एसपीआईसी मैके की पहली पश्चिमी शास्त्रीय संगीत श्रृंखला का ऊपरी असम में समापन

डिब्रूगढ़: एसपीआईसी मैके डिब्रूगढ़ चैप्टर द्वारा आयोजित पहली पश्चिमी शास्त्रीय संगीत श्रृंखला का इस सप्ताह सफलतापूर्वक समापन हुआ। दो दिनों के दौरान डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया के तीन शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित इन प्रस्तुतियों ने चैप्टर के लिए एक नई पहल का रूप लिया और प्रत्येक स्थल पर दर्शकों से उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली।

इस संगीत श्रृंखला में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त पियानोवादक, कंडक्टर और यामाहा आर्टिस्ट निसे मेरुनो ने नागालैंड के टेट्सो कॉलेज एन्सेम्बल तथा डिब्रूगढ़ के न्यूरोडाइवर्जेंट पियानोवादक देवांगा बिद्रुम कलिता के साथ प्रस्तुति दी। देवांगा के संगीत और उनके व्यक्तिगत संघर्ष एवं दृढ़ता की कहानी ने सभी तीन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

श्रृंखला की शुरुआत २९ सितंबर को डिब्रूगढ़ के डी.एच.एस.के. (स्वायत्त) कॉलेज में हुई। कॉलेज के एसपीआईसी मैके हेरिटेज क्लब के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग ३५० विद्यार्थी और शिक्षक शामिल हुए।

इसके अगले दिन ३० सितंबर की सुबह कलाकारों ने तिनसुकिया के बडिंग बड्स हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रस्तुति दी, जिसे लगभग २५० दर्शकों ने देखा। उसी शाम श्रृंखला का अंतिम कार्यक्रम डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ, जहां ४०० से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक और आम नागरिक कार्यक्रम के साक्षी बने।

तीनों कार्यक्रमों में निसे मेरुनो की उत्कृष्ट प्रस्तुति, टेट्सो कॉलेज एन्सेम्बल द्वारा पश्चिमी शास्त्रीय संगीत और नागा लोक-संगीत के मिश्रण तथा देवांगा की प्रस्तुति और उनकी प्रेरणादायक व्यक्तिगत कहानी को दर्शकों ने खूब सराहा। कई दर्शकों ने बताया कि यह उनके लिए लाइव पश्चिमी शास्त्रीय संगीत सुनने का पहला अनुभव था।

कार्यक्रम में जियाकोमो पुच्चिनी की “ओ मियो बाब्बिनो कारो”, गाएटानो डोनिज़ेट्टी की “उना फुर्तिवा लाग्रिमा”, मोजार्ट की “एवे वेरुम कॉर्पस”, सेज़र फ्रांक की “पानिस एंजेलिकस” और लोकप्रिय भजन “एबाइड विद मी” जैसी प्रसिद्ध रचनाएं प्रस्तुत की गईं। इसके अलावा लोकप्रिय इतालवी गीत “ओ सोले मियो”, “कैनन इन डी” सहित विभिन्न पियानो प्रस्तुतियों और निसे मेरुनो की मौलिक रचनाओं ने भी दर्शकों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया था कि दर्शक केवल संगीत का आनंद ही न लें, बल्कि उसके पीछे की परंपराओं को भी समझ सकें।

समापन कार्यक्रम में एसपीआईसी मैके डिब्रूगढ़ चैप्टर के सदस्यों ने बताया कि यह श्रृंखला संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष का हिस्सा है। एसपीआईसी मैके अपनी स्थापना के ५० वर्ष पूरे कर रहा है और इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में २०० कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

एसपीआईसी मैके डिब्रूगढ़ चैप्टर ने वर्ष २०२५ में ३२ कार्यक्रम आयोजित किए थे, जिनके माध्यम से ऊपरी असम के २०,००० से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। वर्तमान वर्ष में आयोजित यह पश्चिमी शास्त्रीय संगीत श्रृंखला चैप्टर का चौथा कार्यक्रम था।

इस श्रृंखला के आयोजन में एसआरएफ फाउंडेशन और ज्योति ललिता कनौई फाउंडेशन का सहयोग रहा। डिब्रूगढ़ के चार्टर्ड अकाउंटेंट और परोपकारी ज्योति प्रसाद कनौई के नेतृत्व वाला ज्योति ललिता कनौई फाउंडेशन कई वर्षों से शहर में शैक्षणिक बुनियादी ढांचे और सामाजिक पहलों को समर्थन देता आ रहा है।

एसपीआईसी मैके डिब्रूगढ़ चैप्टर के आयोजकों ने सभी संरक्षकों, तीनों मेजबान संस्थानों और उनके संबंधित हेरिटेज क्लबों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने संकेत दिया कि यह श्रृंखला आने वाले महीनों में क्षेत्र में आयोजित की जाने वाली ऐसी कई पहलों की शुरुआत हो सकती है।

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