बारेकुरी में विश्व हूलॉक गिब्बन दिवस पर साइकिल प्रतियोगिता आयोजित

बारेकुरी: असम के तिनसुकिया जिले के बारेकुरी गांव में शनिवार को विश्व हूलॉक गिब्बन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लुप्तप्राय पश्चिमी हूलॉक गिब्बन के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महिलाओं के लिए साइकिल प्रतियोगिता आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन बारेकुरी पर्यावरण-पर्यटन विकास समिति और बारेकुरी हूलॉक गिब्बन संरक्षण समिति द्वारा तराजन-डेंका संयुक्त युवा क्लब के खेल मैदान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना, इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना तथा दुर्लभ प्राइमेट प्रजातियों की सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत हूलॉक गिब्बन के अवलोकन और भोजन वितरण के साथ हुई। इसके बाद आमंत्रित अतिथियों और स्थानीय नेताओं का स्वागत किया गया। सुबह ७ बजे २० वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए साइकिल प्रतियोगिता शुरू हुई।

तिनसुकिया शहर से लगभग १६ किलोमीटर दूर स्थित बारेकुरी गांव स्थानीय निवासियों और जंगली हूलॉक गिब्बन के बीच अनूठे सह-अस्तित्व के लिए प्रसिद्ध है। गांव के अधिकांश निवासी मोरान समुदाय से संबंधित हैं। बताया जाता है कि गांव के बांस के झुरमुटों और फलदार पेड़ों में हूलॉक गिब्बन के ५ पारिवारिक समूहों के लगभग २० से २१ गिब्बन रहते हैं।

स्थानीय समुदाय के साथ इस घनिष्ठ संबंध के बावजूद, लुप्तप्राय हूलॉक गिब्बन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों और तेल संबंधी गतिविधियों के कारण प्राकृतिक आवास का विखंडन, बिजली की तारों से करंट लगने का खतरा तथा भोजन की कमी इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए प्रमुख चिंताएं हैं। बताया जाता है कि वर्ष २००३ में इनकी संख्या लगभग ३३ थी, जो अब घटकर काफी कम हो गई है।

क्षेत्र में संरक्षण के लिए फलदार पेड़ लगाने तथा बारेकुरी को भेरजन-बोराजन-पदुमोनी वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ने वाले हरित गलियारे के निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क बेहतर बनाना और गिब्बन को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में मदद करना है।

आयोजकों ने बताया कि साइकिल प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि संरक्षण गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और बारेकुरी को एक प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने को प्रोत्साहित करना भी था।

इस आयोजन के माध्यम से प्राकृतिक आवासों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सह-अस्तित्व को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

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