शिलचर से श्रीभूमि आवागमन की प्रमुख सड़क गड्ढों में तब्दील, स्थानीय लोगों में नाराजगी
शिलचर, 4 सितंबर। शिलचर से श्रीभूमि के बीच आवागमन के लिए महत्वपूर्ण रामनगर आईएसबीटी क्षेत्र की लंबी सड़क इन दिनों बदहाली की तस्वीर बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने से यह मार्ग तालाब का रूप ले चुका है और लोगों का सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो गया है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक और राहगीर दुर्घटना के जोखिम का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत की मांग को लेकर कई बार आवाज उठाने और विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सड़क सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद रामनगर आईएसबीटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की सड़क की सुध नहीं ली जा रही है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब यह मार्ग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन का माध्यम है, तो इसकी बदहाली दूर करने के लिए प्रशासन तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
बराक घाटी के विकास को लेकर भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ब्रह्मपुत्र घाटी की तुलना में बराक घाटी आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के मामले में पीछे है। इसके बावजूद विधानसभा से लेकर प्रशासनिक स्तर तक बराक की समस्याओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती।
लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के मुद्दे जोर-शोर से उठाए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही सड़क, जलजमाव, यातायात और अन्य बुनियादी समस्याएं फिर हाशिए पर चली जाती हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल है कि वे विधानसभा और सरकार के समक्ष बराक घाटी की ऐसी समस्याओं को मजबूती से क्यों नहीं उठा रहे हैं।
रामनगर आईएसबीटी की जर्जर सड़क अब केवल एक सड़क की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह बराक घाटी के प्रति सरकारी उदासीनता को लेकर उठ रहे व्यापक सवालों का प्रतीक बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है—“क्या बराक के लोग राज्य से बाहर हैं?” अब इसका जवाब जनता को सरकार और प्रशासन से चाहिए।