2025 की बाढ़ मुआवज़े से वंचित 71 परिवार! काठीघोड़ा रंगपुर के बाढ़ पीड़ितों में भारी आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग

शमीन्द्र पाल, काठीघोड़ा, 7 अगस्त : वर्ष 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे असम के काछार जिले के काठीघोड़ा राजस्व सर्कल अंतर्गत निश्चिंतपुर ग्राम पंचायत के रंगपुर क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया था। लेकिन बाढ़ के एक वर्ष बाद भी राहत की उम्मीद लगाए बैठे 71 पीड़ित परिवार आज तक सरकारी मुआवज़े से वंचित हैं। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे इलाके में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि बाढ़ के दौरान सरकार के निर्देशानुसार उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज़ और जानकारी निर्धारित लाल कार्ड में भरकर जमा की थी। प्रशासन की ओर से आश्वासन भी दिया गया था कि सत्यापन के बाद प्रत्येक पात्र परिवार को सरकारी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। लेकिन जब हाल ही में बाढ़ पीड़ितों के लिए मुआवज़े का वितरण शुरू हुआ, तब रंगपुर के इन 71 परिवारों में से एक भी परिवार का नाम सरकारी सूची में शामिल नहीं मिला।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2025 की बाढ़ के समय 270 नंबर रंगपुर एल.पी. स्कूल के राहत शिविर (सेंटर नंबर-2) में कुल 71 परिवारों ने शरण ली थी। उसी दौरान क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी परिवारों के आवेदन-पत्र भरवाए गए थे।

शुक्रवार को क्षेत्र के निवासी निपेंद्र दास, अब्दुल अहाद बड़भुइयां, भाजपा के बूथ नंबर-3 के अध्यक्ष गोबिंद कुमार चक्रवर्ती, रसमय दास, सुखेंद्र चंद्र दास, अहाद उद्दीन, अंजलि रानी दास, कमला बीबी सहित दोनों समुदायों के अनेक पीड़ित महिला-पुरुषों ने बताया कि उन्होंने इस विषय में रंगपुर एल.पी. स्कूल के शिक्षक मुस्ताफ उद्दीन बड़भुइयां से संपर्क किया। शिक्षक ने उन्हें बताया कि सभी आवेदन-पत्र उन्होंने नियमानुसार संबंधित विभाग में जमा कर दिए थे।

हालांकि, यदि वास्तव में सभी आवेदन-पत्र जमा किए गए थे, तो 71 परिवारों में से एक भी नाम सरकारी सूची में क्यों नहीं आया? इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर अब तक नहीं मिल पाया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सभी आवेदन संबंधित विभाग तक पहुँचे थे, तो पूरी की पूरी सूची आखिर कैसे गायब हो गई? और यदि सूची गायब नहीं हुई, तो क्या आवेदन-पत्र वास्तव में जमा किए गए थे? इसको लेकर भी लोगों के मन में गंभीर संदेह पैदा हो गया है। इसलिए ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर वास्तविक सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ में उनके घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। आज भी अनेक परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे कठिन समय में सरकारी सहायता ही उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद थी, लेकिन सूची में नाम न होने से वे खुद को ठगा हुआ और बेहद निराश महसूस कर रहे हैं।

क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवारों के साथ न्याय किया जाए तथा उन्हें उनका वैधानिक मुआवज़ा शीघ्र प्रदान किया जाए। साथ ही स्थानीय विधायक कमलाक्ष दे पुरकायस्थ, कछार जिला प्रशासन तथा काठीघोड़ा के सर्कल अधिकारी से अपील की गई है कि वे इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करें और वास्तविक बाढ़ पीड़ितों को उनका अधिकार दिलाएं।

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