एएयू ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

[साझेदारी से गुणवत्तापूर्ण शोध, प्रशिक्षण और आलू मूल्य शृंखला के विकास को मिलेगा बढ़ावा]

जोरहाट: गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, प्रशिक्षण, सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने तथा आलू के लिए एक प्रभावी मूल्य शृंखला विकसित करने के उद्देश्य से असम कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

लिमा, पेरू स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र एक वैश्विक अनुसंधान संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष १९७१ में आलू, शकरकंद और एंडियन मूल की फसलों के माध्यम से गरीबी कम करने तथा खाद्य सुरक्षा में सुधार के उद्देश्य से की गई थी।

एएयू के कुलसचिव दामोदर बरमन ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिप्योति राजखोवा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में २३ अगस्त को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सीआईपी-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (सीआईपी-एनएआरएस) साझेदारी पहल के तहत किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से असम के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में आलू के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

बरमन ने बताया कि यह सहयोग क्षेत्र में आलू की खेती को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित होगा। इनमें कम उत्पादकता, गुणवत्तापूर्ण बीज की कमी, सीमित मशीनीकरण, कीट एवं रोगों का प्रकोप, अपर्याप्त शीत भंडारण सुविधाएं तथा मूल्य शृंखला के विकास में मौजूद कमियां प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि साझेदारी के माध्यम से बीज, भंडारण, कीट प्रबंधन और बाजार से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ अनुसंधान के नए अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

इस अवसर पर एएयू के कुलपति डॉ. दिप्योति राजखोवा ने समावेशी आलू उत्पादन, बेहतर फसलोत्तर एवं प्रसंस्करण सुविधाओं, मूल्य संवर्धन और मजबूत बाजार संपर्क की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी क्षेत्र के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए आलू अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने के नए अवसर भी खोलेगी।

हस्ताक्षर समारोह में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, पेरू के महानिदेशक डॉ. साइमन हेक, सीआईपी-पेरू के डॉ. के. एम. बुजर्बारुआ, असम कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ह्यूगो कैम्पोस, सीआईपी-पेरू के डीडीजी डॉ. एस. सिंह, सीएसएआरसी के निदेशक एवं दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. देवेश चतुर्वेदी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. मिनल सैकिया तथा एएयू के पूर्व कुलपति डॉ. मृणाल चटर्जी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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