डिब्रूगढ़ में डुलियाजान साहित्य सम्मेलन की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, उप-समिति के अस्थायी कार्यालय का उद्घाटन

डिब्रूगढ़: असम साहित्य सभा के अठहत्तरवें द्विवार्षिक डुलियाजान अधिवेशन को सफल बनाने के उद्देश्य से तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में डिब्रूगढ़ उप-समिति के अस्थायी कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन डिब्रूगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय में किया गया।

असम साहित्य सभा के डिब्रूगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय के सचिव डॉ. शांतनु लहकर ने कार्यालय का उद्घाटन किया और आगामी साहित्यिक सम्मेलन की पूर्ण सफलता की कामना की। उम्मीद जताई जा रही है कि यह अस्थायी कार्यालय अधिवेशन से संबंधित समन्वय और संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर उप-समिति के उपाध्यक्ष, लेखक एवं निबंधकार चंदन फुकन की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक के उद्देश्य की व्याख्या करते हुए उप-समिति के सचिव एवं लेखक कुशल कोंवर ने कहा कि अधिवेशन की तैयारियों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों, विशेषकर धन संग्रह, संगठनात्मक गतिविधियों तथा अन्य संबंधित विषयों पर चर्चा करने के साथ-साथ अस्थायी कार्यालय का औपचारिक उद्घाटन करने के उद्देश्य से बैठक बुलाई गई थी।

बैठक में वक्ताओं ने साहित्यिक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास, जिम्मेदार भागीदारी और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तैयारियों में समन्वय को मजबूत करने तथा संगठनात्मक कार्यों में तेजी लाने के लिए विभिन्न उपायों पर भी प्रकाश डाला।

बैठक में उप-समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं डीपीएस के प्रबंध निदेशक संजय जैन, उपाध्यक्ष तथा अहोम सभा के जिला अध्यक्ष रंजीत बरुआ, पूर्व वार्ड आयुक्त एवं उपाध्यक्ष रंजीत चेतिया, डिब्रूगढ़ साहित्य सभा के सचिव एवं लेखक रतुल बूढ़ागोहाईं, लेखिका संस्था की सचिव उदयन्ति हजारिका तथा उप-समिति के मुख्य समन्वयक एवं लेखक गौतम गोगोई सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बैठक में उपस्थित लोगों ने संगठनात्मक योजना के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और अधिवेशन की तैयारियों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान सर्वसम्मति से आठ प्रस्ताव पारित किए गए।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए चंदन फुकन ने आशा व्यक्त की कि अस्थायी कार्यालय के उद्घाटन से डिब्रूगढ़ उप-समिति की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित रूप मिलेगा और डुलियाजान अधिवेशन की तैयारियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में सभी उपस्थित लोगों ने खड़े होकर असम साहित्य सभा के गान ‘चिरो स्नेही मोर भाषा जननी’ का सामूहिक गायन किया।

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