एनआरएल पहले रिफाइनरी विस्तार को देगा प्राथमिकता, पॉलीप्रोपाइलीन इकाई बाद में

नुमालीगढ़: नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) प्रस्तावित पॉलीप्रोपाइलीन इकाई पर आगे बढ़ने से पहले अपने रिफाइनरी विस्तार परियोजना को प्राथमिकता देगा। एनआरएल के अध्यक्ष रंजीत रथ ने शुक्रवार को गुवाहाटी में यह जानकारी दी।

कंपनी की ३३वीं वार्षिक आम बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रथ ने कहा कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी विस्तार परियोजना (एनआरईपी) एनआरएल की तत्काल प्राथमिकता बनी रहेगी। रिफाइनरी विस्तार पूरा होने के बाद ही पॉलीप्रोपाइलीन इकाई पर आगे काम किया जाएगा।

एनआरईपी में अब तक ८७.१ प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। परियोजना के तहत ६ मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाली एक नई समानांतर रिफाइनरी स्थापित की जा रही है। इसके पूरा होने के बाद एनआरएल की कच्चे तेल के प्रसंस्करण की कुल क्षमता मौजूदा ३ मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर ९ मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी।

परियोजना में ओडिशा के पारादीप से नुमालीगढ़ तक आयातित कच्चा तेल पहुंचाने के लिए १,३९८ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन तथा नुमालीगढ़ से सिलीगुड़ी तक पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए ६५४ किलोमीटर लंबी उत्पाद पाइपलाइन भी शामिल है।

विभिन्न प्रक्रियागत मंजूरियों और वित्तीय व्यवस्थाओं में देरी के कारण विस्तार परियोजना की निर्धारित समयसीमा प्रभावित हुई थी। परियोजना को पहले दिसंबर २०२५ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

रथ ने कहा, “एनआरएल सतत विकास, नवाचार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है।”

रथ ने बताया कि एनआरएल का बांस आधारित जैव-एथेनॉल संयंत्र अभी तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं कर पाया है और बांस की खरीद फिलहाल रोक दी गई है।

जैव-एथेनॉल संयंत्र की स्थापना असम बायो एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड ने की है, जो एनआरएल और फिनलैंड की फोर्टम तथा केम्पोलिस ओय के बीच संयुक्त उपक्रम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष सितंबर में गोलाघाट में इस संयंत्र का उद्घाटन किया था। इसी अवसर पर उसी स्थल पर प्रस्तावित पॉलीप्रोपाइलीन इकाई की आधारशिला भी रखी गई थी।

बांस के जैव-द्रव्यमान से एथेनॉल उत्पादन के उद्देश्य से विकसित इस परियोजना को भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना बताया गया था। असम समझौते के तहत स्थापित यह संयंत्र देश की सबसे बड़ी द्वितीय पीढ़ी (सेकंड-जेनरेशन) एथेनॉल परियोजनाओं में से एक माना जाता है।

उद्घाटन के बाद जल्द उत्पादन शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन इस वर्ष की शुरुआत में आई रिपोर्टों के अनुसार संयंत्र उत्पादन शुरू करने के लिए आवश्यक तकनीकी सफलता हासिल नहीं कर सका।

जैव-रिफाइनरी का निर्माण २०१८ में लगभग ८०० करोड़ रुपये की प्रारंभिक लागत से शुरू हुआ था और इसे करीब चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। बाद में परियोजना की लागत बढ़ाकर ४,२०० करोड़ रुपये की गई और उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य मार्च २०२५ रखा गया। इसके बाद अनुमानित लागत बढ़कर करीब ५,००० करोड़ रुपये हो गई।

उत्पादन शुरू होने के बाद परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से १,००० से १,५०० रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

इस बीच, वित्त वर्ष २०२५-२६ में एनआरएल के वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। रथ के अनुसार, कंपनी की स्टैंडअलोन निवल संपत्ति १७.६९ प्रतिशत बढ़कर १८,९१२ करोड़ रुपये हो गई। वहीं, कर पश्चात लाभ में ९० प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

परिचालन से प्राप्त राजस्व बढ़कर २६,३९३ करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में २५,१४७ करोड़ रुपये था।

स्टैंडअलोन कर पूर्व लाभ ४,०७७ करोड़ रुपये रहा, जबकि कर पश्चात लाभ बढ़कर ३,०५७ करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष २०२४-२५ की तुलना में इसमें ९० प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

प्रति शेयर आय भी पिछले वर्ष के ९.८२ रुपये से बढ़कर १७.५२ रुपये हो गई।

रथ ने कहा कि लाभ में वृद्धि मुख्य रूप से बेहतर उत्पाद मार्जिन और वर्ष के दौरान बिक्री मात्रा में बढ़ोतरी के कारण हुई।

वित्त वर्ष २०२५-२६ के दौरान रिफाइनरी ने ३,११३ हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया और अपनी निर्धारित क्षमता के १०३ प्रतिशत पर परिचालन किया। कुल बिक्री मात्रा ३,२०० टीएमटी रही।

मोटर स्पिरिट (एमएस) का उत्पादन ७२७ टीएमटी तक पहुंच गया, जो पिछले ७२५ टीएमटी के सर्वकालिक उच्च स्तर से अधिक है। सल्फर रिकवरी भी रिकॉर्ड ६.३ टीएमटी रही, जबकि इससे पहले का उच्च स्तर ५.६ टीएमटी था।

रथ ने बताया कि एनआरईपी के चालू होने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों की निकासी को सुगम बनाने के लिए सिलीगुड़ी मार्केटिंग टर्मिनल का भी विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।

रथ, जो ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं, ने कहा कि एनआरएल की विकास यात्रा को ३ दिसंबर २०२५ को मिनीरत्न श्रेणी-एक से बढ़ाकर नवरत्न का दर्जा दिए जाने से भी मान्यता मिली है।

उन्होंने कंपनी के ‘आइडिएशन’ कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम के तहत संभावनाशील स्टार्टअप को सहयोग और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

रथ ने कहा, “इन पहलों के माध्यम से कंपनी नवाचार के एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकियों और उद्यमशील अवसरों के विकास में योगदान देने का प्रयास कर रही है।”

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