तिनसुकिया के रुणगागोरा और दिनजान चाय बागानों पर मंडरा रहा ब्रह्मपुत्र कटाव का खतरा

तिनसुकिया: असम के ऊपरी क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक धाराओं का बढ़ता कटाव चाय बागानों, श्रमिक बस्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। तिनसुकिया जिले के रुणगागोरा और दिनजान चाय बागान भी लगातार हो रहे नदी कटाव की चपेट में हैं।

स्थिति का जायजा लेने के लिए माकुम के विधायक संजय किशन ने बुधवार दोपहर दोनों चाय बागानों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ और नदी तट के कटाव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा जल संसाधन विभाग, माकुम उपमंडल प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया।

विधायक संजय किशन ने कहा कि कटाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। इससे केवल चाय बागान की भूमि को नुकसान नहीं पहुंच रहा, बल्कि श्रमिकों और स्थानीय निवासियों के जीवन तथा आजीविका पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

रुणगागोरा और दिनजान चाय बागान ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक धाराओं से लंबे समय से हो रहे कटाव का सामना कर रहे हैं। लगातार नदी तट के क्षरण के कारण बागान की भूमि का नुकसान हुआ है और अब इन बागानों के आवासीय क्षेत्रों तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

विधायक ने संबंधित विभागों से कटाव रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने और प्रभावित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि केवल अस्थायी राहत उपाय पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि बार-बार होने वाले नदी कटाव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी काम करना होगा।

तिनसुकिया और पड़ोसी डिब्रूगढ़ जिले के कई हिस्से व्यापक नदी कटाव संकट से प्रभावित हैं। अप्रैल २०२६ में ब्रह्मपुत्र की डांगरी धारा के कटाव के कारण दिगलतरंग चाय बागान की ३५.४८ हेक्टेयर भूमि नष्ट हो गई थी। इससे लगभग १,४०० परिवारों और बागान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा मंडराने लगा था।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के लगातार बदलते प्रवाह ने ऊपरी असम के भू-दृश्य को प्रभावित किया है। इसके चलते चाय बागान और नदी किनारे रहने वाले समुदाय बार-बार भूमि और संपत्ति के नुकसान के खतरे का सामना कर रहे हैं।

राज्य के जलवायु-सुदृढ़ ब्रह्मपुत्र बाढ़ एवं कटाव प्रबंधन कार्यक्रम में तिनसुकिया-डिब्रूगढ़ के लिए एक अलग उप-परियोजना भी शामिल है। यह क्षेत्र में नदी तट कटाव की गंभीरता और इसकी लगातार बनी हुई समस्या को दर्शाता है।

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