सिलचर, 22 जुलाई: असम विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) तथा मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) के संयुक्त तत्वावधान में “जेंडर सेंसिटाइजेशन, पॉश अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण” विषय पर छह दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ सोमवार को हुआ। कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने किया।
कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश स्थित डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता उपस्थित थीं। इस अवसर पर आईसीसी की प्रीसाइडिंग ऑफिसर प्रो. करबी दत्ता चौधरी, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. आर. बालकृष्णन, उपनिदेशक प्रो. अजय कुमार सिंह, प्रभारी कुलसचिव जयंत भट्टाचार्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
स्वागत भाषण में प्रो. करबी दत्ता चौधरी ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है, जहाँ सुरक्षा, गरिमा और पेशेवर समानता सुनिश्चित हो तथा महिलाएँ आत्मविश्वास और सम्मान के साथ कार्य कर सकें। उन्होंने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के विकास पर भी विशेष बल दिया।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कर्मचारियों से इस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी प्राप्त करने का आह्वान किया तथा यौन उत्पीड़न की परिभाषा और कार्यस्थल पर अस्वीकार्य व्यवहार के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने गरिमा, पारस्परिक सम्मान और विश्वास पर आधारित स्वस्थ कार्य-संस्कृति विकसित करने का भी आह्वान किया।
मुख्य अतिथि प्रो. नीलिमा गुप्ता ने महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों तथा उन्हें उपलब्ध संस्थागत सहायता तंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने लैंगिक समानता स्थापित करने, महिला-पुरुष सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने तथा समाज में व्याप्त लैंगिक पूर्वाग्रहों और अवचेतन पक्षपात को समाप्त करने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला आगामी शुक्रवार तक चलेगी। दूसरे दिन आयोजित सत्रों में असम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत तथा रवीन्द्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मानवेंद्र दत्ता चौधरी ने व्याख्यान दिए। तीसरे दिन, अर्थात बुधवार को, कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. शांता दत्ता डे तथा असम विश्वविद्यालय के प्रो. दिव्यज्योति भट्टाचार्य ने अपने विचार व्यक्त किए।
| Sandip De |