श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विहिप का 62वां स्थापना दिवस, हिंदू समाज को संगठित करने का संकल्प

शिलचर, 4 सितंबर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अपने स्थापना के 62 वर्ष पूर्ण होने पर हिंदू समाज को संगठित, समरस और सशक्त बनाने का संकल्प दोहराया। विहिप की स्थापना वर्ष 1964 में मुंबई के पवई स्थित स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में संत-महात्माओं और देश के प्रमुख मनीषियों की उपस्थिति में हुई थी।

विहिप के अनुसार, संगठन का उद्देश्य हिंदू जीवन-मूल्यों एवं परंपराओं की पुनर्प्रतिष्ठा, समाज में समरसता, सेवा कार्यों का विस्तार तथा देश-विदेश में हिंदू समाज को संगठित करना रहा है। 1966 में प्रयागराज महाकुंभ में प्रथम विश्व हिंदू सम्मेलन और 1969 में उडुपी हिंदू सम्मेलन को संगठन की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया। उडुपी सम्मेलन में संतों ने अस्पृश्यता को शास्त्रविरुद्ध बताते हुए सामाजिक समानता का संदेश दिया था।

विहिप ने वनवासी एवं अभावग्रस्त क्षेत्रों में शिक्षा, चिकित्सा और छात्रावास सहित विभिन्न सेवा प्रकल्प चलाने, गोरक्षा, धर्मांतरण के विरुद्ध जागरण तथा मंदिर-मठ, तीर्थ और संस्कृत की पुनर्प्रतिष्ठा के लिए किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। 1983 की एकात्मता यात्रा तथा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को भी संगठन की प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया।

विहिप ने कहा कि हिंदू समाज के सामने आज भी घुसपैठ, आतंकवाद, धर्मांतरण, नशाखोरी, सामाजिक असंतुलन, संस्कारों के क्षरण और गोरक्षा सहित अनेक चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए गांव-गांव तक संगठन का विस्तार करते हुए लाखों कार्यकर्ताओं को तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विहिप ने अपने स्थापना दिवस पर “संगठित, सक्रिय, जागरूक और श्रद्धालु हिंदू समाज” के निर्माण को अपना लक्ष्य बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सतत परिश्रम और प्रभु श्रीराम की कृपा से यह लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।

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