[पीडब्ल्यूडी अभियंता पर तीस हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने का आरोप; एक लाख पचास हजार रुपये की मांग जांच के दायरे में]
डिब्रूगढ़: मंगलवार रात डिब्रूगढ़ के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय में मुख्यमंत्री की विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक टीम की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। टीम ने कथित तौर पर निर्माण कार्य से जुड़े एक लंबित बिल को मंजूरी देने के एवज में रिश्वत की पहली किस्त स्वीकार करते हुए एक सहायक कार्यपालक अभियंता को पकड़ने के लिए जाल बिछाया था।
अधिकारी की पहचान मृदुल बागलारी, सहायक कार्यपालक अभियंता, पीडब्ल्यूडी (बिल्डिंग डिवीजन), डिब्रूगढ़ के रूप में हुई है। कथित तौर पर उन्हें पीडब्ल्यूडी (बिल्डिंग डिवीजन) के अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में चलाए गए अभियान के दौरान पकड़ा गया।
शिकायत और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बागलारी ने कथित तौर पर एक ठेकेदार से लंबित निर्माण बिल को मंजूरी देने के लिए एक लाख पचास हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बाद में कथित तौर पर यह राशि घटाकर एक लाख तीस हजार रुपये तय की गई और इसे किस्तों में लेने पर सहमति बनी।
यह मामला माधबखाट/मदाराखाट चाय बागान में जगन्नाथ कम्युनिटी एंड स्किल सेंटर के निर्माण से जुड़ा बताया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब एक करोड़ तैंतालीस लाख रुपये बताई गई है और इसका कार्य वित्तीय वर्ष दो हजार चौबीस- पच्चीस के दौरान किया गया था।
आरोपों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने कथित रिश्वत व्यवस्था के तहत पहले ही तीस हजार रुपये का भुगतान कर दिया था। इसके बाद शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री की विजिलेंस टीम ने कथित तौर पर सत्यापन किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद जाल बिछाने की कार्रवाई शुरू की।
बताया गया है कि जब रिश्वत की पहली किस्त स्वीकार की जा रही थी, तभी विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की और बागलारी को कथित तौर पर पकड़ लिया। मुख्यमंत्री की विजिलेंस टीम के समक्ष शिकायत राज शेखर हजारिका ने दर्ज कराई थी, जो निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस अधिकारियों को लंबित निर्माण बिल के प्रसंस्करण और भुगतान को मंजूरी देने के लिए कथित रूप से पैसे की मांग किए जाने की सूचना मिली थी।
शिकायत के बाद अधिकारियों ने कथित तौर पर गोपनीय तरीके से सत्यापन किया। इस दौरान संचार पर नजर रखने और अन्य संबंधित साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया अपनाई गई। आरोपों के सत्यापन के बाद विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने जाल बिछाने की कार्रवाई की।
पीडब्ल्यूडी कार्यालय में हुई इस कार्रवाई से विभाग में काफी हलचल मच गई। विजिलेंस अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की तलाश में जांच एवं तलाशी की कार्रवाई की।
जांच के तहत विजिलेंस टीम ने कथित तौर पर खोनिया गांव स्थित बागलारी के आवास पर भी तलाशी ली, ताकि कथित रिश्वत मामले से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाए जा सकें।
जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि कथित लेन-देन में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं और निर्माण बिल के प्रसंस्करण से जुड़ी कोई अन्य अनियमितता हुई थी या नहीं।
कथित रिश्वत प्रकरण ने उस निर्माण परियोजना को भी जांच के केंद्र में ला दिया है, जिसका बिल लंबित बताया गया था। माधबखाट/मदाराखाट चाय बागान में प्रस्तावित जगन्नाथ कम्युनिटी एंड स्किल सेंटर परियोजना की अनुमानित लागत करीब एक करोड़ तैंतालीस लाख रुपये बताई जा रही है।
विजिलेंस अधिकारी अब लंबित बिल की स्थिति, कथित रूप से की गई रिश्वत की मांग और बिल के प्रसंस्करण में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं। डिब्रूगढ़ पीडब्ल्यूडी कार्यालय में हुई इस कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
हालांकि, मृदुल बागलारी के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं और मामले में आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी। बरामद साक्ष्यों, औपचारिक मामला दर्ज किए जाने तथा आरोपी अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर विजिलेंस अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
इस कार्रवाई ने सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े बिलों के प्रसंस्करण में भ्रष्टाचार के आरोपों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। विजिलेंस अधिकारी अब डिब्रूगढ़ पीडब्ल्यूडी रिश्वत प्रकरण से जुड़े पूरे घटनाक्रम और कथित लेन-देन की वास्तविकता का पता लगाने में जुटे हैं।