निहार कांति राय उधारबंद, 23 सितंबर। आदिवासी चाय जनजाति समाज का प्रमुख पर्व करम पूजा मंगलवार को खासपुर खेल मैदान में श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया गया। करम पूजा एवं सम्मेलन में विभिन्न चाय बागानों से करीब पांच हजार लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उधारबंद के विधायक तथा बराक चाय श्रमिक यूनियन के महासचिव राजदीप ग्वाला ने प्रकृति संरक्षण और आदिवासी समाज की कृष्टि, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।
विधायक राजदीप ग्वाला ने कहा, “करम केवल पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति का उत्सव है। प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना इस पर्व का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में करम पर्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह पूजा-अर्चना एवं यज्ञ के साथ हुआ। इसके बाद करम बाबा की जयघोष के बीच विभिन्न चाय बागानों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। पूरे दिन सम्मेलन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
अपने संबोधन में विधायक ने चाय बागानों में लोकप्रिय झूमर नृत्य को व्यापक मंच प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके बाद डलू चाय बागान के कलाकारों ने झूमर नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। कलाकारों के साथ विधायक राजदीप ग्वाला तथा अन्य अतिथियों ने भी नृत्य में भाग लिया, जिससे उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में सुरेश बड़ाइक ने करम पूजा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि सम्मेलन के अध्यक्ष विशुद्धतानंद महतो ने करम सम्मेलन के प्रारंभ और उसके इतिहास के संबंध में जानकारी दी। पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का भी वितरण किया गया।
समारोह में विभिन्न चाय बागानों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।
इसके अलावा लारसिंग, नागाडुम और दयापुर में भी करम पूजा का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कुल मिलाकर, खासपुर का करम सम्मेलन आदिवासी चाय जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश देने वाला मंच बनकर उभरा।