रेशम क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए असम कृषि विश्वविद्यालय और केंद्रीय रेशम बोर्ड ने मिलाया हाथ

जोरहाट: असम कृषि विश्वविद्यालय (एएयू), जोरहाट और वस्त्र मंत्रालय के अधीन केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) ने असम कृषि विश्वविद्यालय के रेशम उत्पादन महाविद्यालय में नेक्स्ट जेनरेशन सिल्क इनोवेशन नेटवर्क (एनजीएसआईएन) इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

केंद्रीय रेशम बोर्ड के ७७वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और सीएसबी के सदस्य सचिव पी. शिवकुमार की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर असम कृषि विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व रेशम उत्पादन महाविद्यालय के विशेष कार्य अधिकारी डॉ. उत्पल कोटकी और एनजीएसआईएन कार्यक्रम की नोडल अधिकारी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. मानसी हजारिका अहमद ने किया।

प्रस्तावित इनक्यूबेशन सेंटर का उद्देश्य रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। यह केंद्र रेशम उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों से संबंधित नई तकनीकों तथा नवाचारों के विकास और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

इस सहयोग से प्रौद्योगिकी आधारित विकास को बढ़ावा देने और रेशम क्षेत्र में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ असम के रेशम उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है।

यह पहल असम कृषि विश्वविद्यालय और केंद्रीय रेशम बोर्ड के बीच पहले से जारी अनुसंधान सहयोग को भी आगे बढ़ाएगी। वर्तमान में असम कृषि विश्वविद्यालय में केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा समर्थित कई परियोजनाएं संचालित हैं, जिनमें टिकाऊ रेशम संबंधी प्रौद्योगिकियों और मूगा रेशम की विरासत से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं।

असम कृषि विश्वविद्यालय के रेशम उत्पादन महाविद्यालय में एनजीएसआईएन इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, यह केंद्र असम की पारंपरिक और उभरती रेशम मूल्य शृंखलाओं में नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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