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14 सितंबर को शुरू हुए हिंदी पखवाड़े का भव्य समापन
समारोह 28 सितंबर को आभासी पटल पर पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी ने आयोजित किया। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे हिंदी राजभाषा विभाग के पूर्व अधिकारी दिल्ली से किशोर श्रीवास्तव जी जो एक प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट भी है। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे अकादमी के संरक्षक सदस्य हरि लुईटेल जी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थापिका रीता सिंह ने किया तथा अथर्व कुमार ने सरस्वती वंदना किया। इस अवसर पर दोनों वक्ताओं ने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्थापिका के कार्य का भूरी भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर किशोर जी ने कहा कि रीता सिंह अकादमी को लेकर वर्ष भर हिंदी विषय लेकर कार्यक्रम करती रहती हैं। आप पाठशाला भी चलाती हैं और इन्होंने केवल पूर्वोत्तर को ही नहीं जोड़ा है बल्कि पूरे देश को पूर्वोत्तर के साथ जोड़ रखा है। किशोर श्रीवास्तव ने अकादमी के सभी सदस्यों के लगन और उत्साह की सराहना की जो हिंदीतर क्षेत्र में रहकर भी हिंदी की बिना किसी साधन की सेवा कर रहे हैं जो सरकारी अधिकारी होने के बावजूद भी वह खुद नहीं कर पाए।
अकादमी के साथ लंबे समय से जुड़ी रही लघुकथाकार एवं विशेषज्ञ अन्नपूर्णा वाजपेई जी ने भी रीता सिंह सर्जना की जीवंतता की प्रशंसा की। उन्होंने सुझाव दिया कि अकादमी हर महीने एक वर्कशॉप का आयोजन करे जहां पर हिंदी में लघु कथा लेखन तथा वाचन कला सिखाई जाएगी और वह इसमें अपना यथासंभव सहयोग देंगीं।
गौरतलब हो कि हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत अकादमी ने दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (वेबिनार) का भी आयोजन किया। प्रथम दिवस पर सुधाकर पाठक,अध्यक्ष हिंदुस्तानी अकादमी ,दिल्ली के अध्यक्षता में और तराली दास के संचालन में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर स्नेहलता नेगी, दिल्ली विश्वविद्यालय से उपस्थित थे। संस्थापिका रीता सिंह ‘सर्जना’ के सान्निध्य में कार्यक्रम का संयोजन तेजपुर विश्वविद्यालय के सहायक आचार्या डॉ. गोमा देवी शर्मा ने किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में त्रिपुरा विश्वविद्यालय के सह- आचार्या डॉ. बीना देववर्मन, नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज से डॉ. नंदिता दत्त और डॉ. अर्चना हाजरिका के साथ शोधार्थियों ने पूर्वोत्तर के अनुवाद साहित्य, दस्तावेजीकरण, डिजिटल युग में हिंदी स्थिति, विद्यालयो में चुनौतियां समाधान एवं भाषा तथा सांस्कृतिक विरासत को कैसे संरक्षण करने की आवश्यकता है, उस पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रोफेसर स्नेहलता नेगी ने “पूर्वोत्तर भारत के भाषाई विविधता के साथ सांस्कृतिक मूल्य” पर अपना विचार प्रस्तुत किया। द्वितीय दिवस में वरिष्ठ साहित्यकार हरि लुइटेल की अध्यक्षता में वेबिनार प्रारम्भ हुआ मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार सांवरमल सिंगानेरिया मंचासिन थे। विषय विशेषज्ञ के रूप में मणिपुर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर यशवंत सिंह, सिक्किम विश्वविद्यालय से डॉ. दिनेश साहू, और गवर्नमेंट कॉलेज, बोमडिला से डॉ.आलोक सिंह विराजमान थे। कार्यक्रम का संचालन प्रीति आइच ने किया। दो दिवसीय इस संगोष्ठी में असम, अरुणाचल प्रदेश,नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर और सिक्किम विश्वविद्यालय के शोधार्थियो ने भाग लिया। हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह के कविता वाचन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अधिकार किया नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधार्थी वर्षा राभा ने। द्वितीय पुरस्कार विकास राय एवं तृतीय पुरस्कार मुहिम हाजरिका तथा थानेश्वरी कुर्मी गंजु को मिला। उधर लघुकथा वाचन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान की विजेता रहीं शिलांग से नीता शर्मा। द्वितीय स्थान जोरहाट से ज्योति अग्रवाल तथा तृतीय स्थान पुन: शिलांग से गीता लिंबू ने प्राप्त किया। नारा लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला अरुणाचल की लेखिका कागो मादो को, द्वितीय स्थान राजू बोरो को तथा तृतीय स्थान आभा कुमारी चौधरी को । इसके अलावा भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया आभा चौधरी ने, द्वितीय स्थान अनिमा माहेला ने तथा तृतीय स्थान विशाल कुमार छेत्री सैनिक कवि ने हासिल किया। इन सभी को डिजिटल प्रमाण पत्र दिया गया।
समापन समारोह में उपस्थित थे नागालैंड से कैबिलेन्हो, चेवांगलुंग, दोरजी लोंपू ,वर्षा राभा, गोरिक ओरि, सिक्किम से महेश लामिछाने, शिलांग से नीता शर्मा, गीता लिंबू, अरुणाचल प्रदेश से डॉ. आलोक कुमार सिंह,असम से ज्योति अग्रवाल, विशाल के. सी., सरिता सिंह, डॉ. अर्चना हाजरिका, मुहिम हाजरिका, विकास राय, कल्पना देवी आत्रेय , आभा कुमारी कानपुर से अन्नपूर्णा बाजपेई,आदि। कार्यक्रम का संचालन आभा कुमारी चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सीमा सिंह स्वस्तिका ने किया।