डिहिंग पटकाई तितली ट्रेल में १६५ प्रजातियां दर्ज, ३७ संकटग्रस्त

डिब्रूगढ़: असम के डिहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित चौथे डिहिंग पटकाई जैव विविधता एवं तितली ट्रेल के दौरान कुल १६५ तितली प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें ३७ संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं। इस सर्वेक्षण ने वर्षावन क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व को एक बार फिर उजागर किया है।

चार दिवसीय यह ट्रेल २८ से ३१ जुलाई, २०२६ तक आयोजित किया गया। इसके तहत जयपुर, लखीपाथर और सोराईपुंग रेंज के अलावा पड़ोसी अरुणाचल प्रदेश के देवमाली क्षेत्र में भी सर्वेक्षण किया गया। इस पहल का उद्देश्य जैव विविधता का दस्तावेजीकरण, पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना था।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सर्वेक्षण के निष्कर्ष साझा करते हुए डिहिंग पटकाई को राज्य की समृद्ध जैव विविधता के लिए एक “सुरक्षित आश्रय” बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण के प्रयासों से ऐसा अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार हो रहा है, जहां दुर्लभ प्रजातियां फल-फूल सकती हैं।

सर्वेक्षण के दौरान १६५ तितली प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिनमें ३७ प्रजातियों को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। विभिन्न सर्वेक्षण स्थलों से प्राप्त अवलोकनों को एक साथ जोड़ने पर ट्रेल के दौरान दर्ज तितली प्रजातियों की कुल संख्या २६० से अधिक रही, जो क्षेत्र की असाधारण जैव विविधता को दर्शाती है।

डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में फैला डिहिंग पटकाई पारिस्थितिकी तंत्र असम के महत्वपूर्ण वर्षावन क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र २०० से अधिक तितली प्रजातियों और २०० से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। वर्ष २०२१ में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था।

इससे पहले किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों में भी डिहिंग पटकाई की समृद्ध तितली विविधता सामने आई है। सोराईपुंग रेंज में किए गए एक अध्ययन में ५ परिवारों से संबंधित ९२ तितली प्रजातियों की पहचान की गई थी। इनमें १३ प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न अनुसूचियों के तहत संरक्षित थीं, जबकि ११ प्रजातियां पूर्वी हिमालयी क्षेत्र तक सीमित पाई गई थीं।

नवीनतम ट्रेल में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों और संरक्षणवादियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को तितलियों की पहचान, जैव विविधता के दस्तावेजीकरण और वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में कीटों की भूमिका के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष डिहिंग पटकाई के अनूठे वर्षावन आवास और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए निरंतर जैव विविधता सर्वेक्षण तथा दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़

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