चंद्रशेखर ग्वाला सिलचर 16 जुलाई :— आगामी 12 दिनों तक वे यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे, तत्पश्चात समाज में जाकर संस्कृत भाषा का शिक्षण कार्य करेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, मंत्रोच्चार तथा वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम के अतिथि प्रज्ञानानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि भारत निरंतर प्रगति कर रहा है और उसके साथ-साथ भारतीय संस्कृति तथा संस्कृत भाषा भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारती ऐसे प्रशिक्षण वर्गों एवं शिविरों के माध्यम से संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कुमार भास्कर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रह्लाद जोशी ने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्कृत भारती पिछले 45 वर्षों से इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों और शिविरों का आयोजन कर रही है। इसी सतत प्रयास के कारण संस्कृत भाषा को विश्व स्तर पर एक बोलचाल की भाषा के रूप में स्थापित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।
इस अवसर पर संस्कृत भारती पूर्वोत्तर भारत न्यास के अध्यक्ष श्री क्षौणिश चंद्र चक्रवर्ती भी उपस्थित थे। उन्होंने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा में संवाद, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा सामाजिक मूल्यों की रक्षा में संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डाला।
वर्गाधिकारी के रूप में असम विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलसचिव श्री शैलेंद्र शील उपस्थित रहे। वे आगामी 12 दिनों तक इस प्रशिक्षण वर्ग के सुचारु संचालन का दायित्व निभाएँगे। अपने वक्तव्य में उन्होंने वर्तमान समय में संस्कृत भाषा की आवश्यकता और उसकी प्रासंगिकता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ। इसी अवसर पर दक्षिण असम प्रांत के प्रबोधन वर्ग का भी शुभारंभ हुआ, जिसमें 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में वर्ग संचालन समिति के सचिव डॉ. बुद्धदेव पुरकायस्थ ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन वर्ग की मुख्य शिक्षिका श्रीमती कृष्णा सिंह ने किया।