पीएम विश्वकर्मा कारीगरों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग का प्रशिक्षण

शिलचर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 114 से अधिक लाभार्थियों ने लिया हिस्सा

शिलचर, 24 अगस्त। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के शाखा एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय, सिलचर की ओर से जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र (डीआईसीसी), काछार तथा वारकस ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन, सिलचर के सहयोग से सोमवार को गांधी भवन में पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में शाखा एमएसएमई-डीएफओ, शिलचर के सहायक निदेशक ग्रेड-1 सुमित गुंडय्या ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को संस्थागत सहायता, कौशल विकास तथा बाजार तक पहुंच के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन और आजीविका में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

डीआईसीसी, काछार के दीपायन बोस ने पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को असम सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं पहलों की जानकारी दी और बताया कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपने उद्यमों का विस्तार कर सकते हैं।

एनआईटी शिलचर के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्य नंदन मिश्रा ने उद्यमिता विकास, उत्पादों की कीमत निर्धारित करने की रणनीति, बाजार के रुझानों को समझने तथा व्यवसाय प्रबंधन के वित्तीय और डिजिटल पहलुओं पर कारीगरों का मार्गदर्शन किया।

असम विश्वविद्यालय, शिलचर की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीलांजना चक्रवर्ती ने पीएम विश्वकर्मा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए उपलब्ध निर्यात अवसरों और आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

एसएलपीएमयू के लीड रानू कुमार सिंह ने उत्पाद डिजाइन, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि उभरती तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल कर कारीगर अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रस्तुति बेहतर करने के साथ-साथ नए बाजारों तक पहुंच बना सकते हैं।

कार्यक्रम में 114 से अधिक पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग, उद्यमिता, डिजिटल टूल्स, निर्यात के अवसरों तथा नई तकनीकों के उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाना है।

कार्यक्रम के समापन पर शाखा एमएसएमई-डीएफओ, शिलचर के सहायक निदेशक स्वप्निल विलासराव देशमुख ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले विशेषज्ञों, लाभार्थियों और सभी संबंधित हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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