कंश का कैदी. – मुरारी केडिया
साधारणतया कारागार की सजा होती है,अपराधी को, अपराध प्रमाणित हो जाने पर ही.किंतु अजब है,गजब की हमारी दुनिया.
जिसका वध किया उसने ही अपराधी को अपराध करने के पहले ही, अपराध के जुर्म में कारागार में डाल दिया. वो भी तब, जब अपराधी का दुनिया में कोई अस्तित्व ही नहीं था.
यह हालत थी राजा कंश की,जिसे अपनी मौत का डर हमेशा सताते रहता था,वो जानता था कि उसके पापों का घड़ा लबालब भर चुका है और न जाने उसका अपराधी कब,कहां और कैसे उसको उसके पापों सहित स्वाहा कर दे.
जब अंश बने तो कारागार में,जन्म लिया कारागार में,तोड़ चले कारागार को,मां यमुना ने राह दी और कंश का अपराधी फुर्र.
देवकी जाया बन गया,यशुमती मैया का लाल.देश दुनिया हो गई निहाल, हमारे आराध्य और कंश का संहारक आ पहुंचा धरा को पाप मुक्त कर,धर्म ध्वजा फहराने.
यदा यदा ही धर्मस्य
ग्लानि भवती भारत: ……
बोल देवकीनंदन की जै,
नंद घर आनंद भयो
जै कन्हैया लाल की.
कंश के अपराधी की जै,
दुनिया के पालनहार की जै.