अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद ने अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड में भगवान परशुराम की मूर्ति के निर्माण में राशि की अनियमितता के आरोप के साथ अनुदान की राशि के मामले पर उठाया सवाल।

 परिषद ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से स्वतंत्र जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट की मांग।

अरुणाचल प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद ने परशुराम कुंड में भगवान परशुराम की प्रतिमा के निर्माण की वास्तविक लागत, रथयात्राओं के खर्च, चंदा संग्रह और कथित सरकारी आवंटन संबंधी दावों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। मालूम हो कि  अरुणाचल प्रदेश के पवित्र धार्मिक एवं पर्यटन स्थल परशुराम कुंड में भगवान परशुराम की 54 फीट ऊंची अष्टधातु प्रतिमा के निर्माण और उससे संबंधित वित्तीय विवरणों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अरुणाचल प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद  ने पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

परिषद का कहना है कि भगवान परशुराम की प्रतिमा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है। इसलिए प्रतिमा निर्माण के नाम पर जुटाई गई धनराशि, वास्तविक निर्माण लागत, रथयात्राओं के दौरान प्राप्त चंदे तथा विभिन्न मदों में किए गए खर्च का प्रमाणित विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। परिषद ने आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की है।

कल तेजू (लोहित जिला ,अरुणाचल प्रदेश) के जिला उपायुक्त केसांग नगुरुप दामो को इस संदर्भ में स्मारक पत्र की प्रतिलिपि सौंपते हुए लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले को निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग की। मालूम हो कि 

विवाद का प्रमुख विषय प्रतिमा की वास्तविक निर्माण लागत है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एक अपील में परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, परिषद के संज्ञान में आए एक कथित वीडियो के संबंध में 15 करोड़ रुपये की लागत का आंकड़ा सामने आने की बात कही जा रही है।

परिषद ने मांग की है कि प्रतिमा निर्माण पर हुए वास्तविक खर्च का अंतिम लेखा-विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसमें निर्माण अनुबंध, प्रयुक्त पंचधातु एवं अन्य सामग्री का विवरण, भुगतान की रसीदें, ठेका प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय दस्तावेज शामिल हों।

परिषद ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग लागत संबंधी आंकड़े अपने आप में किसी घोटाले का प्रमाण नहीं हैं। वास्तविक स्थिति का निर्धारण प्रमाणित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा परिषद ने प्रतिमा परियोजना के प्रचार-प्रसार और चंदा संग्रह से जुड़ी रथयात्राओं की संख्या तथा अवधि को लेकर सामने आए परस्पर विरोधी दावों पर भी सवाल उठाते हुए 

परिषद ने मांग की है कि सभी रथयात्राओं की तारीख, मार्ग, अवधि, आयोजन संबंधी विवरण, चंदा संग्रह और खर्च का प्रमाणित ब्योरा सार्वजनिक किया जाए, ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके।

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