प्रेरणा ब्यूरो कालाइन, 19 जुलाई। कछार जिले के कालाइन में पत्थर खदान को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। लंबे आंदोलन के बाद गत 4 जुलाई से ग्रामीण सड़क पर पत्थर परिवहन बंद था। इसी बीच रविवार को बंद पड़े कालाइन यूनिट-2 पत्थर खदान से पत्थर लाने के लिए सात डंपर ट्रक सड़क पर पहुंचे। पत्थर लेकर लौटते समय ग्रामीणों ने सभी ट्रकों को रोक दिया।
आंदोलनकारियों की मांग है कि ग्रामीण सड़क से किसी भी हालत में पत्थर लदे डंपरों का आवागमन नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि लंबे आंदोलन के बाद निर्मित यह सड़क हजारों लोगों के आवागमन का एकमात्र सहारा है। भारी वाहनों की आवाजाही शुरू होने पर सड़क के फिर से क्षतिग्रस्त होने की आशंका है।
ट्रकों को रोकने को लेकर उनके साथ आए कालाइन चाय बागान के कुछ युवकों और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की तथा तीखी बहस शुरू हो गई। युवकों द्वारा ट्रकों को जबरन ले जाने का प्रयास किए जाने पर गांव की महिलाएं सामने आ गईं और ट्रकों का रास्ता रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक से इलाके में तनाव फैल गया।
हालांकि, पत्थर व्यवसायी या ठेकेदारों में से कोई भी मौके पर सार्वजनिक रूप से उपस्थित नहीं था। उनके पक्ष में मौजूद कुछ बागान युवकों का दावा था कि लंबे समय से इसी रास्ते से पत्थर का परिवहन होता रहा है और आगे भी इस मार्ग का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, एक युवक ने आरोप लगाया कि कमलाक्ष्य दे पुरकायस्थ के विधायक बनने के बाद से उन्हें इस रास्ते से पत्थर का कारोबार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका। काफी देर तक गतिरोध जारी रहने के बाद सर्किल अधिकारी के हस्तक्षेप से आंदोलनकारियों ने अवरोध हटा लिया। सर्किल अधिकारी ने फोन पर आंदोलनकारियों से कहा कि आज पहुंचे ट्रकों को जाने दिया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि बाद में सभी पक्षों को लेकर बैठक कर मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच, पत्थर व्यवसायियों की ओर से भी कहा गया है कि यदि जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से आधिकारिक रूप से प्रतिबंध जारी किया जाता है, तो वे इस मार्ग से पत्थर लदे वाहनों का आवागमन नहीं करेंगे।