विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,मेघालय प्रांत द्वारा आयोजित हुआ भारतीय शिक्षा दिवस कार्यक्रम*

हमें अपनी भारतीय ज्ञान परम्परा की ओर लौटना होगा-प्रो जी.डी.शर्मा

विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से सशक्त होना नहीं बल्कि शिक्षा में मानवीय मूल्यों का समावेश होना भी आवश्यक- प्रो तिमिर त्रिपाठी

भारतीय ज्ञान परम्परा:राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में विषय पर बोलते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय के कुलपति प्रो जी. डी.शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परम्परा पर जोर दिया गया है।नई शिक्षा नीति के इस मूल मंत्र को ध्यान में रखते हुए हमें अपनी भारतीय ज्ञान परम्परा की ओर लौटना होगा।मुझे लगता है इसी ओर विकसित भारत 2047 का संकल्प भी पूरा होता दिखाई पड़ता है।आयुर्वेद और योग जैसी परंपराओं पर आधारित प्राचीन भारतीय चिकित्सा, विश्व की सबसे पुरानी स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक है। ये प्रणालियाँ समग्र उपचार, प्राकृतिक उपचारों और मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन पर बल देती हैं। यह विचार प्रो शर्मा ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,मेघालय प्रांत द्वारा आयोजित भारतीय शिक्षा दिवस   कार्यक्रम में रखी।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सलाहकार प्रो आर.के शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।इसके बाद शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,उत्तर पूर्व के क्षेत्र संयोजक प्रो.तिमिर त्रिपाठी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि- विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से सशक्त होना नहीं बल्कि शिक्षा में मानवीय मूल्यों का समावेश होना भी आवश्यक है।न्यास इंडिया के स्थान पर भारत शब्द का प्रयोग हो इसके लिए भी प्रयासरत है।कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,उत्तर-पूर्व के क्षेत्र सह-संयोजक प्रो कंदर्प सैकिया ने उत्तर-पूर्व में न्यास के कार्यों और उसकी उपलब्धियों पर अपने विचार रखे।ततपश्चात  मेघालय प्रान्त के संयोजक डॉ आलोक सिंह ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा शिक्षा में भारतीयता के समावेश पर जानकारी दी उन्होंने  कहा कि न्यास का प्रयास है शिक्षा भारत केंद्रित हो,मानवीय मूल्यों से युक्त हो ।इस अवसर पर प्रो राजेश वाजेपयी,डॉ रविरंजन कुमार,डॉ हरीश शुक्ला,सुश्री मनीषा शर्मा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय के शिक्षक, छात्र एवं छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन यू.एस.टी.एम. के जीव विज्ञान के सहायक आचार्य डॉ दिपांकर दत्ता ने प्रस्तुत किया।

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