कृषि छात्रों ने खट्टे एवं बागान फसल अनुसंधान केंद्र का किया शैक्षणिक भ्रमण

तिनसुकिया: अरुणाचल प्रदेश के नामसाई स्थित अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज के कृषि संकाय के चतुर्थ वर्ष के कुल ३५ विद्यार्थियों ने ३ सितंबर को असम कृषि विश्वविद्यालय के खट्टे एवं बागान फसल अनुसंधान केंद्र, तिनसुकिया का शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण विद्यार्थियों को कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राज कुमार काकोटी के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को केंद्र की उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों और कार्यक्षेत्र के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह केंद्र असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट के अंतर्गत खट्टे फलों से संबंधित अनुसंधान के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां खट्टे फलों के आनुवंशिक संसाधनों के संग्रह, संरक्षण और उपयोग पर विशेष जोर दिया जाता है।

डॉ. काकोटी ने बताया कि केंद्र के क्षेत्रीय जीन बैंक में खट्टे फलों की लगभग १५० आनुवंशिक संसाधन प्रविष्टियां संरक्षित की जा रही हैं। उन्होंने बागवानी, पादप रोग विज्ञान, कीट विज्ञान और मृदा विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे बहुविषयक अनुसंधान की भी जानकारी विद्यार्थियों को दी।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने आणविक प्रयोगशाला, पादप रोग विज्ञान प्रयोगशाला, कीट विज्ञान प्रयोगशाला और मृदा विज्ञान सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने पौधशाला उत्पादन इकाई और प्रयोगात्मक खेतों का भी भ्रमण किया।

पादप रोग विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ. मनुज गोगोई ने खट्टे फलों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री तैयार करने में रोपण सामग्री की आणविक जांच के महत्व को समझाया। उन्होंने खट्टे फलों की खेती से जुड़े विभिन्न रोग संबंधी पहलुओं और रोग प्रबंधन के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी।

इस दौरान प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिजित कुमार साउद, डॉ. नीलिम कलिता, डॉ. प्रियंका बरबरुआ और डॉ. जाह्नबी हजारिका ने विद्यार्थियों को केंद्र में चल रही विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों से अवगत कराया।

अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज, नामसाई की संकाय सदस्य डॉ. परबीन हुंडा बरुआ ने शैक्षणिक भ्रमण के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक अनुभव आधुनिक कृषि अनुसंधान और तकनीकों को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को खट्टे फलों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के उत्पादन, आणविक जांच, कीट एवं रोग प्रबंधन, मृदा विज्ञान तथा खेत आधारित अनुसंधान गतिविधियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

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