देवी के आगमन पर हिंसा और द्वेष भुलाकर सौहार्द का आह्वान

अस्पताल रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा मंडप के उद्घाटन पर स्वामी गणधिशानंदजी महाराज ने दिया आध्यात्मिकता और सद्भाव का संदेश

प्रेरणा भारती, निहार कांति राय, उधारबंद।

ढाक की गूंज, शंखध्वनि, उलूध्वनि और मधुर संगीत से शारदीय वातावरण भक्तिमय हो उठा है। मां दुर्गा के आगमन के साथ उत्सव की उमंग में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी घुल-मिल गया। मंगलवार को महाषष्ठी से पहले तृतीया के पावन अवसर पर उधारबंद के अस्पताल रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति के पूजा मंडप एवं प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

शिलचर रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव श्रद्धेय श्रीमत् स्वामी गणधिशानंदजी महाराज ने फीता काटकर मंडप एवं प्रतिमा का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उधारबंद के विधायक तथा पूजा समिति के मुख्य संरक्षक राजदीप ग्वाला, समिति के सलाहकार शंकर राय, उधारबंद के राजस्व चक्र अधिकारी प्रणबानंद दोवारा, पूजा समिति के अध्यक्ष दुलाल चंद्र देव, उधारबंद थाना प्रभारी चिरंजीत बोरा तथा उधारबंद जीपी की सभानेत्री काकली कर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उद्घाटन के बाद अपने आशीर्वचन में स्वामी गणधिशानंदजी महाराज ने मां दुर्गा की महिमा का वर्णन करते हुए शारदीय उत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देवी की आराधना का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। देवताओं के उत्तरायण काल में जागरण की प्रचलित मान्यता का उल्लेख करते हुए उन्होंने अकाल बोधन अर्थात निर्धारित समय से पहले मां दुर्गा के आह्वान की महत्ता को भी स्मरण कराया।

महाराज के संबोधन में बंगाल के शारदीय दुर्गोत्सव की चिरंतन भावना स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा अपने मायके आती हैं और अपने परिवार के सभी सदस्यों को साथ लेकर आती हैं। इसलिए यह उत्सव केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुशियां बांटने, लोगों के बीच आत्मीय संबंध मजबूत करने तथा भेदभाव भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने का महान अवसर है।

उन्होंने लोगों से हिंसा, द्वेष और परस्पर दोषारोपण की भावना को त्यागकर इस आनंदोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया। देवी की आराधना से प्रत्येक व्यक्ति के मन में सद्भाव, शुभ विचार और प्रेम का संचार होना चाहिए। उनके आशीर्वचन में यही संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया कि देवी उपासना की वास्तविक सार्थकता केवल पूजा मंडप की भव्यता में नहीं, बल्कि लोगों के हृदय में सद्भावना, मानवीयता और सकारात्मक चेतना के विकास में निहित है।

स्वामी गणधिशानंदजी महाराज के आध्यात्मिक संबोधन के बाद विधायक राजदीप ग्वाला ने कहा कि महाराज ने अपने वक्तव्य में दुर्गापूजा की मूल भावना को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। ऐसे में उन्हें अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कामना की कि सभी के सहयोग और आपसी मेल-मिलाप से अस्पताल रोड की 58वीं दुर्गापूजा विशेष और यादगार बने। साथ ही उन्होंने शारदीय दुर्गोत्सव के अवसर पर सभी के स्वास्थ्य, शांति और कल्याण के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना की।

इस अवसर पर पूजा समिति के अध्यक्ष दुलाल चंद्र देव ने स्वागत भाषण दिया। बुल्टी राय ने संगीत प्रस्तुत किया। समिति के पदाधिकारी राजेश राय ने पूजा की थीम तथा प्रतिमा की कलात्मकता की सराहना की। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के कलाकारों के कुशल हाथों से मंडप की सजावट और प्रतिमा को आकर्षक रूप दिया गया है। उन्होंने बराक घाटी के सभी वर्गों के लोगों को अस्पताल रोड के दुर्गोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

उद्घाटन के बाद मंडप और प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। मंडप की आकर्षक निर्माण शैली देखकर उद्घाटनकर्ता स्वामी गणधिशानंदजी महाराज भी अभिभूत नजर आए। सागरिका डेस्क के प्रतिनिधि से बातचीत में उन्होंने कहा कि भले ही उनके लिए थाईलैंड जाना संभव नहीं हो पाया, लेकिन अस्पताल रोड के इस मंडप की कलात्मक सजावट ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है। उन्होंने प्रतिमा की कलात्मक सुंदरता की भी प्रशंसा की और उम्मीद जताई कि यह मंडप बराक घाटी के श्रद्धालुओं एवं दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

विधायक राजदीप ग्वाला ने भी कहा कि मंडप निर्माण की शुरुआत से ही वह कार्य की प्रगति पर नजर रख रहे थे। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मंडप का आकर्षक और कलात्मक स्वरूप देखकर वह काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बराक घाटी के सभी वर्गों के लोगों से अस्पताल रोड की इस दुर्गापूजा में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने की अपील की।

कुल मिलाकर, अस्पताल रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा का उद्घाटन समारोह केवल मंडप और प्रतिमा के अनावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वामी गणधिशानंदजी महाराज के आध्यात्मिक संदेश ने इसे सामाजिक सद्भाव, आपसी सौहार्द और मानवीय मूल्यों की विशेष अभिव्यक्ति बना दिया। मां दुर्गा के आगमन से प्रत्येक हृदय आलोकित हो, हिंसा और द्वेष का अंत हो तथा लोगों के बीच प्रेम और भाईचारा मजबूत बने—इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ अस्पताल रोड की 58वीं शारदीय दुर्गापूजा का शुभारंभ हुआ।

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