-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले—500 वर्षों के संघर्ष का सुखद परिणाम दुनिया देख रही है, सिंघल जी का राम मंदिर का सपना हुआ साकार
( विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा—इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा के बाद भी अपना जीवन राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित किया)
लखनऊ, 27 सितंबर। विश्व हिंदू परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष का भव्य उद्घाटन समारोह रविवार को लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित सिटी मोंटेसरी स्कूल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि तथा विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में अशोक सिंघल जी के जीवन, उनके त्याग, संगठनात्मक कार्य तथा हिंदू समाज के जागरण में उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन राष्ट्र, समाज और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देने के बजाय अपना जीवन राष्ट्र एवं संगठन कार्य के लिए समर्पित कर दिया।
इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद चुना राष्ट्रसेवा का मार्ग : मिलिंद परांडे
मुख्य वक्ता मिलिंद परांडे ने अशोक सिंघल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे देश और धर्म के लिए पूर्णतः समर्पित व्यक्तित्व थे। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने उस दौर में इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त की, जब देश में उच्च शिक्षा के अवसर सीमित थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने लिए अथवा अपने परिवार के लिए जीवन जीने के बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना।
परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने लगभग 25 वर्षों तक उत्तर प्रदेश में संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए हिंदू समाज में समरसता और संगठन की भावना मजबूत करने का प्रयास किया। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संपर्क स्थापित किया और संगठन के विस्तार के लिए निरंतर कार्य किया।
उन्होंने कहा कि सिंघल जी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यक्तिगत प्रतिभा, उच्च शिक्षा और उपलब्धियों को केवल स्वयं तक सीमित न रखकर समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित किया जा सकता है।
संघ कार्य से विहिप तक का सफर
अशोक सिंघल का जन्म 1926 में आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातुकर्म अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त की। विद्यार्थी जीवन में ही उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में अपना जीवन संघ कार्य को समर्पित कर दिया।
उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों में संगठन के विस्तार और समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क स्थापित करने के बाद उन्हें विश्व हिंदू परिषद के कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। विहिप में उन्होंने संगठन के विस्तार, धार्मिक-सांस्कृतिक जागरण और हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय तक संगठन के शीर्ष पदों पर रहने के बाद उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व भी संभाला।
राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे सिंघल
अशोक सिंघल का सार्वजनिक जीवन विशेष रूप से श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा। वर्ष 1984 में आयोजित धर्म संसद के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए चले अभियान को देशव्यापी स्वरूप देने में उनकी महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका रही।
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मसभाओं, यात्राओं, जनजागरण अभियानों और कारसेवा से जुड़े कार्यक्रमों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे और मंदिर निर्माण के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन जुटाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस के पहले और बाद की घटनाओं में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नेताओं की भूमिका देशव्यापी चर्चा का विषय बनी। अशोक सिंघल इस आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे।
राम मंदिर का सपना हुआ साकार : मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अशोक सिंघल को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जो सपना देखा था, आज वह साकार हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवन का वह संकल्प पूरा हुआ, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष का सुखद परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने अपने पूरे जीवन में, सोते-जागते और चलते-फिरते एक ही प्रयास किया कि हिंदू समाज संगठित हो और देश तथा धर्म की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिष्ठित परिवार से आने और उस समय की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अशोक सिंघल ने त्याग और तपस्या का जीवन चुना। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन की सुविधाओं के बजाय राष्ट्र, समाज और संस्कृति को प्राथमिकता दी।
सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण पर भी रहा जोर
अशोक सिंघल का कार्य केवल राम जन्मभूमि आंदोलन तक सीमित नहीं था। वे गौ-संरक्षण, हिंदू सामाजिक एकता, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरण तथा धर्मांतरण जैसे विषयों पर भी सक्रिय रहे। विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से उन्होंने विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय तथा जनसंपर्क को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
वक्ताओं ने कहा कि सिंघल जी का मानना था कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता और सामाजिक समरसता में निहित है। इसलिए उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और व्यापक जनजागरण के लिए निरंतर कार्य किया।
शास्त्रीय संगीत से भी था गहरा लगाव
राष्ट्र और समाज के कार्यों में सक्रिय रहने वाले अशोक सिंघल की भारतीय शास्त्रीय संगीत में भी विशेष रुचि थी। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से संगीत की शिक्षा ली थी और शास्त्रीय गायन का अभ्यास किया था। उनके व्यक्तित्व में संगठनकर्ता, समाजसेवी और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े व्यक्ति के साथ-साथ कला एवं संगीत के प्रति गहरी संवेदनशीलता भी दिखाई देती थी।
जन्म शताब्दी वर्ष में होंगे व्यापक कार्यक्रम
विश्व हिंदू परिषद द्वारा अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष को देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाने की योजना बनाई गई है। इस दौरान उनके जीवन और विचारों से नई पीढ़ी को परिचित कराने, सामाजिक समरसता, सेवा, सांस्कृतिक जागरण और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
लखनऊ में आयोजित उद्घाटन समारोह को इसी व्यापक अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में विहिप के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
89 वर्ष की आयु में हुआ निधन
अशोक सिंघल का निधन 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के एक अस्पताल में 89 वर्ष की आयु में हुआ था। हालांकि उनके निधन के बाद भी उनके द्वारा स्थापित संगठनात्मक कार्य और हिंदू समाज के जागरण से जुड़े उनके विचार निरंतर चर्चा में रहे हैं।
लखनऊ में आयोजित जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में उनके जीवन को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके त्याग, संगठन क्षमता और राष्ट्र तथा समाज के प्रति समर्पण को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। समारोह समाचार लिखे जाने तक जारी था और इसमें विभिन्न वक्ताओं के संबोधन एवं अन्य कार्यक्रम चल रहे थे।
प्रेरणा भारती डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क, लखनऊ।