डिब्रूगढ़: असम के ऐतिहासिक चाय उद्योग में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत गुडरिक ग्रुप के बोरपात्रा टी एस्टेट में २३० किलोवाट क्षमता वाले ऑन-ग्रिड ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्र को सफलतापूर्वक चालू किया गया है। बोरपात्रा टी एस्टेट के प्रबंधक सतीश पांडे ने संयंत्र का औपचारिक उद्घाटन किया।
यह परियोजना गुडरिक ग्रुप के लिए विकसित किए जा रहे कुल ३.११ मेगावाट क्षमता वाले वाणिज्यिक एवं औद्योगिक सौर ऊर्जा कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम को टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड और सस्टवेस्ट द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है, जबकि पूर्व सैनिकों द्वारा संचालित एमएसएमई कंपनी एरेज़ इन्जेनिरिया प्राइवेट लिमिटेड इसकी टर्नकी कार्यान्वयन भागीदार के रूप में कार्य कर रही है।
कंपनी के अनुसार, इस व्यापक डीकार्बोनाइजेशन पहल के तहत असम के विभिन्न ऐतिहासिक चाय बागानों में अब तक १९ ऑन-ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य चाय उत्पादन में पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
परियोजना को विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए एरेज़ इन्जेनिरिया ने असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड से आवश्यक नेट-मीटरिंग एवं अन्य वैधानिक मंजूरियां प्राप्त कीं। कंपनी के मुताबिक, नामरूप के एसडीई तथा एपीडीसीएल, डिब्रूगढ़ के टीएंडसी विभाग द्वारा की गई तकनीकी जांच और समयबद्ध स्वीकृतियों से संयंत्र को निर्धारित समय के भीतर चालू करने में मदद मिली।
कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.आर. प्रसाद के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों की टीम स्वच्छ प्रौद्योगिकी आधारित बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कार्य कर रही है। कंपनी ने इस पहल को सैन्य अनुशासन, तकनीकी दक्षता और देशसेवा की भावना के साथ शुरू की गई दूसरी पारी के रूप में बताया है।
बोरपात्रा टी एस्टेट में स्थापित नया सौर संयंत्र चाय उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने में योगदान देगा। कंपनी के अनुसार, यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक नेट-जीरो रणनीति तथा असम में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के लक्ष्यों के अनुरूप है।
असम के चाय उद्योग के लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है, क्योंकि चाय बागानों में उत्पादन एवं प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के लिए निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता होती है। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से इन बागानों में ऊर्जा लागत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़