नाबार्ड ने कछार में 45वां स्थापना दिवस मनाया, ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को किया सम्मानित

सिलचर, मंगलवार। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम), कछार द्वारा इतखोला स्थित उदियामान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (यूएमसीएलएफ) के कम्युनिटी मैनेज्ड ट्रेनिंग सेंटर (सीएमटीसी) में एनजीओ रिफ्रेशर कार्यक्रम सह नाबार्ड के 45वें स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गैर-सरकारी संगठनों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), किसानों तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी डॉ. राहुल चक्रवर्ती, जिला उप पंजीयक सहकारी समितियां (डीआरसीएस) डॉ. नासिरुद्दीन अहमद, नाबार्ड के डीडीएम रबीशंकर लिकमाबाम, असम ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मृणाल कुमार बोरा, वरिष्ठ प्रबंधक बिप्लब डे तथा असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एएसआरएलएम) के जिला कार्यात्मक विशेषज्ञ (वित्तीय समावेशन) गोपेंद्र दास उपस्थित रहे। अपने संबोधन में डीडीएम रबीशंकर लिकमाबाम ने कहा कि पिछले 45 वर्षों में नाबार्ड ने एनजीओ, सहकारी संस्थाओं, बैंकों, एफपीओ, सरकारी विभागों, पंचायती राज संस्थाओं तथा सामुदायिक संगठनों के सहयोग से ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने सहकारी ऋण संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटलीकरण, सुशासन, वित्तीय स्थिरता, महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता विकास, वित्तीय समावेशन तथा कौशल विकास के लिए नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज कार्यक्रम को विश्व के सबसे बड़े माइक्रोफाइनेंस कार्यक्रमों में से एक बताते हुए कहा कि इसने ग्रामीण महिलाओं को बचत, बैंक ऋण और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें सफल उद्यमी एवं सामुदायिक नेतृत्वकर्ता बनाया है। उन्होंने पैक्स के आधुनिकीकरण एवं कंप्यूटरीकरण, बहुउद्देशीय पैक्स के प्रोत्साहन, जलवायु अनुकूल कृषि, ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) तथा नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (NIDA) के माध्यम से ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास में नाबार्ड की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। डॉ. राहुल चक्रवर्ती ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जबकि डॉ. नासिरुद्दीन अहमद ने सहकारिता क्षेत्र के विकास पर अपने विचार रखे। मृणाल कुमार बोरा ने ग्रामीण विकास एवं वित्तीय समावेशन में असम ग्रामीण बैंक की भूमिका तथा गोपेंद्र दास ने एएसआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों एवं व्यक्तियों का सम्मान रहा। ढोलाई कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और बोराकपार सोनापुर कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड को उत्कृष्ट पैक्स के रूप में सम्मानित किया गया, जबकि लालपानी एमपैक्स, बोआलिकांडी एमपैक्स और चिरीपार मणिपुर एमपैक्स को उभरते हुए बहुउद्देशीय पैक्स के रूप में सम्मानित किया गया। व्यक्तिगत श्रेणी में श्रीबार पार्ट-द्वितीय, लखीपुर ब्लॉक की वाई. रंजीता सिंघा तथा उधारबंद ब्लॉक के थालीग्राम की बरनाली बर्मन को सर्वश्रेष्ठ महिला किसान के रूप में सम्मानित किया गया। सिलचर ब्लॉक के मून एसएचजी, उधारबंद ब्लॉक के जुई एसएचजी तथा काटीगोरा ब्लॉक के सिद्धार यूनाइटेड एसएचजी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा यूथ शाइनिंग एसोसिएशन, अनीशा फाउंडेशन, सिद्धेश्वर प्रगति संघ तथा सनातन उन्नयन संस्था को नाबार्ड की सहयोगी संस्थाओं के रूप में ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर एक विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को फसल बीमा एवं जोखिम प्रबंधन की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समापन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण तथा समावेशी एवं सतत ग्रामीण विकास के लिए सभी हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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