गौतम सरकार, रामकृष्णनगर, 29 सितंबर:
रामकृष्णनगर शहर से सटे विवेकानंद पल्ली क्षेत्र के विशिष्ट नागरिक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् स्वर्गीय गिर्बानचंद्र कर और नीलिमा रानी कर के दूसरे पुत्र डॉ. गिरिधारी कर बराक घाटी के प्रसिद्ध मेडिसिन विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
डॉ. कर ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हायर सेकेंडरी तक रामकृष्ण विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जी.सी. पॉल कॉलेज से प्री-मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। तत्पश्चात उन्होंने सिलचर मेडिकल कॉलेज में साढ़े पांच वर्ष तक एमबीबीएस की पढ़ाई की और उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए असम में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद वे एमडी की पढ़ाई के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज गए। वहां दो वर्ष पूरा करने के बाद वे पुनः सिलचर मेडिकल कॉलेज लौट आए और मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए। आगे चलकर उन्होंने सिलचर मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने सिलचर मेडिकल कॉलेज में पूरी निष्ठा और कुशलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। विभिन्न जटिल बीमारियों से पीड़ित अनेक मरीज उनके उपचार से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटे। जटिल रोगों की पहचान करने में उनकी विशेष दक्षता रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी चिकित्सा सेवा रुकी नहीं। आज भी वे नियमित रूप से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा त्रिपुरा से भी बड़ी संख्या में मरीज आज उनके पास उपचार के लिए आते हैं। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ वे विभिन्न सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं।
कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना लोगों की चिकित्सा सेवा की। चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। मेडिसिन विभाग में उन्हें गोल्ड मेडल भी प्राप्त हुआ है। गितांजलि अवॉर्ड सहित कई अन्य सम्मान भी उन्हें मिल चुके हैं।
आज जीवन के इस पड़ाव पर भी डॉ. गिरिधारी कर उसी समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। सुबह हो या रात, वे जरूरतमंद मरीजों की चिकित्सा के लिए तत्पर रहते हैं। गरीब और अमीर सभी मरीजों को वे समान दृष्टि से देखते हैं। उनका सरल व्यवहार और आत्मीयता मरीजों के बीच उन्हें बेहद लोकप्रिय बनाता है।
बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि डॉ. गिरिधारी कर जैसे समर्पित और अनुभवी मेडिसिन विशेषज्ञ का बराक घाटी में मिलना आने वाले समय में बेहद कठिन होगा। यही कारण है कि आज भी हजारों मरीज उन्हें केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि अपने लिए भगवान समान मानते हैं।