में सहयोग की पेशकश की थी।

सोनोवाल ने कहा कि भारत में निर्मित प्रत्येक जहाज के लिए इंजन, प्रणोदन प्रणाली, डेक मशीनरी, विद्युत उपकरण और नौवहन प्रणालियों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ऐसे कई उच्च मूल्य वाले उपकरण आयात किए जाते हैं, जिससे कोरियाई आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश और निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

कोमिया के अध्यक्ष हो-इल कांग ने कहा कि संगठन की सदस्य कंपनियों ने अगले दो वर्षों के भीतर भारतीय बाजार में प्रवेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। एसबी सनबो, डेयांग, कासेमेक और जेओ इंजीनियरिंग सहित कई कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भारत के समुद्री क्षेत्र में संभावित निवेश योजनाओं पर चर्चा की।

भारत में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए सोनोवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने सितंबर २०२५ में लगभग ७.८ अरब डॉलर के जहाज निर्माण सहायता पैकेज को मंजूरी दी थी।

उनके अनुसार, इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष २०२५ में भारत के जहाज निर्माण उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में ४० प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष २०२६ में उत्पादन में ८० प्रतिशत से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।

उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष सरकारी सहायता के अंतर्गत १२० से अधिक जहाजों के निर्माण के प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं, जिनका कुल मूल्य १.२७ अरब डॉलर से अधिक है। इस कुल मूल्य में निर्यात आदेशों की हिस्सेदारी ८० प्रतिशत से अधिक है।

सोनोवाल ने कहा, “हम पहले से ही दुनिया के लिए जहाज बना रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने सरकारी संस्थाओं की जहाज संबंधी मांग को एकत्रित किया है। इससे अगले १० वर्षों में भारतीय जहाज निर्माण केंद्रों को ४०० से अधिक जहाजों के निर्माण के लिए लगभग २३ अरब डॉलर के संभावित ऑर्डर का अनुमानित आश्वासन मिला है।

सोनोवाल ने कोमिया के मुंबई कार्यालय को भारत में कोरियाई कंपनियों के लिए दीर्घकालिक मंच बताया। उन्होंने कहा कि कंपनियां संयुक्त उद्यम स्थापित करने, लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत काम करने अथवा भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के विकल्प अपना सकती हैं।

उन्होंने आश्वासन दिया कि मंत्रालय भारतीय समुद्री क्षेत्र में निवेश करने वाली कोरियाई कंपनियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है।

सोनोवाल की चार दिवसीय दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान वैश्विक जहाज निर्माण उद्योग के प्रमुखों, समुद्री संगठनों, विचार मंचों और अनुसंधान संस्थानों के साथ अन्य बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इस यात्रा का व्यापक उद्देश्य भारत-दक्षिण कोरिया समुद्री सहयोग को मजबूत करना तथा भारत को वैश्विक जहाज निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रगति तेज करना है।

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