पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मासिमपुर में ‘कर्तव्य से विकास’ कार्यक्रम का आयोजन

मासिमपुर, 21 सितंबर 2026: पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मासिमपुर में प्राचार्य डॉ. हरपाल सिंह के नेतृत्व में 21 सितंबर 2026 को ‘कर्तव्य से विकास’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में कर्तव्यबोध, सामाजिक संवेदनशीलता तथा समानता की भावना विकसित करना और शिक्षकों को दृष्टिबाधित एवं अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शिक्षा के महत्व, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति प्रत्येक व्यक्ति के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़े और सभी बच्चों को समान अवसर प्राप्त हों। विद्यार्थियों को दूसरों के प्रति सम्मान, सहयोग, सहानुभूति तथा भेदभावरहित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर शिक्षकों के लिए ‘विद्या सृष्टि’ कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष सत्र का आयोजन भी किया गया। इस सत्र में दृष्टिबाधित एवं दृष्टि से संबंधित कठिनाइयों वाले बच्चों को प्रभावी ढंग से पढ़ाने के तरीकों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। शिक्षकों को समझाया गया कि विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए।

सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की बाधा या भेदभाव का सामना न करना पड़े। उन्हें कक्षा में अन्य विद्यार्थियों के समान सम्मान, सहभागिता और अवसर मिलना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत क्षमताओं एवं आवश्यकताओं को समझकर उनके लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया।

वक्ताओं ने समावेशी शिक्षा की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए बताया कि विद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह ऐसा स्थान भी है, जहाँ प्रत्येक बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और प्रतिभा का विकास होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने का अवसर मिले। शिक्षकों की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, सहयोग और समानता के संस्कार विकसित कर सकते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में डॉ. मिठुन रॉय, मिस मोमिता, गायत्री वैष्णव तथा वृतिमोय दास ने सहभागिता की। उन्होंने अपने विचारों एवं अनुभवों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य केवल सभी बच्चों को एक ही कक्षा में पढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को सीखने, भाग लेने और अपनी क्षमता विकसित करने का वास्तविक अवसर प्रदान करना है।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद, सहयोगात्मक शिक्षण तथा कक्षा में समान भागीदारी सुनिश्चित करने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझा। इस प्रकार के प्रशिक्षण सत्र शिक्षकों को अपनी शिक्षण-पद्धतियों को अधिक प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने में सहायता करते हैं।

प्राचार्य डॉ. हरपाल सिंह ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यालय का दायित्व है कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी वातावरण प्रदान किया जाए। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन संवेदनशीलता, समर्पण और समानता की भावना के साथ करें।

‘कर्तव्य से विकास’ कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह संदेश दिया कि समाज की प्रगति केवल भौतिक विकास से नहीं, बल्कि समान अवसर, मानवीय गरिमा और समावेशी सोच से सुनिश्चित होती है। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय मासिमपुर में आयोजित यह कार्यक्रम विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा विद्यालय में समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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