शिलचर, 2 अगस्त (प्रेरणा संवाददाता): आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ने पर लोगों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद, दक्षिण सिलचर शाखा ने एक अभिनव पहल की है। रविवार को शाखा की सामान्य सभा में उसके प्रथम स्थायी जनकल्याणकारी प्रकल्प ‘रक्तमित्र (RAKTAMITRA)’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदाताओं का एक विश्वसनीय डिजिटल पंजीकरण तैयार करना है, ताकि संकट की घड़ी में शीघ्र उपयुक्त रक्तदाता उपलब्ध कराया जा सके।
परियोजना का उद्घाटन शाखा के अध्यक्ष प्रोफेसर किंगशुक अधिकारी ने किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता के प्रति निस्वार्थ समर्पण है। रक्त की एक इकाई किसी व्यक्ति का जीवन बचा सकती है। इसलिए समाज के प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को स्वैच्छिक रक्तदाता के रूप में आगे आना चाहिए।
शाखा के सचिव शंकर सरकार ने बताया कि गूगल फॉर्म के माध्यम से रक्तदाताओं की जानकारी एकत्र कर एक आधुनिक डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में कम से कम 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं को इस पंजीकरण में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
शाखा की उपाध्यक्ष डॉ. दर्शना पटोवा ने कहा कि भविष्य में यह डिजिटल भंडार रोगियों, अस्पतालों तथा आम लोगों के लिए आपातकालीन रक्त आवश्यकता के समय एक त्वरित एवं विश्वसनीय सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगा।
शाखा के उपाध्यक्ष प्रोफेसर देवतोष चक्रवर्ती तथा सेवा प्रमुख विश्वराज चक्रवर्ती ने इस परियोजना को दक्षिण सिलचर शाखा की समाजसेवा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
बैठक में सिद्धार्थ शंकर चक्रवर्ती, अमलेन्दु डे, शंकर विश्वास, सुदीप चक्रवर्ती, डॉ. विश्वरंजन राय, डॉ. प्राणेश देवनाथ तथा सौरभ डे उपस्थित थे।
शाखा के उपाध्यक्ष हिमाद्री शेखर दास ने कहा कि समय पर किसी पंजीकृत रक्तदाता की सहायता एक परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटा सकती है और एक अमूल्य जीवन बचा सकती है।
शंकर विश्वास ने समाज के सभी वर्गों से ‘रक्तमित्र’ के स्वैच्छिक रक्तदाता पंजीकरण अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। वहीं शाखा के कोषाध्यक्ष सिद्धार्थ शंकर चक्रवर्ती ने मानवता के इस महान अभियान में भाग लेकर रक्त के बंधन से समाज को और अधिक सशक्त बनाने की अपील की।