हाइलाकांदी:शिलचर पौर निगम चुनाव को लेकर कुछ उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि नामांकन के समय उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों में दर्ज शैक्षणिक योग्यता तथा संबंधित विश्वविद्यालयों के संबंध में उपलब्ध जानकारी में कई मामलों में विसंगतियां दिखाई दे रही हैं। इन कथित विसंगतियों को लेकर अब अनियमितता और प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि नामांकन की प्रारंभिक स्क्रूटिनी के दौरान उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और संबंधित विश्वविद्यालयों की मान्यता एवं वैधता की जांच किस स्तर तक की गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
बताया गया है कि चुनावी नियमों के तहत सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक तथा एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए उच्च माध्यमिक उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसी संदर्भ में कुछ उम्मीदवारों के हलफनामों में दर्ज शैक्षणिक विवरण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
वार्ड संख्या 25 की उम्मीदवार पर सवाल
वार्ड संख्या 25 की अगप उम्मीदवार शेली बेगम मजूमदार ने अपने हलफनामे में अपनी उम्र 37 वर्ष दर्ज की है। हलफनामे में उनके जन्म वर्ष के आधार पर वर्ष 1989 का उल्लेख माना जा रहा है। वहीं, शैक्षणिक योग्यता में उन्होंने वर्ष 2001 में माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने की जानकारी दी है। इस आधार पर उनकी माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने की उम्र लगभग 12 वर्ष बैठती है।
इसके अलावा, उन्होंने वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ स्थित आईएसबीएम यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने का उल्लेख किया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि संबंधित विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो हलफनामे में दर्ज शैक्षणिक विवरण और विश्वविद्यालय के स्थापना-वर्ष के बीच गंभीर विसंगति सामने आती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्राधिकारियों से होना अभी बाकी है।
वार्ड संख्या 6 के भाजपा उम्मीदवार की डिग्री पर भी सवाल
वार्ड संख्या 6 के भाजपा उम्मीदवार कांचन देव की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनके हलफनामे में उम्र 39 वर्ष दर्ज है और जन्म वर्ष 1987 बताया गया है। उन्होंने वर्ष 2007 में माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा वर्ष 2018 में सिक्किम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल करने का उल्लेख किया है।
आरोप है कि संबंधित विश्वविद्यालय की स्थापना सिक्किम में वर्ष 2021 में हुई थी। साथ ही, वर्ष 2025 में सिक्किम सरकार द्वारा संस्थान को बंद किए जाने का भी दावा किया गया है। ऐसे में वर्ष 2018 में वहां से डिग्री प्राप्त करने संबंधी जानकारी को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।
विनायक मिशन सिक्किम यूनिवर्सिटी को लेकर भी सवाल
वार्ड संख्या 17 के अगप उम्मीदवार आताउर रहमान लस्कर ने अपने हलफनामे में वर्ष 2007 में माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने और वर्ष 2018 में विनायक मिशन सिक्किम यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने का उल्लेख किया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि उक्त संस्थान की मान्यता वर्ष 2014 में ही रद्द कर दी गई थी और इसके बाद वहां नए विद्यार्थियों के दाखिले नहीं हुए थे।
इसी प्रकार वार्ड संख्या 21 की भाजपा उम्मीदवार सुमना दास ने वर्ष 1993 में माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा वर्ष 2018 में इसी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने का दावा अपने हलफनामे में किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय की मान्यता वर्ष 2014 में रद्द कर दी गई थी। साथ ही वर्ष 2020 में दूसरे नाम से संस्थान को पुनः शुरू किए जाने का भी दावा किया जा रहा है। इन दावों की भी आधिकारिक जांच आवश्यक बताई जा रही है।
जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की डिग्री पर भी उठे सवाल
वार्ड संख्या 15 की भाजपा उम्मीदवार पाप्ली कर्मकार ने हलफनामे में अपनी उम्र 52 वर्ष दर्ज की है। उन्होंने वर्ष 1997 में माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा वर्ष 2013 में जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल करने का उल्लेख किया है।
आरोप है कि फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जाने से संबंधित मामले के चलते वर्ष 2025 में राजस्थान सरकार द्वारा विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द की गई थी। साथ ही वर्ष 2009 के बाद विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए कुछ प्रमाणपत्रों को अवैध घोषित किए जाने का भी दावा किया गया है। यदि ये दावे सही हैं तो संबंधित उम्मीदवार की डिग्री की वैधता की जांच का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है।
वार्ड 16 के उम्मीदवार के हलफनामे में माध्यमिक योग्यता का उल्लेख नहीं
वार्ड संख्या 16 के अगप उम्मीदवार मिया खान के हलफनामे को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि उन्होंने माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक योग्यता का कोई विवरण दर्ज नहीं किया है। हलफनामे में सीधे वर्ष 2022 में झारखंड स्थित कैपिटल यूनिवर्सिटी से स्नातक उत्तीर्ण होने का उल्लेख किया गया है।
हलफनामे में दर्ज जन्म संबंधी जानकारी के आधार पर उनकी उम्र उस समय लगभग 45 वर्ष थी। हालांकि, अधिक उम्र में स्नातक की डिग्री हासिल करना अपने आप में कोई अनियमितता नहीं है। सवाल मुख्य रूप से इस बात को लेकर उठाया जा रहा है कि नामांकन दस्तावेजों में निर्धारित शैक्षणिक विवरण और प्रमाणपत्रों की जानकारी पूरी तरह दर्ज की गई थी या नहीं।
स्क्रूटिनी में मंजूरी मिलने के बावजूद उठे सवाल
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जिन उम्मीदवारों के शैक्षणिक विवरण को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं, उनके नामांकन को प्रारंभिक स्क्रूटिनी के दौरान किस आधार पर वैध माना गया। क्या नामांकन जांच के समय संबंधित विश्वविद्यालयों की मान्यता, स्थापना-वर्ष और उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्रों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया गया था—यह स्पष्ट होना अभी बाकी है।
अब पूरे मामले में चुनावी प्राधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित उम्मीदवारों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई का प्रश्न भी सामने आ सकता है। वहीं, यदि आरोप तथ्यहीन साबित होते हैं तो संबंधित उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और चुनावी पात्रता को लेकर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
जांच से ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई
शिलचर पौर निगम चुनाव में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े इन आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपरोक्त सभी बातें आरोपों और उपलब्ध दावों पर आधारित हैं तथा संबंधित उम्मीदवारों या सक्षम प्राधिकारियों की अंतिम पुष्टि/प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
ऐसे में अब मुख्य सवाल यही है कि क्या निर्वाचन प्राधिकार इन सभी मामलों की दस्तावेजी जांच करेगा? क्या संबंधित विश्वविद्यालयों से उम्मीदवारों की डिग्रियों का सत्यापन कराया जाएगा? और यदि किसी उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता संबंधी जानकारी गलत पाई जाती है, तो चुनावी नियमों के तहत उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
शिलचर पौर निगम के भावी पार्षद शहर के प्रशासन और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेंगे। इसलिए उम्मीदवारों की पात्रता और उनके द्वारा दाखिल हलफनामों की सत्यता को लेकर उठे सवालों का समय रहते आधिकारिक और पारदर्शी तरीके से समाधान होना आवश्यक माना जा रहा है।