कुमारभास्करवर्म संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय के सर्वदर्शन विभाग द्वारा 108-व्याख्यानमाला का इक्कीसवाँ व्याख्यान सम्पन्न

दिनांक: 02/09/2026, नलबाड़ी, असम

आज कुमारभास्करवर्म संस्कृत एवं पुरातनाध्ययन विश्वविद्यालय के सर्वदर्शन विभाग तथा सर्वदर्शन मंथन परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 108-व्याख्यानमाला के अंतर्गत इक्कीसवाँ (21वाँ) व्याख्यान श्रीश्री महापुरुष माधवदेव की पावन तिरोभाव-तिथि के अवसर पर अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण से हुआ। सर्वदर्शन विभाग की प्रतिभाशाली छात्रा सुश्री सुमी दास ने मधुर स्वर में मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् सर्वदर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रणजीत कुमार तिवारी ने उपस्थित विद्वानों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए व्याख्यान के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। तत्पश्चात् विभाग की शोधार्थी तपस्विनी कुमारी ने असम की भक्ति-परम्परा की अमूल्य धरोहर ‘बरगीत’ का सुमधुर गायन प्रस्तुत किया, जिससे सम्पूर्ण सभागार भक्तिरस से सराबोर हो उठा।

इस व्याख्यान का मुख्य विषय “श्रीश्री माधवदेव का जीवन-दर्शन” था। इस विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिन्दू महासंघ समिति के अध्यक्ष तथा श्री दक्षिणपाट गृहाश्रमी सत्र के सत्राधिकार परमपूज्य श्री जनार्दनदेव गोस्वामी ने अपना ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने महापुरुष माधवदेव के त्यागमय जीवन, उनके भक्ति-दर्शन, समाज-सुधार संबंधी विचारों तथा असमिया साहित्य एवं संस्कृति के प्रति उनके अतुलनीय योगदान का विस्तृत विवेचन किया।

इस गरिमामय कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की समकुलपति आदरणीया आचार्या मल्लिका कलिता विशेष रूप से उपस्थित रहीं और अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त, साहित्य-विभाग के अध्यक्ष, प्रो रातुल बुजरबरुवा, सर्वदर्शन विभाग की प्राध्यापिका डॉ. उमामहेश्वरी बी., दर्शन विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास भार्गव शर्मा, ज्योतिष विभाग के आचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र तथा अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल एवं सुव्यवस्थित संचालन सर्वदर्शन विभाग के शोधार्थी श्री लिराज काफ्ले ने किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सर्वदर्शन विभाग की अतिथि अध्यापिका सुश्री मयूरी बरकाकती ने सभी गुरुओं, वक्ताओं एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके उपरान्त उन्होंने विश्वकल्याण की भावना से मंगलमय कल्याण-मंत्र का पाठ कराया, जिसके साथ यह ऐतिहासिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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